केंद्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज बुधवार को बिहार के बांका, जमुई, सिकंदरा और गुरुआ में आयोजित विशाल जनसभाओं को संबोधित किया। श्री राजनाथ सिंह ने एनडीए सरकार के कार्यकाल में बिहार में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया और कहा कि महागठबंधन समाज को हिन्दू-मुस्लिम के आधार पर बांट कर सरकार बनाना चाहते हैं, जबकि एनडीए समाज को किसी भी धार्मिक या जातीय भेदभाव से ऊपर उठाकर एकजुटता के साथ बिहार और भारत को विकास की राह पर अग्रसर करना चाहता है। कार्यक्रमों के दौरान मंच पर केन्द्रीय मंत्री श्री जीतन राम मांझी, बांका से भाजपा प्रत्याशी श्री राम नारायण मंडल, जमुई से भाजपा प्रत्याशी सुश्री श्रेयसी सिंह, सिकंदरा के प्रत्याशी श्री प्रफुल्ल मांझी और गुरुआ के प्रत्याशी डॉ. उपेंद्र प्रसाद समेत अन्य नेतागण उपस्थित रहे।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का प्रचार समाप्त हो चुका है और 6 तारीख को मतदान होना है। लेकिन प्रचार समाप्त होते ही जो रुझान सामने आए हैं, उनसे यह स्पष्ट हो गया है कि 14 नवंबर को आने वाले चुनाव परिणामों में एनडीए दो-तिहाई बहुमत से बिहार में सरकार बनाने जा रही है। पिछले 20 वर्षों में जब एनडीए की सरकार बिहार में रही, तब राज्य के विकास के लिए जो काम हुए, उनकी सराहना हर कोई करता है। पहले राजद की सरकार ने कैसा काम किया और बाद में श्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार ने कैसा काम किया इसकी लोग तुलना करते हैं। राजनीति में काम करने वाले हर कार्यकर्ता के लिए ईमानदारी सबसे अहम होती है। इतने लंबे समय तक जनसेवा करने के बावजूद कोई भी व्यक्ति यह नहीं कह सकता कि श्री नीतीश कुमार के दामन पर भ्रष्टाचार का दाग है। इसके विपरीत, बिहार में पहले जो मुख्यमंत्री रहे, उन्हें भ्रष्टाचार के मामलों के कारण अदालतों का सामना करना पड़ा और जेलों की हवा खानी पड़ी। आज भी जो विपक्षी गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, तेजस्वी यादव। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के मुकदमे चल रहे हैं और अदालतों में कई मामलों की सुनवाई हो रही है। इसलिए जो व्यक्ति ईमानदारी से बिहार की सेवा कर रहा है, उसकी ही सरकार फिर से बननी चाहिए।
भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि बिहार के बारे में लोगों की सोच 20 साल पहले कुछ और थी, लेकिन आज का बिहार पूरी तरह बदल चुका है। बिहार विकास पटरी पर आगे बढ़ रहा हैं और यह विकास केवल एनडीए के शासन में ही संभव हुआ है। जब लोग एनडीए की चौपालों में जाएंगे, तो उन्हें बाहर की नहीं, बल्कि अपने बिहार की तस्वीर दिखाई देगी, एक विकसित, प्रगतिशील और आत्मनिर्भर बिहार की। आज का बिहार “हमारा एनडीए का बिहार” है, जो विकास और सुशासन का प्रतीक बन चुका है। पहले के समय में बिहार की हालत बहुत खराब थी। उस दौर में “आइए ना हमारा बिहार में, ठोंक देंगे कट्टा कपार में” जैसी भाषा आम थी, दादागिरी और अपराध राजनीति का हिस्सा बन गए थे। शासक वर्ग अपनी कुर्सी पर बैठकर भी आम जनता की तकलीफों से अनजान था। ऐसा शासन किसी काम का नहीं, जिसमें संवेदना ही न हो।