10 जून, 2026 को श्री नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के कार्यकाल के लगातार 4,399 दिन पूरे हो रहे हैं। यह उपलब्धि उस अटूट भरोसे को दिखाती है जो करोड़ों भारतीयों ने ‘राष्ट्र प्रथम’ (नेशन फर्स्ट) के सिद्धांत पर आधारित शासन व्यवस्था में जताया है।
सार्वजनिक जीवन में अपने लगभग पांच दशकों के अनुभव मे मुझे कई प्रधानमंत्रियों को करीब से देखने और उनसे बातचीत करने का मौका मिला है; हर एक ने अलग-अलग चुनौतियों और हालात में भारत का नेतृत्व किया। लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी सबसे अलग हैं क्योंकि उन्होंने अपनी सभ्यता पर गर्व करते हुए आधुनिक शासन व्यवस्था के साथ उसका बेहतरीन तालमेल बैठाया है।
एक समय भारत दुनिया की सबसे अमीर और सबसे उन्नत सभ्यताओं में से एक थी। फिर भी, स्वतंत्रता के बाद कई दशकों तक हम अक्सर एक सोए हुए विशालकाय देश की तरह व्यवहार करते रहे— अपनी पहचान को लेकर हिचकिचाहट और दुनिया में अपनी जगह को लेकर अनिश्चितता बनी रही। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपने सांस्कृतिक गौरव एवं आत्मविश्वास को फिर से पाया है।
आज भारत वैश्विक व्यवस्था में कहीं अधिक आत्मविश्वास और रणनीतिक महत्व के साथ खड़ा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने यह सुनिश्चित किया है कि भारत दुनिया के बड़े देशों के साथ बराबरी के स्तर पर जुड़े और हमेशा ‘भारत प्रथम’ (इंडिया फार्स्ट) के सिद्धांत का पालन करे।
यह बदलाव केवल पुरानी यादों या पुरानी बातों पर आधारित नहीं है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने भारत के प्राचीन ज्ञान — जैसे योग, प्राणायाम, ध्यान और आध्यात्मिक परंपराओं — को आधुनिक तकनीक, डिजिटल गवर्नेंस और इनोवेशन से होने वाले विकास के साथ जोड़ा है। परंपरा और तकनीक का यह मेल 21वीं सदी में भारत का एक अहम योगदान बन सकता है। ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के माध्यम से योग को दुनिया भर में मिली मान्यता शायद इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे भारत के प्राचीन ज्ञान को मानवता की भलाई के लिए एक वैश्विक ताकत के तौर पर स्थापित जा सकता है। एक दशक में भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। इन 12 सालों की सबसे बड़ी विशेषता रही है इस दौरान मजबूत इरादे और उसे लागू करने की क्षमता पर आधारित गवर्नेंस पर जोर दिया गया। डीपीआई, जन धन खाते, आधार इंटीग्रेशन, यूपीआई और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से भारत ने मानवता के इतिहास में वित्तीय समावेश की सबसे बड़ी मुहिमों को सफलतापूर्वक लागू किया है। दशकों तक लीकेज, कमियों और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थी तक न पहुंच पाने के कारण गरीबी और लोगों का मुख्यधारा से अलग-थलग रहना जारी रहा। तकनीक ने इस खाई को पाटने में मदद की है। बिचौलियों को हटाकर और बड़े पैमाने पर लीकेज को कम करके लाभार्थियों को सीधे 51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रकम ट्रांसफर की गई है। कई मायनों में भारत ने डिजिटल खाई को पाटकर आर्थिक खाई को भी पाटा है।
सामाजिक बदलाव का पैमाना भी उतना ही अहम रहा है। लाखों भारतीयों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है; आवास, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवा, पानी और ग्रामीण बुनियादी ढांचे में निवेश ने लाखों लोगों के जीवन में सुधार किया है। इसका मूल मंत्र स्पष्ट रहा है: सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास।
ऐसे समय में जब दुनिया ने महामारी और सप्लाई-चेन के झटकों से लेकर भू-राजनीतिक संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितता जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया है, भारत मजबूत और स्थिर बना रहा है और सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है।
प्रधानमंत्री श्री मोदी ने हाईवे, बंदरगाहों, हवाई अड्डों, फ्रेट कॉरिडोर, रेलवे, रिन्यूएबल एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग और उभरती हुई टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव लाने वाले निवेश के माध्यम से देश के दीर्घकालिक निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित किया है। ये फैसले तुरंत राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की मजबूत नींव रखने वाले निवेश हैं। टेक्नोलॉजी-आधारित गवर्नेंस और आर्थिक सुधारों की लंबे समय से वकालत करने वाले व्यक्ति के तौर पर मैं विशेष रूप से प्रधानमंत्री श्री मोदी की इस समझ की सराहना करता हूं कि कैसे इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप समाज में बदलाव ला सकते हैं। युवा भारतीय अब केवल विदेशों में ही अवसर नहीं तलाशते; बल्कि वे भारत में ही विश्व-स्तरीय उद्यम बनाने की इच्छा रखते हैं।
एक और अहम बदलाव केंद्र और राज्यों के रिश्तों में आया है। कॉम्पिटिटिव और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म (प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद) ने राज्यों को नई चीजे करने, मुकाबला करने और आगे बढ़ने के अधिक मौके दिए हैं। राज्यों को अब केवल प्रशासनिक इकाइयों के बजाय राष्ट्रीय विकास के इंजन के तौर पर देखा जा रहा है। आंध्र प्रदेश को इस विकास-केंद्रित साझेदारी से बहुत लाभ हुआ है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगीकरण, अमरावती और नई टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। मैंने अक्सर कहा है कि श्री नरेन्द्र मोदी भारत के लिए सही समय पर सही नेता हैं। 12 साल बाद मेरा यह भरोसा और मजबूत हुआ है। इतिहास इस दौर को केवल आर्थिक विकास या राजनीतिक स्थिरता के लिए नहीं, बल्कि उससे भी गहरी बात के लिए याद रखेगा — और वह है भारत का स्वयं पर भरोसा फिर से कायम होना।
मेरा मानना है कि यह भारत के लिए एक निर्णायक पल है; हमारे देश के लिए एक सुनहरे दौर की शुरुआत है। भरोसे, उम्मीद और सामूहिक संकल्प के साथ मुझे यकीन है कि भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ेगा।

