श्री राम जन्मभूमि मंदिर ध्वजारोहण उत्सव, अयोध्या धाम
भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक व आध्यात्मिकता के एक ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 25 नवंबर, 2025 को उत्तर प्रदेश के पावन अयोध्या धाम में पवित्र श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। ध्वजारोहण उत्सव मंदिर निर्माण के पूर्ण होने और सांस्कृतिक उत्सव एवं राष्ट्रीय एकता के एक नए अध्याय की शुरुआत का प्रतीक है। इस उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ समेत अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
यह उत्सव मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की शुभ पंचमी को श्री राम और माता सीता के विवाह पंचमी के अभिजीत मुहूर्त के साथ दिव्य मिलन के प्रतीक दिवस के रूप में मनाया गया। यह तिथि नौवें सिख गुरु— गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस का भी प्रतीक है, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में अयोध्या धाम में 48 घंटे तक निरंतर ध्यान किया था, जिससे इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
दस फुट ऊंचे और बीस फुट लंबे समकोण त्रिभुजाकार ध्वज पर भगवान श्री राम के तेज और पराक्रम का प्रतीक एक दीप्तिमान सूर्य की छवि अंकित है, जिस पर ‘ॐ’ अंकित है और कोविदार वृक्ष की छवि भी अंकित है। यह पवित्र भगवा ध्वज राम राज्य के आदर्शों को साकार करते हुए गरिमा, एकता और सांस्कृतिक निरन्तरता का संदेश देगा।
ध्वज पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर स्थापत्य शैली में निर्मित शिखर के ऊपर फहराया गया, जबकि मंदिर के चारों ओर निर्मित 800 मीटर का परकोटा, जो दक्षिण भारतीय स्थापत्य परंपरा में डिजाइन किया गया है, मंदिर की स्थापत्य विविधता को प्रदर्शित करता है।
मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर की बाहरी दीवारों पर वाल्मीकि रामायण पर आधारित भगवान श्री राम के जीवन से जुड़े 87 जटिल रूप से तराशे गए पत्थर के प्रसंग और परिसर की दीवारों पर भारतीय संस्कृति से जुड़े 79 कांस्य-ढाल वाले प्रसंग अंकित हैं। ये सभी तत्व मिलकर सभी आगंतुकों को एक सार्थक और शिक्षाप्रद अनुभव प्रदान करते हैं, जिससे उन्हें भगवान श्री राम के जीवन और भारत की सांस्कृतिक विरासत की गहरी समझ मिलती है।
उल्लेखनीय है कि अयोध्या धाम में भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह 22 जनवरी, 2024 को संपन्न हुआ था और ध्वजारोहण उत्सव के साथ ही अयोध्या धाम में श्री राम मंदिर परिसर का संपूर्ण निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है, जिसमें मुख्य मंदिर और छह अन्य मंदिर शामिल हैं।
श्री राम जन्मभूमि मंदिर ध्वजारोहण उत्सव पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि आज अयोध्या नगरी भारत की सांस्कृतिक चेतना के एक और उत्कर्ष-बिंदु की साक्षी बन रही है। श्री मोदी ने कहा, “आज पूरा भारत और पूरा विश्व भगवान श्री राम की भावना से ओतप्रोत है।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रत्येक राम भक्त के हृदय में अद्वितीय संतोष, असीम कृतज्ञता और अपार दिव्य आनंद है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि सदियों पुराने घाव भर रहे हैं, सदियों का दर्द समाप्त हो रहा है और सदियों का संकल्प आज सिद्ध हो रहा है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि यह उस यज्ञ की परिणति है जिसकी अग्नि 500 वर्षों तक प्रज्वलित रही, एक ऐसा यज्ञ जिसकी आस्था कभी डगमगाई नहीं, आस्था क्षण भर के लिए भी खंडित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि आज भगवान श्री राम के गर्भगृह की अनंत ऊर्जा और श्री राम परिवार की दिव्य महिमा इस धर्म ध्वजा के रूप में इस दिव्यतम एवं भव्य मंदिर में प्रतिष्ठित हुई है।
श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “यह धर्म ध्वजा केवल एक ध्वज नहीं है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता के पुनर्जागरण का ध्वज है।” उन्होंने बताया कि इसका केसरिया रंग, इस पर अंकित सूर्यवंश की महिमा, अंकित पवित्र ॐ और उत्कीर्ण कोविदार वृक्ष, रामराज्य की महानता के प्रतीक हैं। श्री मोदी ने कहा कि यह ध्वज संकल्प है, यह ध्वज सिद्धि है, यह ध्वज संघर्ष से सृजन की गाथा है, यह ध्वज सदियों से संजोए गए स्वप्नों का साकार रूप है और यह ध्वज संतों की तपस्या और समाज की सहभागिता की सार्थक परिणति है।
विजय केवल सत्य की होती है, असत्य की नहीं
यह घोषणा करते हुए कि आने वाली सदियों और सहस्राब्दियों तक यह धर्म ध्वज भगवान राम के आदर्शों और सिद्धांतों का उद्घोष करेगा, श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि यह आह्वान करेगा कि विजय केवल सत्य की होती है, असत्य की नहीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह उद्घोषणा करेगा कि सत्य स्वयं ब्रह्म का रूप है और सत्य में ही धर्म की स्थापना होती है। श्री मोदी ने कहा कि यह धर्म ध्वज जो कहा गया है, उसे अवश्य पूरा करने के संकल्प को प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि यह संदेश देगा कि संसार में कर्म और कर्तव्य को ही प्रधानता देनी चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि यह भेदभाव और पीड़ा से मुक्ति और समाज में शांति और सुख की उपस्थिति की कामना व्यक्त करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धर्म ध्वज हमें इस संकल्प के लिए प्रतिबद्ध करेगा कि हमें एक ऐसे समाज का निर्माण करना है, जहां कोई गरीबी न हो और कोई भी दु:खी या असहाय न हो।
श्री मोदी ने अपने धर्मग्रंथों का स्मरण करते हुए कहा कि जो लोग किसी भी कारण से मंदिर में नहीं आ पाते, लेकिन उसकी ध्वजा के आगे झुकते हैं, उन्हें भी समान पुण्य प्राप्त होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह धर्म ध्वजा मंदिर के उद्देश्य का प्रतीक है और दूर से ही यह रामलला की जन्मभूमि के दर्शन कराती रहेगी और युगों-युगों तक भगवान श्री राम के आदेशों और प्रेरणाओं को मानवता तक पहुंचाती रहेगी। श्री मोदी ने इस अविस्मरणीय और अनूठे अवसर पर दुनिया भर के करोड़ों राम भक्तों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सभी भक्तों को नमन किया और राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले प्रत्येक दानदाता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। श्री मोदी ने मंदिर निर्माण से जुड़े प्रत्येक कार्यकर्ता, प्रत्येक कारीगर, प्रत्येक योजनाकार और प्रत्येक वास्तुकार को नमन किया।
अयोध्या वह भूमि, जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा, “अयोध्या वह भूमि है जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं।” उन्होंने कहा कि यही वह नगरी है जहां से श्री राम ने अपनी जीवन यात्रा शुरू की थी। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्री राम दरबार मंदिर में पूजा की