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह पहली बार देखने को मिल रहा है कि बिहार में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति इतनी बेहतर हुई है। जब राजद और कांग्रेस की सरकारें थीं, तब लोग सड़क, गली और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसते थे। उस समय जब जनता शिकायत करती थी कि उनके क्षेत्र में सड़क या गली नहीं है, तो शासन में बैठे लोग तर्क देते थे, बिहारी भाषा में कहते थे कि अगर सड़क बन जाएगी तो पुलिस भी तुम्हारे दरवाजे तक पहुंच जाएगी। वे लोगों को पुलिस की दहशत दिखाकर ही समर्थन हासिल करते थे। अब बिहार की जनता इन चालों को समझ चुकी है। आज न तो पुलिस का भय दिखाना पड़ता है और न ही झूठे तर्क देने पड़ते हैं। अब तो हाइवे और एयरपोर्ट की बात छोड़ दीजिए, बुनियादी सुविधाएं भी स्वाभाविक रूप से हर व्यक्ति तक पहुंच रही हैं।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि जब राजद के शासनकाल में मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे रहते थे, तब शासन में पारदर्शिता और ईमानदारी की बात करना मजाक जैसा प्रतीत होता था। लेकिन मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार पर 20 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बावजूद कोई भ्रष्टाचार का दाग नहीं लगा, जो अपने आप में एक मिसाल है। राजद के शासन में नैतिकता और जवाबदेही की भावना समाप्त हो चुकी थी। जैसे कोई परिवार बिना लाज, बिना हया और बिना जिम्मेदारी के नहीं चल सकता, उसी प्रकार लोकतंत्र भी बिना मर्यादा, बिना लोकलाज और बिना जवाबदेही के नहीं चल सकता। जब तक कांग्रेस की सरकारें रहीं, तब तक विकास की रफ्तार ठहरी रही। लेकिन जैसे ही आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी, देश और बिहार में विकास की एक नई शुरुआत हुई। केंद्र की एनडीए सरकार ने देश को स्थिरता, सुरक्षा और आत्मविश्वास प्रदान किया है। केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद लोगों को वास्तविक राहत मिली है और बिहार में भी इसका स्पष्ट प्रभाव दिखाई दे रहा है। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने केवल वादे किए, जबकि एनडीए ने वादों को हकीकत में बदला। आज का बिहार पुराने बिहार से पूर्णतः भिन्न है, यह नया बिहार है, विकसित बिहार है और यह परिवर्तन केवल एनडीए की नीतियों और यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के कारण संभव हुआ है।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बिहार में लोगों को कितनी सुविधाएं प्राप्त हुई हैं, यह बताने की अब आवश्यकता नहीं है, क्योंकि बिहार का हर व्यक्ति खुद इसकी गवाही दे सकता है। मनुष्य की सबसे बड़ी संपत्ति उसका स्वास्थ्य होता है। पहले बिहार के लोगों के स्वास्थ्य की चिंता के लिए राज्य का स्वास्थ्य बजट मात्र ₹700 करोड़ हुआ करता था, जबकि आज यह बढ़कर ₹20,000 करोड़ से अधिक हो गया है। एक समय था जब बिहार में बिजली की हालत बेहद खराब थी। उस दौर में अगर 23-24 घंटे बिजली आ जाए तो उसे बहुत बड़ी बात माना जाता था। लोग लालटेन से काम चलाने के आदी हो चुके थे। बिहार के बारे में पूरे देश में यह धारणा बनी हुई थी कि यह गरीबों का राज्य है, लेकिन यहां की प्रतिभा को लोग भूल जाते थे। यही कारण था कि यहां के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए बिहार के बाहर, यहां तक कि विदेशों की यूनिवर्सिटियों तक जाते थे। आज वह समय पूरी तरह बदल चुका है। अब बिहार में हाईवे बने हैं, बड़े पुल खड़े हुए हैं, ग्रामीण सड़कों का जाल बिछ चुका है। पटना, कभी अव्यवस्था और मौत की रफ्तार का प्रतीक माना जाता था, आज बिहार में मेट्रो दौड़ रही है। यह परिवर्तन केवल विकास