आधुनिक कृषि और महिला सशक्तीकरण का स्वर्णिम संगम, नमो ड्रोन दीदी

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    आज का भारत तकनीक और परंपरा के अद्भुत समन्वय का गवाह बन रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में शुरू की गई ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना ग्रामीण भारत की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर को बदलने वाला एक गेम-चेंजर कदम साबित हुई है। यह योजना न केवल कृषि के आधुनिकीकरण पर जोर देती है, बल्कि सदियों से घर की चारदीवारी और खेतों में मजदूरी तक सीमित रही महिलाओं को ‘ड्रोन पायलट’ बनाकर उन्हें सम्मान और आत्मनिर्भरता के नए शिखर पर ले जा रही है। भाजपा सरकार का यह नवाचार ग्रामीण अर्थव्यवस्था में ‘नारी शक्ति’ को केंद्र बिंदु में रखने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

कृषि प्रधान देश होने के नाते भारत के लिए खेती की लागत कम करना और उत्पादकता बढ़ाना हमेशा से बड़ी चुनौती रही है। ड्रोन तकनीक ने इस समस्या का एक प्रभावी समाधान पेश किया है। पहले किसान पीठ पर भारी पंप लादकर कीटनाशकों का छिड़काव करते थे, जिसमें समय अधिक लगता था और स्वास्थ्य का जोखिम भी रहता था। अब ड्रोन के माध्यम से मात्र 15-20 मिनट में एक एकड़ खेत में नैनो-यूरिया या कीटनाशकों का छिड़काव संभव हो गया है। इससे न केवल संसाधनों की बचत हो रही है, बल्कि ‘प्रिसिजन फार्मिंग’ (सटीक खेती) को बढ़ावा मिल रहा है। इस तकनीक ने खेती को स्मार्ट और वैज्ञानिक बना दिया है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और फसल की गुणवत्ता दोनों सुरक्षित हैं।

इस योजना का सबसे प्रभावशाली पहलू इसका महिला केंद्रित होना है। केंद्र सरकार ने 15,000 महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ड्रोन उपलब्ध कराने और उन्हें प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। सरकार की ओर से ड्रोन की खरीद पर 80 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी (अधिकतम 8 लाख रुपये) दी जा रही है। यह निवेश केवल मशीनों पर नहीं, बल्कि ग्रामीण नेतृत्व पर है। जब एक ग्रामीण महिला हाथ में रिमोट थामकर आसमान में ड्रोन उड़ाती है, तो वह केवल खाद का छिड़काव नहीं करती, बल्कि रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने परिवार और गांव के लिए आय का नया स्रोत पैदा करती है। प्रशिक्षित ड्रोन दीदियां आज ₹15,000 से लेकर ₹1 लाख तक की मासिक आय अर्जित कर रही हैं, जो ‘लखपति दीदी’ बनाने के मोदी सरकार के संकल्प को धरातल पर उतार रहा है।

प्रधानमंत्री मोदीजी का मानना है कि 21वीं सदी का भारत ‘टेक्नोलॉजी’ और ‘ट्रस्ट’ के भरोसे आगे बढ़ेगा। ड्रोन दीदी योजना इसी दर्शन का जीवंत उदाहरण है। यह पहल गांवों में रोजगार के लिए होने वाले पलायन को रोकने में भी सहायक सिद्ध हो रही है, क्योंकि अब गांव में ही उच्च-तकनीकी आधारित आजीविका उपलब्ध है। फर्टिलाइजर कंपनियों और कृषि विज्ञान केंद्रों के सहयोग से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि इन महिलाओं को केवल उपकरण न मिले, बल्कि निरंतर तकनीकी सहायता और बाजार भी उपलब्ध हो।

जब एक ग्रामीण महिला हाथ में रिमोट थामकर आसमान में ड्रोन उड़ाती है, तो वह केवल खाद का छिड़काव नहीं करती, बल्कि रूढ़ियों को तोड़ते हुए अपने परिवार और गांव के लिए आय का नया स्रोत पैदा करती है। प्रशिक्षित ड्रोन दीदियां आज ₹15,000 से लेकर ₹1 लाख तक की मासिक आय अर्जित कर रही हैं, जो ‘लखपति दीदी’ बनाने के मोदी सरकार के संकल्प को धरातल पर उतार रहा है

निष्कर्षतः, ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना विकसित भारत @2047 के संकल्प की नींव है। यह कृषि में क्रांतिकारी सुधार और महिला सशक्तीकरण का एक ऐसा सफल मॉडल है, जो दुनिया के अन्य विकासशील देशों के लिए मिसाल बन सकता है। जब गांव की बेटियां और बहुएं तकनीक का नेतृत्व करती हैं, तो पूरा समाज प्रगति करता है। भाजपा सरकार की इस पहल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य का भारत डिजिटल भी होगा और समावेशी भी, जहां आसमान की ऊंचाइयां अब हमारी ग्रामीण महिलाओं की पहुंच से दूर नहीं हैं।

(लेखक भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं)