एक ‘नया भारत’ आकार ले रहा है – जहां प्रगति को केवल जीडीपी से नहीं, बल्कि सम्मान एवं अवसरों से मापा जाता है। कडप्पा की एक गृहिणी अन्नम लक्ष्मी भवानी ने एक सफल जूट बैग निर्माण इकाई शुरू करने के लिए मुद्रा ऋण लिया। हरियाणा के जगदेव सिंह अपनी फसलों से संबंधित निर्णय अब एआई ऐप का उपयोग करके लेते हैं और मीरा मांझी को उज्ज्वला के तहत एलपीजी कनेक्शन मिला है, जिससे उनकी रसोई धुआं रहित हुई है और वे अपने बच्चों के साथ अधिक गुणवत्तापूर्ण समय बिता पाती हैं। ये भारत भर के गांवों, कस्बों और शहरों की रोजमर्रा की वास्तविकताएं हैं। ये परिवर्तन ऐसे सुधारों और एक ऐसे नेतृत्व के परिणामस्वरूप आये हैं जो अंतिम नागरिक को सशक्त बनाने में विश्वास करता है।
पिछले 11 वर्षों में पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सार्वजनिक निवेश में यह उछाल भारत के बुनियादी ढांचे— भौतिक, डिजिटल और सामाजिक में सबसे अधिक दिखाई देता है। पिछले 11 वर्षों में लगभग 59,000 किलोमीटर राजमार्ग बनाए गए हैं और 37,500 किलोमीटर से अधिक रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं
हमारा मार्गदर्शक दर्शन अंत्योदय रहा है – जो अंतिम व्यक्ति के उत्थान की बात करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में निर्देशित यह विजन चार सरल लेकिन शक्तिशाली स्तंभों पर आधारित है— जैसे ऐसे बुनियादी ढांचे का निर्माण जो जोड़ता हो, ऐसा विकास जो समावेशी हो, ऐसा विनिर्माण जो रोजगार पैदा करे और ऐसी व्यवस्थाओं जो सशक्त बनाए।
पिछले 11 वर्षों में पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2025-26 में 11.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सार्वजनिक निवेश में यह उछाल भारत के बुनियादी ढांचे – भौतिक, डिजिटल और सामाजिक में सबसे अधिक दिखाई देता है। पिछले 11 वर्षों में लगभग 59,000 किलोमीटर राजमार्ग बनाए गए हैं और 37,500 किलोमीटर से अधिक रेलवे ट्रैक बिछाए गए हैं। हाल ही में चेनाब और अंजी पुलों का उद्घाटन किया गया – जो एक आधुनिक भारत का प्रतीक है। कश्मीर में वंदे भारत ट्रेन का आना यहां के निवासियों के लिए किसी सपने के साकार होने से कम नहीं हैं।
कनेक्टिविटी की यह भावना रेलवे से आगे बढ़कर अब डिजिटल हाईवे तक पहुंच गई है। भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (डीपीआई) वैश्विक बेंचमार्क बन गया है। यूपीआई, आधार और डिजिलॉकर का अब वैश्विक स्तर पर अध्ययन किया जाता है। हर दिन 141 करोड़ से ज़्यादा आधार सत्यापन और 60 करोड़ यूपीआई लेन-देन इसकी पहुंच को दर्शाते हैं। इसके पीछे का विचार सरल है: तकनीक का लोकतंत्रीकरण।
यही दृष्टिकोण इंडियाएआई मिशन को आगे बढ़ाता है। 34,000 से ज़्यादा हाई-स्पीड कंप्यूटर चिप्स, जिन्हें जीपीयूएस के नाम से जाना जाता है, अब सभी के लिए वैश्विक लागत के सिर्फ़ एक-तिहाई पर उपलब्ध हैं। एआई विकास के लिए इन चिप्स की जरूरत होती है। इसे और ज़्यादा प्रभावशाली बनाने के लिए, ऐकोशा प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया गया है जो सीखने एवं नवाचार के लिए 370 से ज़्यादा डेटासेट और 200 एआई मॉडल की पेशकश करता है।
हमारा फोकस तकनीक के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और बुनियादी सेवाओं पर भी है। पिछले 11 वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 387 से बढ़कर 780 हो गई है और एम्स संस्थानों की संख्या सात से बढ़कर 23 हो गई है। एमबीबीएस और पीजी सीटें भी दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। 530 मिलियन से अधिक जन-धन खाते खोले गए हैं— जो यूरोप की आबादी से भी ज्यादा है। 40 मिलियन घर बनाए गए हैं, 120 मिलियन शौचालयों का निर्माण किया गया है और 100 मिलियन परिवार अब स्वच्छ एलपीजी से खाना बनाते हैं। ‘हर घर जल’ के तहत 140 मिलियन घरों में नल के कनेक्शन भी पहुंच गए हैं।
आयुष्मान भारत के तहत स्वास्थ्य बीमा 350 मिलियन लोगों को कवर करता है और 110 मिलियन किसान अब पीएम-किसान के माध्यम से प्रत्यक्ष सहायता प्राप्त करते हैं। यह यात्रा मीरा मांझी जैसे लोगों की कहानियों के माध्यम से जीवंत हो जाती है, जो उज्ज्वला योजना की 10 करोड़वीं लाभार्थी है, अब उनके घर में नल का पानी, हर महीने मुफ़्त राशन और उज्ज्वला योजना के तहत धुआं रहित रसोई है। यह समावेशी विकास का ऐसा आयाम है जो हमारे हाल के इतिहास में नहीं देखा गया।
2015 में हमने रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को पुनर्जीवित करने के लिए मेक इन इंडिया की शुरुआत की। आज, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण छह गुना बढ़कर 12 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात आठ गुना बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है और सबसे अधिक निर्यात किए जाने वाले सामानों में से एक बन गया है। भारत अब दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन उत्पादक है। हम अब नई इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का उत्पादन करके विनिर्माण मूल्य शृंखला को और मजबूत कर रहे हैं।
इसके साथ, भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब ब्लूप्रिंट से सफलता की ओर बढ़ रहा है। देश की पहली वाणिज्यिक प्रयोगशाला निर्माणाधीन है; पांच ओएसएटी इकाइयां चल रही हैं; भारत के छात्रों और इंजीनियरों ने स्वदेशी आईपी से चलने वाले 20 से अधिक चिपसेट डिजाइन किए हैं। हमने 270 विश्वविद्यालयों को विश्व स्तरीय ईडीए उपकरणों से जोड़ा है। यह सेमीकंडक्टर प्रतिभा पाइपलाइन की नींव है जिस पर दुनिया भरोसा कर सकती है।
पिछले दशक में शासन में कुछ क्रांतिकारी बदलाव हुए है। 1,500 से ज़्यादा पुराने कानून निरस्त किए गए और 40,000 से ज़्यादा अनुपालन समाप्त किए गए। दूरसंचार अधिनियम और डीपीडीपी अधिनियम जैसे नए कानून बनाए गए है, जो विश्वास और सरलता पर आधारित हैं। इसने निवेश, नवाचार और औपचारिकता को बढ़ावा दिया है, जिससे एक बेहतर माहौल का निर्माण हुआ है।
आतंकवाद के प्रति भारत का दृष्टिकोण भी बदला है। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर एयर स्ट्राइक और अब ऑपरेशन सिंदूर तक, भारत ने आतंक के खिलाफ अपनी लड़ाई में स्पष्टता और साहस दिखाया है। हर
पिछले दशक में शासन में कुछ क्रांतिकारी बदलाव हुए है। 1,500 से ज़्यादा पुराने कानून निरस्त किए गए और 40,000 से ज़्यादा अनुपालन समाप्त किए गए। दूरसंचार अधिनियम और डीपीडीपी अधिनियम जैसे नए कानून बनाए गए है, जो विश्वास और सरलता पर आधारित हैं। इसने निवेश, नवाचार और औपचारिकता को बढ़ावा दिया है, जिससे एक बेहतर माहौल का निर्माण हुआ है
जवाब में एक तेज, निर्णायक कार्रवाई दिखाई देती है – और वह भी हमारी अपनी शर्तों पर। आतंकी हमलों का जवाब देने का यह नया तरीका मोदी सिद्धांत का हिस्सा है। यह तीन स्तंभों पर आधारित है। भारत की शर्तों पर निर्णायक जवाबी कार्रवाई, परमाणु ब्लैकमेल के लिए शून्य सहिष्णुता, और आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों के बीच कोई भेद नहीं। इस बार हमारी प्रतिक्रिया में स्वदेशी तकनीकों और क्षमताओं का उपयोग किया गया। विकसित बनने की आकांक्षा रखने वाले राष्ट्र को न केवल अपने लोगों की रक्षा करनी चाहिए, बल्कि आत्मनिर्भरता के साथ ऐसा करना चाहिए— और भारत ने ठीक यही किया।
2004 में अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल के अंत में भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। 2004 से 2014 के बीच भारत 11वें स्थान पर ही रहा। लेकिन पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री श्री मोदी की सुधारवादी नीतियों के कारण भारत के विकास ने फिर से गति पकड़ी है। आज हम दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में समावेशी विकास के इन 11 वर्षों ने लोगों को सब्सिडी या सेवाओं से कहीं ज़्यादा दिया है। उनमें एक विश्वास पैदा किया है और बेहतर भविष्य में दृढ़ विश्वास ही राष्ट्र को आगे बढ़ाता है।
(लेखक केंद्रीय रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री हैं)