की राजनीति से संभव हुआ है। लालू प्रसाद यादव के शासनकाल में लोग सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग करते थे, तब उस सोच का मानना था कि विकास का कोई महत्व नहीं है। वे लच्छेदार भाषणों और भावनात्मक नारों के सहारे जनता को गुमराह करके समर्थन हासिल कर लेते थे। आज भी राजद के नेता विकास का मज़ाक उड़ाते हैं। हाल ही में उन्होंने किसी नेता का भाषण सुना, जो कह रहे थे, “सड़क मत बनाओ, एक्सीडेंट हो जाता है, बिजली मत लाओ, लोग बिजली के झटके से मर जाते हैं।” यह सोच आज भी राजद में जीवित है और यही बात दर्शाती है कि कुछ राजनीतिक दल अब भी विकास विरोधी मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी, जो राजद के साथ गठबंधन करके बिहार में सरकार बनाने की कोशिश कर रही है और पहले केंद्र में भी सरकार चला चुकी है, उस समय की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कांग्रेस की सोच हमेशा विकास विरोधी रही है। कांग्रेस के नेता यह कहते थे कि सीमा क्षेत्रों में पक्की सड़कें और मजबूत बुनियादी ढांचे नहीं बनाए जाने चाहिए। उस समय संसद में जब किसी सदस्य ने सवाल उठाया कि आखिर बॉर्डर पर सड़कें और आधारभूत ढांचे क्यों नहीं बनाए जाने चाहिए, तो कांग्रेस के नेताओं ने यह तर्क दिया था कि यदि सीमाओं पर पक्की सड़कें और सुविधाएं बन जाएंगी, तो विरोधी देश उनका उपयोग करके भारत की सीमा में घुस सकते हैं और कब्जा कर सकते हैं। ऐसे तर्क कांग्रेस और राजद नेताओं द्वारा लगातार दिए जाते रहे हैं, जिनसे उनकी मानसिकता का पता चलता है। लेकिन सच्चाई यह है कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस विकास-विरोधी सोच को पूरी तरह बदल दिया है। आज भारत सीमा सुरक्षा और विकास, दोनों में समान रूप से प्रगति कर रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने यह सिद्ध कर दिया कि सुरक्षा और विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। आज भारत अभूतपूर्व गति से आगे बढ़ रहा है और यह परिवर्तन उस नयी सोच का परिणाम है जिसने डर और रुकावट की राजनीति को पीछे छोड़ दिया है।
श्री सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले भारत धन-दौलत और आर्थिक आकार के मामले में दुनिया के देशों में ग्यारहवें स्थान पर था। मात्र 9 से 10 वर्षों के भीतर भारत ने इतनी तेज़ी से प्रगति की है कि आज वह दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। यह उपलब्धि हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देने वाली है। अभी हाल ही में विश्व की प्रमुख वित्तीय संस्थाओं ने भी इस तथ्य को स्वीकार किया है कि भारत जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसमें कोई संदेह नहीं है कि आने वाले डेढ़ से दो वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। यह सब यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सशक्त और निर्णायक कार्यशैली का परिणाम है। काम करने का यही तरीका होता है, स्पष्ट नीतियां, तेज निर्णय और राष्ट्रहित सर्वोपरि। पहले कांग्रेस के समय जब भी शाम होती थी, हमारे पड़ोसी देश भारत की सीमाओं में घुसपैठ कर लेते थे। लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। आज कोई भी दुश्मन देश भारत की सीमा में घुसने की हिम्मत नहीं कर सकता। अब ऐसा कोई “माँ का लाल” पैदा नहीं हुआ जिसने भारत की सीमाओं में कदम रखने का साहस किया हो। पिछली बार जो आतंकवादी घुसे भी थे, वे