ये नतीजे भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों, संवैधानिक मूल्यों, परफॉरमेंस की राजनीति एवं स्थिरता में जन-विश्वास को और अधिक मजबूत करेंगे: प्रधानमंत्री

विधानसभा चुनाव
परिणाम-2026
हाल ही में संपन्न हुए चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। पश्चिम बंगाल और असम में शानदार जीत के साथ-साथ पुडुचेरी और केरल में भी प्रभावशाली बढ़त हासिल करते हुए भाजपा एक मजबूत पार्टी के रूप में उभरी।
4 मई, 2026 को पश्चिम बंगाल और असम के विधानसभा चुनावों में भाजपा की अभूतपूर्व सफलता का श्रेय मतदाताओं की सोच में आए एक निर्णायक बदलाव को जाता है; जो बंगाल में लगभग आठ प्रतिशत और असम में पांच प्रतिशत की असाधारण वृद्धि से स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। इस निर्णायक बदलाव ने भाजपा को दोनों राज्यों में पूर्ण बहुमत प्राप्त करने में सक्षम बनाया, जिससे पार्टी के लिए पूर्वी क्षेत्र में अपने दम पर सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ। जहां एक ओर पश्चिम बंगाल इतिहास में पहली बार भाजपा सरकार के उदय का साक्षी बनने जा रहा है, वहीं दूसरी ओर असम ने ऐतिहासिक ‘हैट्रिक’ जीत दिलाकर एनडीए में अपना विश्वास पुनः व्यक्त किया है।
इन चुनावी परिणामों ने न केवल भाजपा की राष्ट्रीय उपस्थिति को सुदृढ़ किया है, बल्कि उन क्षेत्रों के राजनीतिक परिदृश्य में आए एक गहरे बदलाव को भी दर्शाया है, जिन्हें कभी पार्टी के लिए चुनावी रूप से एक दुर्गम और कठिन क्षेत्र माना जाता था। कोलकाता की सड़कों से लेकर असम के विशाल चाय-बागानों तक और पुडुचेरी, केरल तथा तमिलनाडु के तटीय चुनावी रणक्षेत्रों तक— माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा का चुनावी अभियान एक करिश्माई नेतृत्व, अथक जमीनी प्रयास, अनुशासित संगठन और विकास, राष्ट्रवाद, सुशासन तथा जन-कल्याणकारी राजनीति पर आधारित था और यही भाजपा की शानदार जीत का मूल मंत्र भी रहा।
श्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता, निर्णायक नेतृत्व और अद्वितीय जन-आकर्षण ने इन चुनावों को एक जन-आंदोलन में रूपांतरित कर दिया। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं ने अत्यधिक राजनीतिक दबाव और कड़े चुनावी संघर्ष के बावजूद असाधारण जुझारूपन, समर्पण और अडिग मनोबल का प्रदर्शन किया। असम में एनडीए द्वारा स्थिरता और विकास पर दिए गए विशेष बल ने जनता के विश्वास और शासन की निरंतरता को और अधिक सुदृढ़ किया। वहीं, पुडुचेरी में गठबंधन के घटकों के बीच समन्वय बिठाने की रणनीति ने एनडीए के राजनीतिक प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया। इस बीच, केरल में भाजपा ने अपनी सांगठनिक शक्ति और चुनावी पहुंच का विस्तार किया और वह राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक लगातार मजबूत होती शक्ति के रूप में उभरी।
विधानसभा चुनाव
परिणाम-2026
पश्चिम बंगाल में
खिला कमल
भाजपा को मिला ऐतिहासिक जनादेश
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार बहुमत प्राप्त कर राज्य की राजनीति में एक युगांतकारी परिवर्तन किया। विकास, सुशासन और परिवर्तन के वादों पर भरोसा जताते हुए जनता ने भाजपा को विजयश्री दिलाई और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के कुशासन को समाप्त कर दिया। भाजपा की यह ऐतिहासिक जीत न केवल पश्चिम





