भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस झूठे वादों और कुशासन का पर्याय बन गई है। हर राज्य एवं राष्ट्रीय चुनाव से पहले पार्टी लोगों के सामने अपने वादे और योजनाएं पेश करती है, ताकि चुनावों के बाद सरकार बनने पर जनता को धोखा दे सके। जब वह ऋण माफी का वादा करते हैं, तो वह धन की कमी की शिकायत करते हुए उसे पूरा नहीं करते। उनके द्वारा शुरू किए गए हर मुफ़्त कार्यक्रम की स्थिरता अनिश्चित है, जैसाकि वर्तमान में जिन राज्यों में उनका शासन हैं, वहां यह स्पष्ट है। कांग्रेस के शासन में नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को आरंभ करना तो दूर की कोड़ी है, क्योंकि वहां पहले से चल रही परियोजनाओं को भी अनिश्चित काल के लिए ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप लोगों को असुविधा होती है। कांग्रेस के बारे में अगर कोई एक स्थिर बात है तो वह यह कि वह अपने वादों को पूरा करने में विफल होने पर बहाने बनाने में अव्वल रहती हैं। उसके पास सबसे आसान उपाय केंद्र को दोषी ठहराना है, जैसाकि आज कर्नाटक एवं हिमाचल प्रदेश की सरकारें कर रही हैं। अपने राज्य के राजकोषीय स्वास्थ्य के साथ वादों को पूरा करने में असमर्थ कांग्रेस, अपने झूठे वादों के लिए पिछली सरकारों के काम को जिम्मेदार ठहराती है, जैसाकि तेलंगाना में देखा गया है।
जिन राज्यों में वह सत्ता में थे, वहां मानक फॉर्मूला यह था कि चुनाव से पहले बड़े-बड़े वादे किए जाएं, लेकिन बाद में उन्हें भूला दिया जाए। राजस्थान में कांग्रेस के स्वास्थ्य कार्यक्रम को जनता के बीच बहुत धूमधाम से ले जाया गया, लेकिन जब इसका क्रियान्वयन किया गया तो लोगों को केवल निराशा ही हाथ लगी। झूठे वादे कांग्रेस के नेतृत्व के लिए भी एक सीख हैं, जो बताती है कि पार्टी जवाबदेही एवं विश्वसनीयता की कसौटी पर खरा नहीं उतर रही है। 2024 के चुनावों के बाद कांग्रेस के कई मतदाता पार्टी कार्यालयों के सामने कतार में खड़े हो गए, उनके पास कांग्रेस (नकली) के गारंटी कार्ड थे, जिसमें उन्हें 1,00,000 रुपये देने का वादा किया गया था। कांग्रेस के साथ ऐसे झूठे वादों का एक लंबा इतिहास है। 1970 के दशक में गरीबी हटाओ से लेकर 2024 में बेरोजगारी भत्ते के वादे तक और 1985 में शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने से लेकर 2006 में अल्पसंख्यकों को भारत के संसाधनों पर पहला अधिकार देने का वादा करने तक, कांग्रेस ने भारतीय मतदाताओं को हल्के में लेने और उन्हें धोखा देने की कला में महारत हासिल कर ली है।
हिमाचल प्रदेश: न्याय नहीं, अन्याय है!







