पश्चिम बंगाल की जनता ने ‘असोल पोरिबोरतोन’ (वास्तविक परिवर्तन) के लिए एक ऐतिहासिक, परिवर्तनकारी व निर्णायक जनादेश दिया है। उन्होंने 294 सदस्यों वाली विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी को 207 सीटों का विशाल जनादेश दिया है, जो पश्चिम बंगाल में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत का प्रतीक है। भ्रष्टाचार और लूट, राजनीतिक हिंसा, सिंडिकेट तंत्र और तुष्टीकरण की राजनीति– ये कुरीतियां जो पिछली टीएमसी सरकार की पहचान बन गई थीं— को जनता द्वारा करारा जवाब दिया गया है। जनता ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी और करिश्माई नेतृत्व में विकास, स्थिरता और पारदर्शी शासन के लिए तथा ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के विजन को साकार करने के लिए निर्णायक रूप से मतदान किया है। ‘डबल इंजन’ सरकार की पुकार बंगाल की उस आकांक्षा को दर्शाती है, जो ‘विकसित भारत’ की देशव्यापी यात्रा में स्वयं को जोड़ना चाहती है।
पश्चिम बंगाल में मिला यह विशाल जनादेश केवल एक चुनावी घटना नहीं है; यह एक ऐसा सभ्यतागत और वैचारिक बदलाव है, जिसके लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से और सामान्य रूप से आम लोगों ने दशकों तक लगातार संघर्ष किया, सामूहिक रूप से सपने देखे और बलिदान दिया
पश्चिम बंगाल में मिला यह विशाल जनादेश केवल एक चुनावी घटना नहीं है; यह एक ऐसा सामाजिक-सांस्कृतिक एवं वैचारिक परिवर्तन है, जिसके लिए भाजपा के कार्यकर्ताओं ने विशेष रूप से और सामान्य रूप से आम लोगों ने दशकों तक लगातार संघर्ष किया, सामूहिक रूप से सपने देखे और अनेकों बलिदान दिया। बंगाल, जो स्वामी विवेकानंद, श्री अरबिंदो, बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय, गुरुदेव रवींद्रनाथ, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और अनगिनत नायकों व क्रांतिकारियों की धरती रहा है, ने राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक गौरव और निर्णायक नेतृत्व में अपने विश्वास को एक बार फिर से पुष्ट किया है। पश्चिम बंगाल से आया यह संदेश भव्य और स्पष्ट है: डर और विभाजन की प्रतिगामी राजनीति को नकार दिया गया है और परफॉरमेंस, विकास, आकांक्षा तथा राष्ट्रीय एकता की राजनीति की जीत हुई है।
असम और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव परिणाम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भाजपा तथा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) द्वारा संचालित शासन मॉडल का एक और शानदार उदाहरण हैं। असम में 126 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए की 102 सीटों के साथ शानदार जीत– जिसमें भाजपा की अकेले 82 सीटों की पूर्ण बहुमत वाला जनादेश भी शामिल है– विकास, स्थिरता और सांस्कृतिक जुड़ाव में लोगों के अपार विश्वास को दर्शाती है। यह ऐतिहासिक लगातार तीसरा जनादेश— जो राज्य में किसी भी गैर-कांग्रेसी गठबंधन के लिए पहली बार है— उस परिवर्तनकारी शासन के प्रति जनता की मुहर है, जिसने ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ के तहत शांति समझौतों, बुनियादी ढांचे के विस्तार, कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच और बेहतर कनेक्टिविटी को परिणामकारी दिशा दी है। इसी तरह, पुडुचेरी में एनडीए की 18 सीटों के साथ जीत, प्रशासनिक स्थिरता और विकासोन्मुख शासन के लिए एक सशक्त जनादेश का संकेत है। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस-डीएमके गठबंधन को मिली निर्णायक पराजय से यह परिलक्षित होता है कि जनता अब अराजकता, भ्रम और टकराव की राजनीति के बजाय, राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप शासन मॉडल को अधिक पसंद कर रही है।
केरल में चुनावी परिणाम भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। पहली बार पार्टी तीन विधायकों के साथ राज्य विधानसभा में पहुंची है और साथ ही यह धीरे-धीरे उन पुरानी क्षेत्रीय और वामपंथी ताकतों के मुकाबले एक भरोसेमंद वैचारिक और राजनीतिक विकल्प के तौर पर उभर रही है। युवाओं, प्रोफेशनल्स और पहली बार वोट डालने वालों के बीच भाजपा का बढ़ता समर्थन एक बड़े वैचारिक बदलाव और लोगों के बीच भाजपा के प्रति बढ़ते झुकाव का संकेत है। तमिलनाडु में भले ही जनादेश बंटा हुआ रहा हो, लेकिन कांग्रेस-डीएमके गठबंधन को मिली करारी हार और एनडीए के बढ़ते प्रभाव से यह साफ होता है कि लोग अब विकास और परफॉरमेंस की राजनीति को अधिक स्वीकार कर रहे हैं।
ये परिणाम एक ऐतिहासिक मोड़ हैं, जहां राष्ट्रवाद, पारदर्शी शासन और ‘विकसित भारत’ का विजन पूरे भारत में और भी अधिक मजबूती के साथ गूंज रहा है। जैसे-जैसे ये जनादेश— खास तौर पर पश्चिम बंगाल में मिला असीम आशीर्वाद, असम और पुडुचेरी में लगातार बढ़ता समर्थन और केरल में अथक संघर्ष से मिली पहचान— भारतीय संविधान और लोकतंत्र में विश्वास को मजबूत कर रहे हैं, वैसे ही यह पूरे देश में हर भाजपा कार्यकर्ता के लिए यह एक बेहद भावुक पल भी है। जब करोड़ों लोग अपने बढ़ते समर्थन के साथ भाजपा को अपना आशीर्वाद दे रहे हैं, तो ‘मां भारती’ अपने सिंहासन पर विराजमान होकर आनंदित हैं और स्वामी विवेकानंद के शब्द वातावरण में गूंज रहे हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की थी, ‘धरती पर ऐसी कोई शक्ति नहीं है जो भारत को रोक सके। भारत उठेगा! सोया हुआ विराट जाग रहा है।’
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