छात्रों की तुलना करने से बचें, छात्रों की सबके सामने आलोचना न करें, उन्हें प्रोत्साहित करें और प्रेरित करने के लिए उनकी प्रशंसा करें
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 10 फरवरी को नई दिल्ली की सुंदर नर्सरी में परीक्षा पे चर्चा के 8वें आयोजन के दौरान छात्रों से बातचीत की। प्रधानमंत्री ने देशभर के छात्रों के साथ अनौपचारिक बातचीत में कई विषयों पर चर्चा की। उन्होंने तिल से बनी मिठाइयां वितरित कीं, जो सर्दियों के दौरान शरीर को गर्म रखने के लिए पारंपरिक रूप से परोसी जाती हैं।
पोषण से समृद्धि
श्री मोदी ने पोषण के विषय पर कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित किया है और भारत के एक प्रस्ताव पर इसे दुनिया भर में प्रचारित किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने दृढ़ता से आग्रह किया है कि पोषण के बारे में बहुत जागरूकता होनी चाहिए, क्योंकि उचित पोषण कई बीमारियों को रोकने में मदद करता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में बाजरा को सुपरफूड के रूप में जाना जाता है। श्री मोदी ने बच्चों से मौसमी फल खाने का आग्रह किया। उन्होंने बच्चों को जंक फूड, तैलीय भोजन और मैदा से बने खाद्य पदार्थों से बचने के लिए प्रोत्साहित किया।
प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए इस बात पर जोर दिया कि बीमार नहीं होने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति स्वस्थ है। उन्होंने बच्चों से स्वास्थ्य पर ध्यान देने का आग्रह करते हुए कहा कि शरीर की फिटनेस और स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त मात्रा में नींद लेना महत्वपूर्ण है।
दबाव पर काबू पाना
श्री मोदी ने दबाव पर काबू पाने के विषय पर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे समाज ने इस विचार को गहराई से समाहित कर लिया है कि 10वीं या 12वीं जैसी स्कूली परीक्षाओं में अधिक अंक नहीं लाना जीवन बर्बाद करना है। उन्होंने कहा कि इससे बच्चों पर दबाव और बढ़ जाता है। क्रिकेट मैच में गेंद पर बल्लेबाज की एकाग्रता का हवाला देते हुए श्री मोदी ने बच्चों को बल्लेबाज की तरह बाहरी दबाव से बचने और केवल अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे उन्हें दबाव से उबरने में मदद मिलेगी।
नेतृत्व की कला
श्री मोदी ने एक छात्र द्वारा प्रभावी नेतृत्व पर सुझाव साझा करने के लिए पूछे जाने पर कहा कि बाहरी दिखावट किसी नेता को परिभाषित नहीं करती है, बल्कि एक नेता वह होता है जो दूसरों के लिए एक उदाहरण स्थापित करके नेतृत्व करता है। इसे प्राप्त करने के लिए, उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को खुद को बदलना चाहिए और उनके व्यवहार में यह बदलाव दिखना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘नेतृत्व थोपा नहीं जाता है, बल्कि आपके आस-पास के लोगों द्वारा स्वीकार किया जाता है।’ उन्होंने कहा कि दूसरों को उपदेश देने से स्वीकृति नहीं मिलती; बल्कि व्यक्ति का व्यवहार ही स्वीकार्य होता है। श्री मोदी ने जोर दिया कि नेतृत्व के लिए टीमवर्क और धैर्य आवश्यक है।
किताबों से परे – समग्र विकास
शौक और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने के विषय पर, जबकि आम धारणा यह है कि शिक्षा ही सफलता का एकमात्र रास्ता है, प्रधानमंत्री ने कहा कि छात्र रोबोट नहीं हैं और उनका समग्र विकास काफी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल अगली कक्षा में आगे बढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि व्यापक व्यक्तिगत विकास के लिए है। अतीत पर विचार करते हुए श्री मोदी इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे बागवानी जैसे विषय शुरुआती स्कूली शिक्षा के पाठ अप्रासंगिक लग सकते हैं, लेकिन वे समग्र विकास में योगदान करते हैं। प्रधानमंत्री ने माता-पिता और शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को कठोर शैक्षणिक माहौल में सीमित न रखें, क्योंकि इससे उनका विकास रुक जाता है।
अपने समय पर नियंत्रण रखें, अपने जीवन पर नियंत्रण रखें
श्री मोदी ने एक छात्र द्वारा समय प्रबंधन के बारे में पूछे जाने पर कहा कि हर किसी के पास दिन में 24 घंटे होते हैं, फिर भी कुछ लोग बहुत कुछ हासिल कर लेते हैं जबकि अन्य को लगता है कि कुछ हासिल नहीं हुआ। उन्होंने समय प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बहुत से लोगों को यह समझ नहीं है कि अपने समय का प्रभावी ढंग से उपयोग कैसे किया जाए। प्रधानमंत्री ने समय का ध्यान रखने, विशिष्ट कार्य निर्धारित करने और प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने की सलाह दी। उन्होंने चुनौतीपूर्ण विषयों से बचने के बजाय उन पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि फोन सहित इसी तरह की अन्य वस्तुएं ध्यान केंद्रित करने और शैक्षणिक प्रदर्शन में बाधा डालते हैं।
