28,000 आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित बस्तियों को वर्ष 2021 तक सुरक्षित पेय जल उपलब्ध कराया जाएगा
ग्रॉमीण विकास मंत्रालय ने पिछले तीन वर्षों (2014-17) के दौरान मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण (पीएमए-जी) और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) जैसी योजनाओं में 813 करोड़ व्यक्ति दिवसों से अधिक रोजगार के अवसर जुटाए हैं। मीडिया को संबोधित करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास, पेयजल और स्वच्छता एवं पंचायती राज मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान एमजीएनईआरईजीए के तहत 636.78 करोड़ व्यक्ति दिवस, विभिन्न योजनाओं के तहत 78 करोड़ व्यक्ति दिवस और पीएमएई के तहत 99 करोड़ व्यक्ति दिवस रोजगार जुटाए गए। इसके अलावा दीनदयाल उपाध्याय-ग्रामीण कौशल योजना (डीडीवाई-जीकेवाई) के अंतर्गत वर्ष 2014-15 में 86,120 उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया और 54,196 को रोजगार मिले। इसी तरह 2015-16 में लगभग 1,35000 उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण दिया गया, जबकि 2016-17 में 84,900 उम्मीदवारों को रोजगार मिले।
श्री तोमर ने कहा कि चालू वर्ष में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 5 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित करने तथा ऐसे 70 प्रतिशत युवाओं को वेतन और स्वसहायता रोजगार कार्यक्रमों में नियुक्ति देने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि 2016-17 में स्व-रोजगार के लिए ग्रामीण स्वयंरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) ने 4 लाख ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित किया है।
श्री तोमर ने कहा कि मनरेगा के तहत वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान 1.23 करोड़ संपत्तियों को भू-टैग किया गया है और सार्वजनिक क्षेत्र में डाल दिया गया है। लगभग 96% वेतन भुगतान इलेक्ट्रॉनिक रूप से डीबीटी प्रणाली के माध्यम से श्रमिकों के खातों में जमा किया गया है। अभी तक 8.73 करोड़ कामगारों की आधार संख्याओं को एनआरईजीएसओफ्ट (एमआईएस) में सीडिड किया गया है और 4.73 करोड़ कामगारों को उनकी रजामंदी से आधार आधारित भुगतान किया गया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान जॉब कार्ड का सत्यापन/उन्नयन किया गया है और 1 करोड़ से अधिक जॉब कार्ड सत्यापन के बाद रद्द किए गए है।
पीएमए-जी के बारे में श्री तोमर ने कहा कि सरकार 2022 तक “सभी के लिए आवास” के लिए अपने उद्देश्य के अनुरूप सरकार 2019 तक ग्रामीण क्षेत्रों में 1 करोड़ गरीब लोगों को मकान उपलब्ध कराने का इरादा रखती है। 2014-15 से 2015-16 के दौरान पूर्ववर्ती इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) के तहत 45.98 लाख घरों के लक्ष्य के मुकाबले 34.82 लाख घरों का निर्माण किया गया है। 2016-17 के दौरान 32.14 लाख मकानों का निर्माण पूरा किया गया है और इस पर 16,07 करोड़ रूपये खर्च हुए।
पीएमजीएसवाई के बारे में उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण की गति बढ़कर 130 किलोमीटर के रिकार्ड स्तर तक पहुंच गई है, जो पिछले 7 वर्षों में सर्वाधिक औसत वार्षिक निर्माण दर है। 2016-17 के दौरान पीएमजीएसवाई के तहत 47,447 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ, जिससे 11,641 बस्तियों से संपर्क स्थापित हुआ। 2016-17 के दौरान एलडब्ल्यूई प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क परियोजना के तहत 9 एलडब्ल्यूई प्रभावित राज्यों के सबसे बुरी तरह प्रभावित 44 जिलों के साथ साथ और आसपास के जिलों में सभी मौसम के लिए सड़कों का निर्माण पर 11,725 करोड़ रुपये अनुमानित लागत के साथ शुरू किया गया है यह काम मार्च 2020 तक पूरा हो जाएगा।
श्री तोमर ने कहा कि पीने का पानी उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सरकार 2030 तक प्रत्येक घर में सतत आधार पर नल का पानी उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ‘हर घर जल’ का सपना नागरिकों की भागीदारी के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता। देश में करीब 28,000 प्रभावित बस्तियों को मार्च 2021 तक सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए आर्सेनिक और फ्लोराइड पर राष्ट्रीय जल गुणवत्ता उप मिशन के शुभारंभ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस पर 25,000 करोड़ रुपये के परिव्यय निर्धारित किया गया है और पेयजल और स्वच्छता की चुनौतियों का समाधान करने के लिए धन देने में किसी भी राज्य के साथ पक्षपात नहीं किया जाएगा।
श्री तोमर ने कहा कि 14 वें वित्त आयोग के तहत केंद्र सरकार ग्राम गांवों में वस्तुगत और सामाजिक बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शुरू करने के लिए पंचायतों को 5 वर्षों के दौरान 2 लाख करोड़ रूपए अधिक जारी करेगी। इससे पहले 13वें वित्तीय आयोग ने पंचायतों को 30,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। अभी तक राज्यों को 51,234 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके है और 44 लाख पंचायत कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।