छिपकर आए थे, खुलेआम आने की हिम्मत नहीं कर पाए। यही नया भारत है, जो न केवल विकास में अग्रणी है, बल्कि अपनी सीमाओं की रक्षा में भी अडिग और सशक्त खड़ा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि कुछ नौजवान अपने परिवार के सदस्यों के साथ कश्मीर में पहलगाम घूमने गए थे। वहां धर्म पूछ कर उन्हें मार दिया गया। भारतीय सेना ने उन प्रमुख आतंकवादी ठिकानों को भी निशाना बनाया जो बड़े बड़े आतंकवादी संगठनों से जुड़े थे। ऑपरेशन सिंदूर में आतंकवादियों के सारे ठिकानों का सफाया कर दिया गया। यदि कोई आतंकवादी दोबारा कोशिश करेगा तो फिर से ऑपरेशन सिंदूर कर आक्रमण करेंगे और उनका सफाया कर देंगे। आतंकवादियों को धर्म पूछकर नहीं मारा गया, बल्कि उनके कर्म देखकर मारा गया। हमारे और उनकी सोच में सबसे बड़ा अंतर यही है। भारत अब दुनिया में कमजोर देश के रूप में नहीं जाना जाता, बल्कि ताकतवर देश के रूप में जाना जाता है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 में जब आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे और वे स्वयं पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, तब जो संकल्प जनता के सामने रखा गया था, उसे पूरी तरह निभाया गया। 2014 से पूर्व देश की स्थिति विश्व के दृष्टिकोण में कमजोर थी, लेकिन आज भारत की पहचान एक सशक्त, सक्षम और सम्मानित राष्ट्र के रूप में स्थापित हो चुकी है। पहले भारत की आर्थिक स्थिति विश्व के देशों में 11वें स्थान पर थी, लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह बढ़कर चौथे स्थान पर पहुंच गई। यह केवल सरकार का दावा नहीं है, बल्कि विश्व की प्रमुख वित्तीय संस्थाए और अंतरराष्ट्रीय एजेंसिया भी भारत की तीव्र गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था को मान्यता दे रही हैं। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और आर्थिक शक्ति लगातार बढ़ रही है। आने वाले एक से डेढ़ वर्ष के भीतर भारत संपन्नता और अर्थव्यवस्था के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर स्थापित होगा। उस समय केवल दो देश भारत से आगे होंगे, अमेरिका और चीन, और तीसरे स्थान पर एनडीए के नेतृत्व में भारत गर्व से खड़ा होगा।
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज अंतरराष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। मलेशिया में जहां दुनिया के 21 देशों के प्रतिनिधि मौजूद थे, जिनमें अमेरिका, चीन, रूस जैसे बड़े देश भी शामिल थे। इन सभी देशों के रक्षा मंत्रियों से उनकी बातचीत हुई और यह महसूस किया कि आज भारत के प्रति दुनिया का नजरिया पूरी तरह बदल गया है। पहले जब भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखता था, तो उसकी बातों को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आज जब भारत बोलता है, तो पूरी दुनिया ध्यान से सुनती हैभारत की अहमियत अब वैश्विक स्तर पर स्थापित हो चुकी है। यह परिवर्तन केवल कूटनीति से नहीं, बल्कि भारत की सशक्त और निर्णायक नीति के कारण आया है। अब हमारे पड़ोसी देश भी यह बात समझ चुके हैं कि भारत शांतिप्रिय देश है, भारत किसी को छेड़ता नहीं, लेकिन जो भारत को छेड़ता है, भारत अब उसे छोड़ता भी नहीं। यह धारणा अब दुनिया भर में स्थापित हो गई है। हमारे सैनिकों के पराक्रम ने हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। आज भारतीय सेना का शौर्य विश्वभर में सम्मान का विषय है।
