ढोला-सदिया : पूर्वोत्तर के लिए नई आशा का पुल

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 26 मई को असम में देश के सबसे लम्बे नदी पुल ढोला-सदिया का उद्घाटन किया। श्री मोदी ने इस पुल को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार का सपना बताया। उन्होंने कहा कि अगर 2004 में अटल सरकार दोबारा से चुनकर आती, तो यह पुल 10 साल पहले ही बन जाता। श्री मोदी ने कहा कि बीच में सरकार बदल गई, काम ऐसे ही चलता रहा और लोगों का सपना डगमगाता रहा।

साथ ही श्री मोदी ने इस पुल का नाम असम के मशहूर लोकगायक भूपेन हजारिका के नाम पर रखने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भूपेन हजारिका पूरी जिंदगी ब्रह्मपुत्र नदी का गुणगान करते रहे, इसलिए आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान के बारे में याद दिलाते रहने के लिए केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया है। दरअसल, भूपेन हजारिका सिर्फ बेहतरीन गायक ही नहीं, बल्कि संगीतकार, गीतकार, कवि और फिल्मकार भी थे। उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें दादा साहब फाल्के से लेकर पद्म विभूषण जैसे पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कहा कि विकास को स्थाई रूप देने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरी है, इसलिए उनकी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। श्री मोदी ने कहा कि इससे अरुणाचल प्रदेश और आसाम जुड़ जाएंगे, 165 किमी की दूरी कम हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सदिया के किसानों द्वारा पैदा किए जाने वाला अदरक बेहद उच्च क्वॉलिटी का होता है। पुल बनने के बाद इन किसानों के लिए रास्ता खुल जाएगा और उनकी कमाई में इजाफा होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह पुल सिर्फ पैसे और समय नहीं बचाएगा, बल्कि इलाके में नई अर्थ क्रांति लेकर भी आएगा।

उन्होंने कहा कि पहले लोग फेरी सर्विस से आवाजाही करते थे, अगर मौसम ठीक न रहा तो सर्विस बंद हो जाती है। इसके अलावा, ब्रह्मपुत्र रुठ जाए तो भी सर्विस रुक जाती थी। अब प्राकृतिक प्रकोप से लोगों की गति में कोई कमी नहीं आएगी।

गौरतलब है कि 9.15 किलोमीटर लम्बे तीन लेन के इस पुल का निर्माण ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी लोहित पर किया गया है। यह पुल असम के ढोला को अरूणाचल के सादिया से जोड़ेगा। इस पुल के अस्तित्व में आने से इस क्षेत्र में संपर्क का एक लम्बा अंतर खत्म हो जायेगा। अभी तक ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए केवल दिन के समय नौका का ही उपयोग किया जाता था और बाढ़ के दौरान यह भी संभव नहीं होता था। ब्रह्मपुत्र नदी पर बना अंतिम पुल तेजपुर स्थित कालिया-भोमोरा पुल था। कल इस पुल का उद्घाटन होने के बाद ऊपरी असम और अरूणाचल प्रदेश के पूर्वी भाग के लिए 24X7 संपर्क सुनिश्ति हो जायेगा।

इस पुल के बनने से असम के राष्ट्रीय राजमार्ग–37 में रूपाई और अरूणाचल प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग-52 में मेका/रोईंग के बीच 165 किलोमीटर की दूरी कम हो जायेगी। इन दो स्थानों के बीच यात्रा करने में वर्तमान में 6 घंटे का समय लगता है, जो अब घटकर 1 घंटा हो जायेगा और इस तरह 5 घंटे के समय की बचत होगी। इसके परिणामस्वरूप प्रतिदिन पेट्रोल और डीजल में 10 लाख रूपये तक की बचत होगी।

ढोला-सदिया पुल से पूर्वोत्तर में विकास के नये रास्ते खुलेंगे। इस पुल के निर्माण से सुदूर और पिछड़े क्षेत्रों को सड़क मार्ग से जोड़ने का मौका मिलेगा। यह पुल ऊपरी आसाम के ब्रह्मपुत्र और अरूणाचल प्रदेश के संपूर्ण आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान देगा। इसके अलावा यह अरूणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में देश की सामरिक आवश्यकताओं को पूरा करेगा तथा राज्य में चल रही कई पणबिजली परियोजनाओं को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा, क्योंकि संपर्क नहीं हो पाने के कारण कई बिजली परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में दिक्कतें आ रही थीं।

ढोला-सदिया पुल परियोजना की कुल लम्बाई दोनों तरफ की सड़कों को मिलाकर कुल 28.50 किलोमीटर है और पुल की लम्बाई 9.15 किलोमीटर है। इस पुल का निर्माण बीओटी एन्यूटी द्वारा किया गया, जिसकी कुल लागत 2,056 करोड़ रूपये है। इस पुल का उद्देश्य असम और अरूणाचल प्रदेश के लोगों को एक दूसरे के करीब लाना है।