भारत ने विज्ञान को हमेशा देश की प्रगति से जोड़कर देखा है: नरेन्द्र मोदी

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भारत की परमाणु ऊर्जा की यात्रा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर—
तमिलनाडु के कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल की

       प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 26 अप्रैल को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 133वीं कड़ी की शुरुआत में कहा कि भारत ने विज्ञान को हमेशा देश की प्रगति से जोड़कर देखा है। इसी सोच के साथ हमारे वैज्ञानिक नागरिक परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयासों से यह कार्यक्रम राष्ट्र निर्माण में अहम् योगदान दे रहा है। इससे हमारी औद्योगिक विकास को, ऊर्जा क्षेत्र को, स्वास्थ्य क्षेत्र (healthcare sector) को बहुत लाभ हुआ है। खेती-किसानी से लेकर आधुनिक इनोवेटर्स को भी भारत के नागरिक परमाणु कार्यक्रम ने बहुत मदद की है।

उन्होंने कहा कि कुछ ही दिन पहले हमारे परमाणु वैज्ञानिक ने एक और बड़ी उपलब्धि से भारत का गौरव बढ़ाया है। तमिलनाडु के कलपक्कम में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है। दरअसल, क्रिटिकैलिटी वह स्टेज है, जिसमें रिएक्टर पहली बार ‘सेल्फ सस्टेनिंग न्यूक्लियर चेन रिएक्शन’ में सफलता हासिल करता है। इस स्टेज का मतलब है— रिएक्टर का ऑपरेशनल फेज में पहुंचना। भारत की परमाणु ऊर्जा की यात्रा में यह एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है और बड़ी बात ये भी कि परमाणु रिएक्टर पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है।

श्री मोदी ने कहा कि इसे ब्रीडर रिएक्टर क्यों कहते हैं? इसके पीछे भी एक वजह है। यह एक ऐसा सिस्टम है, जो ऊर्जा के उत्पादन के साथ-साथ भविष्य के लिए नया ईंधन भी खुद ही तैयार करता है।

भारत की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता 56 गीगावाट से अधिक

श्री मोदी ने कहा कि भारत ने हाल ही में पवन-ऊर्जा यानी Wind Energy में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अब भारत की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। पिछले एक साल में ही करीब 6 गीगावाट नई क्षमता जुड़ी है। पवन ऊर्जा में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है और दुनिया भी हमारी तरफ देख रही है।

उन्होंने कहा कि आज भारत पवन ऊर्जा क्षमता में दुनिया में चौथे स्थान पर है। यह हमारे इंजीनियरों की मेहनत है यह हमारे युवाओं का परिश्रम है, यह देशी की सामूहिक इच्छाशक्ति का प्रतीक है।

हमने बांस को पेड़ की कैटगरी से बाहर किया

श्री मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर हम सबके लिए अष्टलक्ष्मी है। यहां भरपूर प्रतिभा है और पूर्वोत्तर की प्राकृतिक सुंदरता भी सबका ध्यान खींचती है। ‘मन की बात’ में भी हम अक्सर पूर्वोत्तर के लोगों की उपलब्धियों पर चर्चा करते आए हैं। आज ऐसी ही एक और उपलब्धि की मैं आपसे चर्चा करूंगा और वो है— बांस क्षेत्र में पूर्वोत्तर की सफलता।

उन्होंने कहा कि जिस चीज को कभी बोझ के रूप में देखा जाता था, वह आज रोजगार, कारोबार और नवाचार को नई गति दे रही है। श्री मोदी ने कहा कि अंग्रेजों के बनाए कानून के हिसाब से बांस को पेड़ के रूप में परिभाषित किया गया था और इससे जुड़े नियम बहुत कड़े थे। कहीं पर भी बांस को ले जाना बहुत मुश्किल था। ऐसे में यहां के लोग बांस से जुड़े काम-धंधे से दूर होते गए।

उन्होंने कहा कि साल 2017 में कानून में बदलाव करके हमने बांस को पेड़ की कैटगरी से बाहर किया। जिसके नतीजे सबके सामने हैं। आज पूरे पूर्वोत्तर में बांस क्षेत्र फल-फूल रहा है। लोग लगातार नवाचार करके इसमें मूल्य संवर्धन कर रहे हैं।

दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना

श्री मोदी ने कहा कि हमारे देश में इस समय एक बहुत अहम अभियान चल रहा है, जिसके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी जरूरी है। ये है जनगणना का अभियान, यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है।

उन्होंने कहा कि जो साथी पहले से इस तरह की प्रक्रिया से गुजरे हैं, इस बार जनगणना का उनका अनुभव अलग होने वाला है। जनगणना 2027 को डिजिटल बनाया गया है। सारी जानकारी सीधे डिजिटल माध्यम में दर्ज हो रही है। घर-घर जाने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप्प है। वे आपसे बात करके उसी में जानकारी दर्ज करेंगे।

श्री मोदी ने कहा कि देश की जनगणना सिर्फ सरकारी काम नहीं है। यह हम सब की जिम्मेदारी है। आपकी भागीदारी बहुत जरूरी है। आपकी दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है, यह गोपनीय रखी जाती है, डिजिटल सुरक्षा के साथ इसे सुरक्षित किया जाता है। आइए, हम सब मिलकर इस प्रक्रिया में भाग लें। जनगणना 2027 को सफल बनाएं।