भी पड़ा और एक चौंकाने वाला उलटफेर देखने को मिला। भाजपा, जिसने 2021 में 77 सीटें जीती थीं, उसने 294-सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटें जीतकर इतिहास रच दिया और बहुमत के आंकड़े को आसानी से पार कर लिया। इसके विपरीत, टीएमसी को एक करारा झटका लगा और उसकी सीटों की संख्या 215 से गिरकर महज 80 रह गई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने दो सीटें हासिल कीं, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) केवल एक सीट जीतने में सफल रही।
कुल मतदान पर नजर डालें तो भाजपा को 29,218,815 वोट मिले, जबकि टीएमसी को 26,002,017 वोट मिले। कांग्रेस को 1,884,900 वोट मिले। यह आंकड़े न केवल एक आसाधारण चुनावी जीत के साक्षी है, बल्कि बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में एक निर्णायक बदलाव को भी दिखाते हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव की सबसे खास बातों में से एक थी भाजपा की नक्सलबाड़ी सीट (अब मातिगारा-नक्सलबाड़ी) पर शानदार जीत; यह सीट कभी नक्सली गतिविधियों का केंद्र और भारत में वामपंथी उग्रवाद की जन्मस्थली हुआ करती थी। भाजपा ने इस सीट पर राज्य में सबसे बड़ी जीत हासिल की है, यानी लगभग 1.4 लाख वोटों के अंतर से यह जीत आयी है। इस नतीजे का गहरा राजनीतिक महत्व था, जिसने बंगाल के उस नाटकीय बदलाव को दिखाया, जिसमें दशकों के वामपंथी वर्चस्व और 34 साल के कम्युनिस्ट शासन के बाद भाजपा को 207 सीटों का ऐतिहासिक जनादेश मिला।
इन चुनावों में हुए मतदान के विश्लेषण से कुछ चौंकाने वाले रुझान सामने आए। भाजपा ने उन सीटों पर प्रभाव बनाया जहां वोटर टर्नआउट 85 से 95 प्रतिशत के बीच रहा; इस श्रेणी में भाजपा ने 172 सीटें जीतीं, जबकि टीएमसी को केवल 45 सीटें मिलीं। जिन सीटों पर वोटर टर्नआउट 95 प्रतिशत से अधिक रहा, वहां भाजपा ने 28 सीटें हासिल कीं। पश्चिम बंगाल में औसत वोटर टर्नआउट 93 प्रतिशत रहा— जो आज़ादी के बाद से अब तक का सबसे अधिक है— और यह चुनाव को लेकर लोगों की ज़बरदस्त भागीदारी और भावनात्मक जुड़ाव को दिखाता है।
भाजपा ने कई सीटों पर शानदार बढ़त भी हासिल की; जंगीपुर और जादवपुर जैसी सीटों पर उसके वोट शेयर में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, टीएमसी को रेजीनगर, नौदा और जंगीपुर जैसी सीटों पर भारी नुकसान उठाना पड़ा, जहां उसका वोट शेयर 30 प्रतिशत से अधिक गिर गया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर पूरे राज्य में भाजपा के चुनाव प्रचार को गति प्रदान की। विशाल रैलियों, रोड शो, बंगाल की सांस्कृतिक पहचान बचाने की अपील, त्वरित विकास के वादे और हजारों कार्यकर्ताओं की लगातार और समर्पित मेहनत ने भाजपा को एक मजबूत राजनीतिक शक्ति में बदल दिया। राजनीतिक बदलाव का नारा युवाओं, महिलाओं, शहरी वोटरों, मध्यम-वर्गीय परिवारों और पहली बार वोट देने वालों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हुआ।
पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत केवल इसलिए ऐतिहासिक नहीं थी कि उसे चुनाव में कितनी बड़ी सफलता मिली, बल्कि इसलिए भी थी कि इसने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को हमेशा के लिए बदल दिया। बंगाल में ‘कमल’ का खिलना राज्य में एक नए राजनीतिक दौर की शुरुआत का संकेत है। इस जनादेश ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है और बंगाल की राजनीति की भविष्य की दिशा तय कर दी है।
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