पवित्र अयोध्या धाम में ध्वजारोहण कार्यक्रम से पूर्व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परमपूज्य डॉ. मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्री राम मंदिर परिसर में राम दरबार एवं दूसरे मंदिरों में जाकर पूजा-अर्चना की। पुजारियों ने सभी को श्री राम के नाम का गमछा ओढ़ाया और प्रसाद दिया और श्री नरेन्द्र मोदी और डॉ. मोहन भागवत ने रामलला का आशीर्वाद लिया।

राम मंदिर बन गया है: मोहन भागवत
श्री राम मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक परमपूज्य श्री मोहन भागवत ने कहा, “ध्वजा एक प्रतीक है। इस ध्वज को इतना ऊंचा बनाने में बहुत समय लगा और हम सब जानते हैं कि इसमें कितना समय लगा। अगर हम 500 साल निकाल भी दें, तो भी इस मंदिर को बनाने में 30 साल लगे।”
उन्होंने कहा, “आज हम सबके लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। कितने ही लोगों ने सपने देखे, कोशिश की और अपने प्राण अर्पित किए। आज उनकी आत्माओं को शांति मिली होगी। आज अशोक जी, महंत रामचंद्र दास जी महाराज और डालमिया जी की आत्माओं को शांति मिली होगी। आज मंदिर की पवित्र प्रक्रिया पूरी हुई है।” उन्होंने आगे कहा, “यह धर्म का ध्वज है, भगवा ध्वज जो बलिदान का प्रतीक है।”
श्री भागवत ने कहा, “एक रथ को सात घोड़े खींचते हैं और उन्हें नियंत्रित करने के लिए लगाम का प्रयोग होता है। बिना रस्सी या सारथी के ऐसा रथ नहीं चल सकता, लेकिन सूर्य भगवान हर दिन पूरब से पश्चिम की ओर चलते हैं, क्योंकि प्रत्येक काम की सिद्धि अच्छाई से होती है। हिंदू समाज ने साढ़े पांच सदियों से अपनी अच्छाई साबित की है। राम मंदिर बन गया है, और रामलला अब आ गए हैं, हमें एक ऐसा भारत वर्ष बनाना है जो सभी के लिए खुशी लाए।”श्री भागवत ने कहा, “राम राज्य का ध्वज, जो कभी अयोध्या में फहराता था और दुनिया में शांति और समृद्धि का प्रतीक था, अब अपने ‘शिखर’ पर है। हमने यह होते हुए देखा है।”
धर्म, ज्ञान, छाया तथा सुफल संपूर्ण दुनिया में प्रदान करने वाला भारतवर्ष बनाने का काम शुरू हो गया है। हमें सभी विपरीत परिस्थितियों में भी काम करना चाहिए। हमें ऐसा भारत बनाना चाहिए, जो सभी को खुशियां दे। यही दुनिया की उम्मीद है। रामलला के नाम पर इस काम को तेज करना हमारा कर्तव्य है। भव्य मंदिर ठीक वैसा ही बना है जैसा उन्होंने सपना देखा था और उससे भी ज्यादा भव्य।”
500 साल का अथक संघर्ष आखिरकार पूर्ण हुआ: जगत प्रकाश नड्डा
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘एक्स’ पर एक संदेश में कहा, “कोटिशः सनातनियों की आस्था का केन्द्र, सनातन संस्कृति की सप्तपुरियों में से एक प्राचीन एवं पावन अयोध्याधाम में प्रभु श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक पूज्य डॉ. मोहन भागवत जी ने संतजनों की गरिमामयी उपस्थिति में धर्म ध्वजारोहण किया। ये पावन अवसर करोड़ों रामभक्तों को न सिर्फ भाव विभोर करने वाला है, बल्कि भारतभूमि के अध्यात्मिक अभ्युदय का प्रतीक भी है। कई शताब्दियों की अनवरत प्रतीक्षा एवं असंख्य बलिदान और 500 वर्षों के अनथक संघर्ष की पूर्णता आज इस भव्य एवं दिव्य भगवा ध्वज के रूप में श्रीरामलला मंदिर के पवित्र शिखर पर लहरा रही है। प्रभु श्री रामलला से कामना करता हूं कि अपनी कृपा से समस्त चराचर जगत को कृतार्थ करें और हमारा देश ‘विकसित एवं आत्मनिर्भर’ भारत के रूप में वैश्विक पटल पर स्थापित हो। सियावर रामचन्द्र जी की जय!”
