‘द् साबरमती रिपोर्ट’ की विशेष स्क्रीनिंग

| Published on:

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा 19 नवंबर 2024 को दिल्ली के दरियागंज स्थित एक मल्टीप्लेक्स में पत्रकारों के साथ ‘द‌् साबरमती रिपोर्ट’ फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग में शामिल हुए। इस अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि यह एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण सच्चाई है, जिसमें मासूम बच्चे, महिलाएं समेत 59 लोगों को जिंदा जला दिया गया था और इस सच्चाई को सबके सामने आने में लगभग 22 साल लग गए। गोधरा की पूरी सच्चाई सबके सामने रखने के लिए यह एक ईमानदार प्रयास है, इसके लिए मैं ‘द‌् साबरमती रिपोर्ट’ की पूरी टीम की सराहना करता हूं एवं उन्हें विशेष बधाई देता हूं।

इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री बैजयंत जय पांडा, राष्ट्रीय महामंत्री श्री अरुण सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख श्री अनिल बलूनी सहित पार्टी के अन्य कई पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

श्री नड्डा ने कहा कि ‘द‌् साबरमती रिपोर्ट’ सच्चाई के आधार पर बनी फिल्म है, गोधरा में जो घटना घटी

‘यूपीए ने गोधरा कांड की सच्चाई छिपाने की कोशिश की’

उस पर आधारित है, लेकिन इसकी सच्चाई सबके सामने आने में 22 साल लग गए। यह बहुत भी दुर्भाग्यपूर्ण था कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वाले कांग्रेस सहित यूपीए ने गोधरा कांड के सच को छुपाने की कोशिश की थी, उस समय सोनिया गांधी यूपीए की चेयरपर्सन थी। तथाकथित लेफ्ट लिबरल की भी कोशिश थी कि सच्चाई सामने नहीं आए। तथाकथित लेफ्ट लिबरल की एक “इको सिस्टम” इस पर मिट्टी डालने की पूरी कोशिश की। श्री नड्डा देश की जनता से निवेदन किया कि ‘द‌् साबरमती रिपोर्ट’ को जरूर देखें कि किस प्रकार से गोधरा कांड हुआ था और किस तरह से कारसेवकों को जिंदा जलाया गया था।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि सब लोग भलीभांति जानते हैं कि गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस में आग लगी नहीं थी, बल्कि आग लगाई गयी थी, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकारों और तथाकथित लिबरल जमात ने इस सच्चाई पर मिट्टी डालने का भंयकर पाप किया था, जो मानवता के खिलाफ सबसे बड़े गुनाहों में से एक है। ‘द् साबरमती रिपोर्ट’ देखने पर एक बार फिर गोधरा में घटित हृदय विदारक घटना ने दिलोदिमाग को झकझोर दिया। गोधरा में 27 फरवरी, 2002 को अयोध्या से आ रहे कारसेवकों से भरी ट्रेन साबरमती एक्सप्रेस को आग के हवाले करके 59 लोगों को जिंदा जला दिए गए थे, जिसमें अधिकांश मासूम बच्चे और महिलाएं थी।