सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2023-24 के दौरान 1.41 लाख करोड़ रुपए का अब तक का सर्वाधिक कुल शुद्ध लाभ दर्ज किया; मार्च-24 में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल अग्रिम 175 लाख करोड़ रुपये रहा
वर्ष 2015 से सरकार ने एनपीए को पारदर्शी तरीके से पहचानने, समाधान और वसूली, पीएसबी का पुनर्पूंजीकरण और पीएसबी के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए वित्तीय प्रणाली में सुधार की व्यापक 4आर रणनीति को लागू किया है और सरकार के व्यापक नीतिगत सुधारों के परिणामस्वरूप पीएसबी सहित बैंकिंग क्षेत्र की वित्तीय सेहत और मजबूती में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा 12 दिसंबर को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए अनुपात मार्च, 2015 के 4.97 प्रतिशत से घटकर सितम्बर, 2024 में 3.12 प्रतिशत हो गया तथा मार्च, 2018 के 14.58 प्रतिशत के उच्चतम स्तर से घटकर सितम्बर, 2024 में 3.12 प्रतिशत हो गया।
पूंजी पर्याप्तता में सुधार
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का सीआरएआर 393 आधार अंकों से सुधरकर मार्च, 2015 के 11.45 प्रतिशत से बढ़कर सितम्बर, 2024 में 15.43 प्रतिशत पर पहुंच गया।
वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2022-23 में 1.05 लाख करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ के मुकाबले 1.41 लाख करोड़ रुपए का अब तक का सर्वाधिक कुल शुद्ध लाभ दर्ज किया है और वित्त वर्ष 2024-25 की पहली छमाही में 0.86 लाख करोड़ रुपए दर्ज किया है।
पिछले तीन वर्षों के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने कुल 61,964 करोड़ रुपये का लाभांश दिया है।
वित्तीय समावेशन को और मजबूत बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देश के कोने-कोने तक अपनी पहुंच का विस्तार कर रहे हैं। उनका पूंजी आधार मजबूत हुआ है और उनकी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है। अब वे सरकार पर निर्भर रहने के बजाय बाजार में जाकर पूंजी प्राप्त करने में सक्षम हैं ।
देश में वित्तीय समावेशन को और मजबूत करने के लिए 54 करोड़ जनधन खाते खोले गए हैं और विभिन्न प्रमुख वित्तीय समावेशन योजनाओं (पीएम मुद्रा, स्टैंड-अप इंडिया, पीएम-स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा) के तहत 52 करोड़ से अधिक जमानत-मुक्त ऋण स्वीकृत किए गए हैं। मुद्रा योजना के तहत 68 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं और पीएम-स्वनिधि योजना के तहत 44 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं।
बैंक शाखाओं की संख्या मार्च, 2014 में 1,17,990 से बढ़कर सितम्बर, 2024 में 1,60,501 हो गई; 1,60,501 शाखाओं में से 1,00,686 शाखाएं ग्रामीण और अर्ध-शहरी (आरयूएसयू) क्षेत्रों में हैं।
केसीसी योजना का उद्देश्य किसानों को अल्पावधि फसल ऋण उपलब्ध कराना है। सितंबर, 2024 तक कुल चालू केसीसी खातों की संख्या 7.71 करोड़ थी, जिनका कुल बकाया 9.88 लाख करोड़ रुपये था।
भारत सरकार (जीओआई) ने विभिन्न पहलों के माध्यम से किफायती दरों पर ऋण प्रवाह के मामले में एमएसएमई क्षेत्र को लगातार समर्थन दिया है। पिछले 3 वर्षों के दौरान एमएसएमई अग्रिमों ने 15 प्रतिशत की सीएजीआर दर्ज की। 31.03.2024 तक कुल एमएसएमई अग्रिम 28.04 लाख करोड़ रुपये था, जो 17.2 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्शाता है।
अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल अग्रिम 2004-2014 के दौरान 8.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 61 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो मार्च, 2024 में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर 175 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