अपनी रुचियों का पालन करें
श्री मोदी ने बच्चों पर कुछ खास करियर चुनने के लिए माता-पिता के दबाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि माता-पिता की अपेक्षाएं अक्सर अपने बच्चों की दूसरों से तुलना करने से उत्पन्न होती हैं, जो उनके अहम और सामाजिक स्थिति को ठेस पहुंचा सकती हैं। उन्होंने माता-पिता को सलाह दी कि वे अपने बच्चों को हर जगह मॉडल के रूप में न दिखाएं, बल्कि उनकी खूबियों को प्यार करें और स्वीकार करें।
प्रधानमंत्री ने माता-पिता को अपने बच्चों की खूबियों को पहचानने और उन्हें विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया, भले ही वे अकादमिक रूप से इच्छुक न हों। उन्होंने कौशल विकास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अगर वे प्रधानमंत्री नहीं होते तो वे कौशल विकास विभाग चुनते। श्री मोदी ने कहा कि अपने बच्चों की क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करके माता-पिता दबाव को कम कर सकते हैं और उन्हें आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।
हर बच्चा विशिष्ट है
परीक्षाओं के दौरान अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह प्राथमिक मुद्दा छात्रों के साथ कम और उनके परिवारों के साथ अधिक है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई माता-पिता अपने बच्चों पर इंजीनियरिंग या चिकित्सा जैसे विशिष्ट करियर को अपनाने के लिए दबाव डालते हैं, जबकि बच्चे की रुचि कला जैसे क्षेत्रों में होती है। यह निरंतर दबाव बच्चे के जीवन को तनावपूर्ण बना देता है। उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों की क्षमताओं और रुचियों को समझने और पहचानने, उनकी प्रगति की निगरानी करने और सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। उदाहरण के लिए यदि कोई बच्चा खेलों में रुचि दिखाता है, तो माता-पिता को उन्हें खेल कार्यक्रम देखने के लिए ले जाकर प्रोत्साहित और प्रेरित करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए ऐसा माहौल बनाने से बचने का आग्रह किया, जहां केवल शीर्ष प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर ध्यान दिया जाता है, जबकि अन्य को नजरअंदाज कर दिया जाता है। उन्होंने छात्रों की तुलना न करने और प्रत्येक बच्चे की अनूठी क्षमताओं को प्रोत्साहित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने छात्रों को सुधार के लिए प्रयास करने और अच्छा प्रदर्शन करने की याद दिलाई, लेकिन यह भी स्वीकार किया कि जीवन में पढ़ाई ही सब कुछ नहीं है।
असफलताओं को अपना शिक्षक बनाएं
श्री मोदी ने, असफलता से कैसे उबरें, विषय पर कहा कि भले ही 30-40 प्रतिशत छात्र अपनी 10वीं या 12वीं कक्षा में असफल हो जाएं, लेकिन जीवन समाप्त नहीं होता। उन्होंने असफलताओं को अपना शिक्षक बनाने की सलाह देते हुए क्रिकेट का उदाहरण दिया, जहां खिलाड़ी अपनी गलतियों की समीक्षा करते हैं और सुधार के लिए प्रयास करते हैं। प्रधानमंत्री ने जीवन को केवल परीक्षाओं के नजरिए से नहीं, बल्कि समग्र रूप से देखने का आग्रह किया। उन्होंने केवल शैक्षणिक उपलब्धियों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय इन शक्तियों पर काम करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लंबे समय में सफलता की कहानी किसी व्यक्ति के जीवन और योग्यता से ही तय होती है, न कि केवल अकादमिक अंकों से।
परीक्षा के दबाव से निपटना
इस दौरान छात्रों द्वारा समय पर अपने परीक्षा पेपर पूर्ण नहीं करने की आम समस्या पर चर्चा की गई, जिससे तनाव और दबाव पैदा होता है। प्रधानमंत्री ने इससे निपटने के लिए संक्षिप्त उत्तर लिखने और समय का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने के तरीके सीखने के लिए पिछली परीक्षा के प्रश्नपत्रों का गहन अभ्यास करने की सलाह दी। उन्होंने उन प्रश्नों पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर प्रकाश डाला, जिनमें अधिक प्रयास की आवश्यकता होती है और कठिन या अपरिचित प्रश्नों पर बहुत अधिक समय खर्च नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नियमित अभ्यास से परीक्षा के दौरान बेहतर समय प्रबंधन में मदद मिलती है।
प्रकृति की देखभाल
प्रधानमंत्री ने जलवायु परिवर्तन पर बात की और इसके बारे में गंभीरता से विचार करने के लिए युवा पीढ़ी की सराहना की। उन्होंने कहा कि दुनिया में बहुत सी विकासात्मक प्रक्रियाओं ने शोषण की संस्कृति को जन्म दिया है, जहां लोग पर्यावरण संरक्षण की तुलना में व्यक्तिगत लाभ को प्राथमिकता देते हैं। श्री मोदी ने मिशन लाइफ (पर्यावरण के लिए जीवनशैली) का उल्लेख किया, जो प्रकृति की रक्षा और पोषण करने वाली जीवनशैली को बढ़ावा देता है। उन्होंने भारत में सांस्कृतिक विधियों को साझा किया, जैसे धरती माता से क्षमा मांगना और पेड़ों और नदियों की पूजा करना, जो प्रकृति के प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हैं।

