सशक्त, आत्मनिर्भर और ‘विकसित भारत’ की ओर बढ़ते कदम

| Published on:

      पश्चिम बंगाल में एक अभूतपूर्व परिवर्तन के साथ श्री शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और राज्य में आशा, विश्वास तथा आकांक्षाओं के एक नए युग की शुरुआत हुई। भाजपा सरकार बनने के साथ ही जनता ने शासन, राजनीतिक संस्कृति और प्रशासन में परिवर्तन महसूस करना शुरू कर दिया है। ‘सोनार बांग्ला’ के रूप में पहचानी जाने वाली यह भूमि लंबे समय से स्वार्थी और भ्रष्ट राजनीति तथा भ्रामक नीतियों एवं विचारों का शिकार रही है, लेकिन अब यह भूमि पुन: तीव्र गति के साथ दशकों के कुशासन की भरपाई करने के लिए तैयार है। श्री हिमंत बिश्व शर्मा ने दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है और एनडीए ने राज्य में लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है। असम की जनता ने एक बार फिर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व तथा ‘अष्टलक्ष्मी’ (पूर्वोत्तर) के प्रति उनके अटूट समर्पण में अपना विश्वास व्यक्त किया है। इसी प्रकार, पुडुचेरी में भी जनता ने एक बार फिर एनडीए को अपना आशीर्वाद दिया है और श्री एन. रंगासामी को मुख्यमंत्री के रूप में चुना है। यह जीत मतदाताओं की स्थिरता, सुशासन और केंद्र सरकार के साथ प्रभावी समन्वय के प्रति उनकी प्राथमिकता को दर्शाती है। जनता ने हिंसा, भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण, नीतिगत जड़ता और प्रशासनिक विफलताओं की राजनीति के बजाय परफॉरमेंस, विकास और राष्ट्रीय प्रगति की राजनीति को चुना है। इसी कारण ‘विकसित भारत’ का वह दृष्टिकोण, जिसे जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है, अब राष्ट्र की प्रगति के लिए एक प्रेरक शक्ति बन गया है।

जनता ने हिंसा, भ्रष्टाचार, तुष्टीकरण, नीतिगत जड़ता और प्रशासनिक विफलताओं की राजनीति के बजाय परफॉरमेंस, विकास और राष्ट्रीय प्रगति की राजनीति को चुना है। इसी कारण ‘विकसित भारत’ का वह दृष्टिकोण, जिसे जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त है, अब राष्ट्र की प्रगति के लिए एक प्रेरक शक्ति बन गया है

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की हालिया पांच देशों–संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की यात्रा ने एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की बढ़ती साख को प्रदर्शित किया है। साथ ही, इस यात्रा ने मोदी सरकार के उस दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया है, जिसके तहत भारत को उभरती हुई भू-राजनीतिक और आर्थिक साझेदारियों के केंद्र में स्थापित किया जा रहा है। संयुक्त अरब अमीरात में व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, फिनटेक और बुनियादी ढांचे में निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और सुदृढ़ बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया। यह निरंतर मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी भारत की सक्रिय कूटनीति की सफलता को दर्शाती है तथा भारत की विकास यात्रा में वैश्विक निवेशकों के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करती है।

नीदरलैंड की यात्रा ने सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, लॉजिस्टिक्स और जल प्रबंधन के क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाया। ये ऐसे प्रमुख क्षेत्र हैं जो सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों के अनुरूप हैं। जैसे-जैसे भारत एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, इस तरह की साझेदारियां सुदृढ़ आपूर्ति शृंखला और तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

नॉर्डिक देशों के साथ सहयोग में नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं पर बातचीत हुई। स्वीडन में रक्षा विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र पर चर्चा हुई; जबकि नॉर्वे में नवीकरणीय ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत किया गया। स्वीडन और नॉर्वे दोनों देशों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को उनके सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया, जो भारत के बढ़ते प्रभाव और उसके नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय मान्यता को दर्शाते हैं।

इटली में बातचीत विनिर्माण, रक्षा, औद्योगिक प्रौद्योगिकी और स्वच्छ गतिशीलता पर केंद्रित रही। प्रधानमंत्री श्री मोदी को एफएओ द्वारा ‘एग्रीकोला पदक’ से भी सम्मानित किया गया, जो खाद्य सुरक्षा, कृषि नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों की एक स्वीकारोक्ति है। वैश्विक स्तर पर मोटे अनाजों (मिलेटस्) को बढ़ावा देने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सहायता कार्यक्रम के संचालन तक भारत समावेशी विकास के एक आदर्श के रूप में उभरा है।

द्विपक्षीय समझौतों और कूटनीतिक वार्ताओं से इतर इन यात्राओं ने एक व्यापक वास्तविकता को भी हमारे समक्ष पेश किया है, जिसके तहत प्रधानमंत्री श्री मोदी के दूरदर्शी और सुदृढ़ नेतृत्व में भारत अब केवल वैश्विक परिवर्तनों के अनुरूप ढल ही नहीं रहा है, बल्कि उन्हें सक्रिय रूप से आकार भी दे रहा है। इन यात्राओं ने एक विश्वसनीय भागीदार, एक प्रमुख आर्थिक शक्ति और वैश्विक मंच पर एक आत्मविश्वासपूर्ण आवाज के रूप में भारत की छवि को और सुदृढ़ किया है तथा साथ ही इससे, एक सशक्त, आत्मनिर्भर और ‘विकसित भारत’ का मार्ग प्रशस्त हुआ।