डाला कि अयोध्या ने दुनिया को दिखाया कि कैसे एक व्यक्ति, समाज और उसके मूल्यों की शक्ति से पुरुषोत्तम बनता है। उन्होंने स्मरण किया कि जब श्री राम वनवास के लिए अयोध्या से निकले थे, तो वे युवराज राम थे, लेकिन जब वे लौटे तो वे ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ बनकर लौटे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि श्री राम के मर्यादा पुरुषोत्तम बनने में महर्षि वशिष्ठ का ज्ञान, महर्षि विश्वामित्र की दीक्षा, महर्षि अगस्त्य का मार्गदर्शन, निषादराज की मित्रता, माता शबरी का स्नेह और भक्त हनुमान की भक्ति सभी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए समाज की सामूहिक शक्ति को अनिवार्य बताते हुए श्री मोदी ने प्रसन्नता व्यक्त की कि राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की भी चेतना स्थली बन रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि यहां सात मंदिर निर्मित हैं, जिनमें माता शबरी का मंदिर भी शामिल है, जो आदिवासी समुदाय की प्रेम और आतिथ्य परंपराओं का प्रतीक है।
“हमारे राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं”, श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि श्री राम के लिए व्यक्ति की भक्ति वंश से अधिक महत्वपूर्ण है, संस्कार वंश से अधिक प्रिय हैं और सहयोग महज शक्ति से भी बड़ा है। उन्होंने कहा कि आज हम भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश
ध्वज संघर्ष से सृजन की यात्रा का सौभाग्य प्रतीक है: राजनाथ सिंह
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर एक संदेश में कहा, “मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में बने दिव्य और भव्य मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने आज पूरे विधि विधान के साथ धर्मध्वजा की स्थापना की है। यह भारत के सांस्कृतिक इतिहास का एक गौरवपूर्ण क्षण है। यह ध्वज संघर्ष से सृजन की यात्रा का सौभाग्य प्रतीक है। भगवान श्री राम का आशीर्वाद इस भारत की पावन धरा पर सदैव बना रहे, यही आज के पवित्र दिन पर मंगलकामना है।”
डाला कि पिछले 11 वर्षों में महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों, वंचितों, किसानों, श्रमिकों और युवाओं – समाज के हर वर्ग को विकास के केंद्र में रखा गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब राष्ट्र का प्रत्येक व्यक्ति, प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक क्षेत्र सशक्त होगा, तो सभी का प्रयास संकल्प की पूर्ति में योगदान देगा और इन्हीं सामूहिक प्रयासों से 2047 तक एक ‘विकसित भारत’ का निर्माण होगा।
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के ऐतिहासिक अवसर पर विचार करते हुए प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के संकल्प को भगवान राम से जोड़ने की बात कही और याद दिलाया कि आने वाले हजार वर्षों के लिए भारत की नींव मजबूत होनी चाहिए।
राम सत्य और वीरता के संगम हैं
श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि हम एक जीवंत समाज हैं, हमें दूरदृष्टि के साथ काम करना होगा, हमें आने वाले दशकों, आने वाली सदियों को ध्यान में रखना ही होगा। इसके लिए हमें भगवान राम से सीखना होगा; उनके व्यक्तित्व को समझना होगा; उनके आचरण को अपनाना होगा और यह याद
यह सनातन धर्म के लिए अत्यंत गर्व का क्षण है: अमित शाह
सियावर रामचंद्र की जय! संपूर्ण मानवता के लिए धर्म और कर्म का आदर्श स्थापित करने वाले भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर बने भव्य और दिव्य मंदिर के शिखर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी के करकमलों से, संत समाज की पवित्र उपस्थिति में विधिवत धर्मध्वज स्थापित हुआ। माता सीता और प्रभु श्रीराम के विवाह के पवित्र दिन पर यह ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ है। यह सनातन संस्कृति और रामभक्तों के लिए बहुत ही गौरव का दिन है।
यह धर्मध्वज प्रभु श्रीराम के जीवन और आदर्शों को जानने तथा उनके पदचिन्हों पर चलने के लिए प्रेरित करेगा।
रखना होगा कि राम आदर्शों, अनुशासन और जीवन के सर्वोच्च चरित्र के प्रतीक हैं। राम सत्य और वीरता के संगम हैं, धर्म के मार्ग पर चलने के साक्षात स्वरूप हैं, लोक-सुख को सर्वोपरि रखने वाले हैं, धैर्य और क्षमा के सागर हैं, ज्ञान और बुद्धि के शिखर हैं, सौम्यता में दृढ़ता, कृतज्ञता का सर्वोच्च उदाहरण हैं, उत्तम संगति के वरणकर्ता हैं, महाबल में विनम्रता हैं, सत्य का अटूट संकल्प हैं और सजग, अनुशासित एवं निष्कपट मन हैं। उन्होंने कहा कि राम के ये गुण हमें एक सशक्त, दूरदर्शी और स्थायी भारत के निर्माण में मार्गदर्शन प्रदान करें।
श्री मोदी ने कहा, “राम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, राम एक मूल्य हैं, एक मर्यादा हैं, एक दिशा हैं।” उन्होंने कहा कि यदि भारत को 2047 तक विकसित बनाना हैं, अगर समाज को सामर्थ्यवान बनाना है, तो हमे अपने भीतर ‘राम’ को जगाना होगा। हमारे हृदय में प्रतिष्ठित करना होगा। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि ऐसा संकल्प लेने के लिए आज से बेहतर कोई दिन नहीं हो सकता।
अपनी विरासत पर गर्व के साथ-साथ गुलामी की मानसिकता से पूर्ण मुक्ति को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 190 साल पहले 1835 में मैकाले नामक एक अंग्रेज संसदविद ने भारत को उसकी जड़ों से उखाड़ फेंकने का बीज बोया और मानसिक गुलामी की नींव रखी। उन्होंने कहा कि 2035 में उस घटना को दो सौ साल पूरे हो जाएंगे और आग्रह किया कि आने वाले दस साल भारत को इस मानसिकता से मुक्त करने के लिए समर्पित होने चाहिए।
भारत लोकतंत्र की जननी है और लोकतंत्र हमारे डीएनए में है
श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि गुलामी की मानसिकता इस धारणा को पुष्ट करती रही कि भारत ने लोकतंत्र विदेश से उधार लिया है और यहां तक कि इसका संविधान भी विदेश से प्रेरित है, जबकि सच्चाई यह है कि भारत लोकतंत्र की जननी है और लोकतंत्र हमारे डीएनए में है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी की मानसिकता हमारी व्यवस्था के हर कोने में समा गई है। उन्होंने याद दिलाया कि सदियों से भारतीय नौसेना के ध्वज पर ऐसे प्रतीक अंकित थे जिनका भारत की सभ्यता, शक्ति या विरासत से कोई संबंध नहीं था। श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि अब नौसेना के ध्वज से गुलामी के हर प्रतीक को हटा दिया गया है और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल स्वरूप में परिवर्तन नहीं, बल्कि मानसिकता में परिवर्तन का क्षण है, एक ऐसी घोषणा कि भारत अब अपनी शक्ति को दूसरों की विरासत से नहीं, बल्कि अपने प्रतीकों से परिभाषित करेगा। श्री मोदी ने यह भी कहा कि यही परिवर्तन आज अयोध्या में भी दिखाई दे रहा है।
भगवान श्री राम का भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की
आस्था, सम्मान एवं स्वाभिमान का प्रतीक है: योगी आदित्यनाथ
अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ध्वजारोहण उत्सव को एक नए युग की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा, “भगवान श्री राम का भव्य मंदिर 140 करोड़ भारतीयों की आस्था, सम्मान एवं स्वाभिमान का प्रतीक है। आज का यह शुभ दिन उन पूज्य संतों, योद्धाओं और श्री राम के भक्तों के कभी न खत्म होने वाले संघर्ष को समर्पित है, जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के लिए अपना जीवन और पीढ़ियों को समर्पित कर दिया।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सदियों लंबे संघर्ष के बाद ‘बलिदान का तीर्थ’ पूरा हुआ है। उन्होंने उन कर्मयोगियों, संतों, भक्तों और अनगिनत लोगों का दिल से आभार और श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने इसके लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि विवाह पंचमी का दिव्य संयोग इस त्योहार को और भी पवित्र बना रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा कि ध्वजारोहण इस बात का प्रतीक है कि धर्म की रोशनी अमर है और राम राज्य के मूल्य हमेशा रहने वाले हैं। उन्होंने कहा, “श्री राम मंदिर पर फहराया गया भगवा ध्वज भी धर्म, मर्यादा, सच्चाई, न्याय और राष्ट्रधर्म का प्रतीक है। यह ‘विकसित भारत’ का प्रतीक है। हम एक नया भारत देख रहे हैं, जहां विकास और विरासत का एकदम सही समन्वय है। यह इसे नई ऊंचाई दे रहा है।” उन्होंने बताया कि कैसे प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में अयोध्या को देश के पहले सोलर सिटी और एक सस्टेनेबल स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें आस्था को आधुनिकता और आर्थिक विकास के साथ जोड़ा जा रहा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संबोधन की मुख्य बातें
• आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है
• अयोध्या वह भूमि है जहां आदर्श आचरण में बदलते हैं
• राम मंदिर का दिव्य प्रांगण भारत के सामूहिक सामर्थ्य की भी चेतना स्थली बन रहा है
• हमारे राम भेद से नहीं, बल्कि भाव से जुड़ते हैं
• हम एक जीवंत समाज हैं, हमें दूरदृष्टि के साथ काम करना होगा, हमें आने वाले दशकों, आने वाली सदियों को ध्यान में रखना ही होगा
• राम यानी आदर्श, राम यानी मर्यादा, राम यानी जीवन का सर्वोच्च चरित्र
• राम सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, राम एक मूल्य हैं, एक मर्यादा हैं, एक दिशा हैं
• अगर भारत को वर्ष 2047 तक विकसित बनाना है, अगर समाज को सामर्थ्यवान बनाना है, तो हमें अपने भीतर ‘राम’ को जगाना होगा
• देश को आगे बढ़ना है तो अपनी विरासत पर गर्व करना होगा
• हमें आने वाले दस वर्षों का लक्ष्य लेकर चलना है कि हम भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहेंगे
• भारत लोकतंत्र की जननी है, लोकतंत्र हमारे डीएनए में है
• ‘विकसित भारत’ की यात्रा को गति देने के लिए ऐसा रथ चाहिए जिसके पहिये वीरता और धैर्य हों, जिसका ध्वज सत्य और परम आचरण हो, जिसके घोड़े शक्ति, विवेक, संयम और परोपकार हों और जिसकी लगाम क्षमा, करुणा और समता हो



श्री मोदी ने इस बात पर जोर देते हुए कि अगर हम अगले दस वर्षों में खुद को गुलामी की मानसिकता से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प लें, तो आत्मविश्वास की ऐसी ज्योति प्रज्वलित होगी कि 2047 तक विकसित भारत के स्वप्न को साकार होने से कोई भी ताकत नहीं रोक पाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले हजार वर्षों के लिए भारत की नींव तभी मज़बूत होगी, जब अगले एक दशक में मैकाले की मानसिक गुलामी की परियोजना पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी।
श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि अयोध्या में रामलला मंदिर परिसर और भी भव्य होता जा रहा है और अयोध्या के सौंदर्यीकरण का कार्य तेज़ी से जारी है। उन्होंने घोषणा की कि अयोध्या एक बार फिर दुनिया के लिए एक मिसाल बनने वाला शहर बन रहा है। श्री मोदी ने कहा कि त्रेता युग में अयोध्या ने मानवता को उसकी आचार संहिता दी थी और 21वीं सदी में अयोध्या मानवता को विकास का एक नया मॉडल दे रही है। उन्होंने आगे कहा कि तब अयोध्या अनुशासन का केंद्र थी और अब अयोध्या एक ‘विकसित भारत’ की रीढ़ बनकर उभर रही है।







