‘डीएमके नेता राज्य को विकास के बजाय विनाश की ओर ले गए’

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विशाल जनसभा, रामनाथपुरम (तमिलनाडु)

  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने 12 अप्रैल, 2026 को तमिलनाडु के रामनाथपुरम में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित किया। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्षजी ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा गरीब कल्याण, बुनियादी ढांचे और जनहित की योजनाओं में किए गए कार्यों को रेखांकित करते हुए तमिलनाडु में डबल इंजन की सरकार बनाने की अपील की। कार्यक्रम के दौरान मंच पर तमिलनाडु भाजपा प्रभारी श्री सुधाकर रेड्डी सहित अन्य पदाधिकारी व नेतागण उपस्थित रहे।

श्री नवीन ने कहा कि रामनाथपुरम के डीएमके विधायक भ्रष्टाचार में लिप्त हैं, नशे के कारोबार को बढ़ावा दे रहे हैं और विकास के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया है। रामनाथपुरम की जनता को इस चुनाव में इन भ्रष्टाचारियों को सबक सिखाना है और एनडीए के प्रत्याशी को विजयी बनाकर इन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकना है। पूरे देश में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी गरीबों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध करा रहे हैं और अब तक करीब 3 करोड़ से अधिक घर बनाए जा चुके हैं, जिनमें तमिलनाडु में भी 13 लाख से अधिक आवास शामिल हैं। लेकिन यह तमिलनाडु का दुर्भाग्य है कि राज्य के मुख्यमंत्री और डीएमके के नेता गरीबों के आवास की चिंता नहीं करते, बल्कि अपने लिए महल बनाने में लगे हैं।

श्री नवीन ने कहा कि डीएमके के मुख्यमंत्री और विधायक से यह पूछा जाना चाहिए कि पिछले पांच वर्षों में राज्य सरकार ने 10 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया, उस कर्ज से क्या कार्य हुए? गरीबों के लिए आवास नहीं बने, सड़कें नहीं बनीं, गरीबों के लिए चिकित्सा की सुविधा नहीं मिली और कोई सामुदायिक भवन भी नहीं बनाया गया। 10 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लेने के बावजूद वो पैसा डीएमके के भ्रष्टाचार में चला गया और गरीब के खाते में एक रुपया भी नहीं पहुंचा। एक आंकड़े के अनुसार राज्य में 8900 हत्याएं हुईं, जिनमें 32 हत्याएं जेल में कस्टडी में मौजूद लोगों की हुईं। इन घटनाओं के लिए मुख्यमंत्री स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन जिम्मेदार हैं, जो तमिलनाडु को विकास के बजाय विनाश की ओर ले गए।

श्री नवीन ने कहा कि मछुआरा समुदाय के कई लोग ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान फंस गए थे, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने 700 से अधिक मछुआरे भाइयों को सुरक्षित वापस लाने का काम किया, जिनमें 50 से अधिक लोग रामनाथपुरम के थे।