हमारे जवानों ने आतंक के अड्डों को तबाह किया, यह उनका अदम्य साहस था
और उसमें शामिल थी-भारत में बने हथियारों, उपकरणों और तकनीक की ताकत
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 25 मई को मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 122वीं कड़ी की शुरुआत करते हुए कहा कि आज पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है, आक्रोश से भरा हुआ है, संकल्पबद्ध है। आज हर भारतीय का यही संकल्प है, हमें आतंकवाद को खत्म करना ही है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हमारी सेनाओं ने जो पराक्रम दिखाया है, उसने हर हिंदुस्तानी का सिर ऊंचा कर दिया है। जिस Precision के साथ, जिस सटीकता के साथ हमारी सेनाओं ने सीमा पार के आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त किया, वो अद्भुत है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने दुनिया-भर में आतंक के खिलाफ़ लड़ाई को नया विश्वास और उत्साह दिया है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हमारी सेनाओं ने जो पराक्रम दिखाया है, उसने हर हिंदुस्तानी का सिर ऊंचा कर दिया है। जिस Precision के साथ, जिस सटीकता के साथ हमारी सेनाओं ने सीमा पार के आतंकवादी ठिकानों को ध्वस्त किया, वो अद्भुत है
उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ सिर्फ एक सैन्य मिशन नहीं है, ये हमारे संकल्प, साहस और बदलते भारत की तस्वीर है और इस तस्वीर ने पूरे देश को देश-भक्ति के भावों से भर दिया है, तिरंगे में रंग दिया है। आपने देखा होगा देश के कई शहरों में, गांवों में, छोटे-छोटे कस्बों में, तिरंगा यात्राएं निकाली गईं। हजारों लोग हाथों में तिरंगा लेकर देश की सेना, उसके प्रति वंदन-अभिनंदन करने निकल पड़े। कितने ही शहरों में सिविल डिफेंस वालंटियर बनने के लिए बड़ी संख्या में युवा एकजुट हो गए और हमने देखा चंडीगढ़ के वीडियोज तो काफी वायरल हुए थे। सोशल मीडिया पर कविताएं लिखी जा रही थीं, संकल्प गीत गाये जा रहे थे। छोटे-छोटे बच्चे पेंटिंग्स बना रहे थे जिनमें बड़े सन्देश छुपे थे।
श्री मोदी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने देश के लोगों को इतना प्रभावित किया है कि कई परिवारों ने इसे अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। बिहार के कटिहार में, यूपी के कुशीनगर में और भी कई शहरों में उस दौरान जन्म लेने वाले बच्चों का नाम ‘सिंदूर’ रखा गया है।
उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने आतंक के अड्डों को तबाह किया, यह उनका अदम्य साहस था और उसमें शामिल थी—भारत में बने हथियारों, उपकरणों और तकनीक की ताकत। उसमें ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प भी था। हमारे इंजीनियर्स हमारे तकनीशियन हर किसी का पसीना इस विजय में शामिल है।
‘योग दिवस’ को लेकर दुनिया-भर में जोश और उत्साह
श्री मोदी ने कहा कि ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ में अब एक महीने से भी कम समय बचा है। यह अवसर याद दिलाता है कि अगर आप अब भी योग से दूर हैं तो अब योग से जुड़ें। योग आपका जीवन जीने का तरीका बदल देगा। 21 जून, 2015 में ‘योग दिवस’ की शुरुआत के बाद से ही इसका आकर्षण लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि इस बार भी ‘योग दिवस’ को लेकर दुनिया-भर में लोगों का जोश और उत्साह नजर आ रहा है। अलग-अलग संस्थान अपनी तैयारियां साझा कर रहे हैं। बीते वर्षों की तस्वीरों ने बहुत प्रेरित किया है। हमने देखा है अलग-अलग देशों में किसी साल लोगों ने योग चेन बनाई, योग रिंग बनाई। ऐसी बहुत ही तस्वीरें हैं जहां एक साथ चार पीढ़ी मिलकर योग कर रही हैं। बहुत से लोगों ने अपने शहर के प्रतिष्ठित स्थानों को योग के लिए चुना। आप भी इस बार कुछ रुचिकर तरीके से योग दिवस मनाने के बारे में सोच सकते हैं।
योग में बढ़ती कॉरपोरेट भागीदारी की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे कॉरपोरेट भी इसमें पीछे नहीं हैं। कुछ संस्थानों ने अपने कार्यालयों में योग अभ्यास के लिए अलग से स्थान निर्धारित किया है। कुछ स्टार्ट-अप ने कार्यालय में योग का समय तय किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे भी लोग हैं जो गांवों में जाकर योग सिखाने की तैयारी कर रहे हैं। हेल्थ और फिटनेस को लेकर लोगों की ये जागरूकता मुझे बहुत आनंद देती है।
श्री मोदी ने कहा कि ‘योग दिवस’ के साथ-साथ आयुर्वेद के क्षेत्र में भी कुछ ऐसा हुआ है, जिसके बारे में जानकर आपको बहुत खुशी होगी। उन्होंने कहा कि कल ही यानी 24 मई को डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक और मेरे मित्र तुलसी भाई की उपस्थिति में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के साथ ही इंटरनेशनल क्लासिफिकेशन ऑफ हेल्थ इंटरवेंशन के तहत एक समर्पित पारंपरिक चिकित्सा मॉड्यूल पर काम शुरू हो गया है। इस पहल से आयुष को वैज्ञानिक तरीके से दुनिया भर में अधिकतम लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