केंद्रीय रक्षा मंत्री ने कहा कि अब कांग्रेस के नेता सेना को भी जाति और पंथ के आधार पर बांटने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी का हालिया बयान इसका उदाहरण है। भाजपा हमेशा से आरक्षण के पक्ष में रही है और उसने समाज के कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों को आरक्षण दिया है। यहां तक कि गोवा में भी आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों को आरक्षण का लाभ दिया गया है। लेकिन सेना के संदर्भ में जाति-पात का मुद्दा उठाना न केवल अनुचित है, बल्कि देश की एकता और मनोबल के खिलाफ है। सेना राष्ट्र की शक्ति और गौरव का प्रतीक है, उसे किसी जातीय चश्मे से देखने की कोशिश करना देशहित के विरुद्ध है। हमारे सेना के जवानों का एक ही धर्म है, वह धर्म है सैनिक धर्म और इसके अतिरिक्त कोई दूसरा धर्म नहीं होता। ऐसी बातें देश के हित में किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं हैं। कांग्रेस के नेता कम से कम हमारी सेना को राजनीति में न मिलाएं। जब-जब संकट आया है, हमारे जवानों ने अपने शौर्य और पराक्रम से भारत का मस्तक ऊंचा किया है। जाति, पंथ और मजहब के आधार पर विभाजन ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है। भाजपा का लक्ष्य समाज के सभी वर्गों का उत्थान है। यदि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोच न होती तो भाजपा ने दो राष्ट्रपति नहीं बनाए होते; एक दलित समुदाय से और एक आदिवासी समुदाय से, जो भारत के इतिहास में पहली बार हुआ। यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना चाहते हैं और किसी भी आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहते। भारत अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। बिहार का विकास आवश्यक है क्योंकि जब बिहार विकसित होगा तभी भारत भी विकसित होगा।
श्री सिंह ने कहा कि एनडीए का संकल्प पत्र जारी हुआ है, उसमें यह बात पूरी तरह साफ कर दी गई है कि एनडीए सरकार बनने के बाद क्या-क्या करेगी। जो बातें संकल्प पत्र में कही गई है, वे वादे नहीं बल्कि अटल प्रतिज्ञाएं हैं। 2014 से आज तक यदि कोई भाजपा के चुनावी घोषणापत्र उठाकर देखे तो पता चलेगा कि जो भी कहा गया था उसे पूरा किया गया है। भारतीय जनता पार्टी की कथनी और करनी में कभी भी अंतर नहीं रहा। आजाद भारत में नेताओं के कहने और करने में जो अंतर होने के कारण जनता का विश्वास घटा, उस विश्वास के संकट को एनडीए ने चुनौती के रूप में स्वीकार किया है। एनडीए सरकार बिहार को ऊंचाइयों पर ले जाएगी और जिस भी प्रकार के सहयोग की आवश्यकता होगी, केंद्र सरकार वह सहयोग प्रदान करेगी। एनडीए किसान परिवारों के विकास और सम्मान में ₹6000 किसान सम्मान निधि राशि को बढ़ाकर ₹9000 करेगी। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की सरकार ने महिलाओं के खातों में ₹10,000 की राशि जमा कराई है। भारत की राजनीति में सबसे बड़ी विडंबना यही रही कि लोगों की बातें और कार्य में अंतर था, जिसके कारण जनता का विश्वास धीरे-धीरे राजनीति और नेताओं से उठता गया। लेकिन भाजपा और एनडीए ने उस परंपरा को तोड़ा है। भाजपा का मूल मंत्र है, प्राण जाए पर वचन न जाए और पार्टी ने जो भी कहा, उसे पूरा कर भी किया। श्री सिंह ने अपील की कि इस बार रिकॉर्ड तोड़ मतों से भाजपा और एनडीए के सभी प्रत्याशियों को विजय दिलाकर बिहार में नया इतिहास रचें और बिहार में विकास कि बयार को आगे बढ़ाएं।

