वैश्विक ‘ग्रोथ इंजन’ बनकर उभरा भारत

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हां विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कोविड-19 वैश्विक महामारी एवं रूस-यूक्रेन युद्ध का मार झेल रही हैं, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया को अपनी चमक से प्रभावति कर रही है। इंटरनेशनल मोनेटरी फंड (आईएमएफ) के आंकड़ों को यदि देखे तब वर्ष 2023 में भारत वैश्विक विकास में 15 प्रतिशत योगदान देने वाला है। इतना ही नहीं, आज जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी का अनुमान है, भारतीय अर्थव्यवस्था 6 प्रतिशत से भी अधिक दर से बढ़ने वाली है। कोविड-19 वैश्विक महामारी की चुनौतियों का जिस कुशलता से भारत ने सामना किया तथा इस संकट भरे दौर में अन्य देशों की सहायता की, उसकी हर ओर भूरि-भूरि प्रशंसा हो रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का हर चुनौती को अवसर में बदलने का आह्वान एक राष्ट्रीय संकल्प में परिवर्तित हुआ। यह उनके दूरदर्शी एवं करिश्माई नेतृत्व का ही परिणाम था कि इस दौर में अनेक सुधार किए गए, ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना’ जैसे कदमों से गरीब से गरीब व्यक्ति को राहत दी गई तथा ‘आत्मनिर्भर भारत’ पैकेज के माध्यम से एमएसएमई एवं अन्य संकटग्रस्त क्षेत्रों को मजबूती दी गई। इस कठिन दौर में ‘मेड इन इंडिया’ टीकों के उत्पादन तथा 220 करोड़ से भी अधिक निःशुल्क टीकों के अलावा अर्थव्यवस्था के व्यापक डिजिटलीकरण के परिणामस्वरूप आज विश्व का 40 प्रतिशत डिजिटल लेन-देन भारत में हो रहा है। आज, जब भारत विश्व का ‘ग्रोथ इंजन’ बनकर उभरा है तथा इसके महत्व को आईएमएफ, विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थान स्वीकार रहे हैं, देश विश्वभर में आशा की किरण बनकर उभरा है।

आज, जब भारत विश्व का ‘ग्रोथ इंजन’ बनकर उभरा है तथा इसके महत्व को आईएमएफ, विश्व बैंक, एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थान स्वीकार रहे हैं, देश विश्वभर में आशा की किरण बनकर उभरा है

आज, जब भारत से पूरे विश्व की आशा एवं अपेक्षा जग रही है, एयर इंडिया द्वारा अमेरिका एवं फ्रांस से 470 विमानों की खरीदी से यह स्पष्ट है कि भारत में अब अपार संभावनाएं हैं। इस खरीदी का स्वागत करते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति श्री जो बाइडेन ने अपने ट्वीट के माध्यम से यह आशा व्यक्त की कि इससे अमेरिका के 44 राज्यों में 10 लाख रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कांग्रेस-यूपीए के दौर में दसवें स्थान पर रही भारत की अर्थव्यवस्था पिछले नौ वर्षों में पांचवें स्थान पर आने के साथ-साथ इसकी प्रति व्यक्ति आय भी दुगुनी से भी अधिक हो चुकी है। आज भारतीय अर्थव्यवस्था सभी मानकों पर मजबूती से खड़ी है तथा विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तीव्र विकास दर वाली अर्थव्यवस्था बन गई है। बजट 2023-24 को परिवर्तनकारी कदम के रूप में देखा जा सकता है, जिसमें हर क्षेत्र में भारी निवेश का प्रावधान है। एक ओर जहां पिछले नौ वर्षों में देश के बजट में दुगुनी से भी अधिक वृद्धि हुई है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न मंत्रालयों के लिए आवंटन कई गुणा अधिक बढ़ा दिए गए हैं। जहां पूरा विश्व उच्च मुद्रास्फीति दर के दबाव में है, मोदी सरकार ने इसे नियंत्रित कर पिछले नौ वर्षों में औसतन 4.93 प्रतिशत पर रखा है जबकि कांग्रेस-नीत यूपीए के दौर में औसतन मुद्रास्फीति की दर 8.45 प्रतिशत रही थी। जहां कांग्रेस नीत यूपीए के दौर में सर्वाधिक 11.94 प्रतिशत मुद्रास्फीति की दर गयी थी, वहीं भाजपा-नीत राजग के दौर में यह 7.8 प्रतिशत रही है और वह भी कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण। अथक प्रयास, न डिगने का संकल्प, विभिन्न सुधार एवं राष्ट्रीय एकजुटता के कारण आज भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में अग्रणी एवं सर्वसमावेशी तो बनी ही है, साथ ही गरीब, वंचित, अनु. जाति एवं जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिला एवं युवाओं का व्यापक सशक्तीकरण भी हुआ है।

विश्व को मानव कल्याण के कार्य की प्रेरणा देने वाला ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के मंत्र की गूंज ‘आॅपरेशन दोस्त’ में भी सुनाई पड़ी है। इस आॅपरेशन के अंतर्गत तुर्की एवं सीरिया में भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय आपदा राहत टीम ने अपनी सेवाएं देकर पूरे विश्व में सहायता एवं मित्रता का संदेश दिया है। कोविड-19 वैश्विक महामारी, प्राकृतिक आपदाओं, रूस-यूक्रेन युद्ध, श्रीलंका में वित्तीय संकट, शांति स्थापना जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए संकटग्रस्त देशों का सहायता पहुंचाकर भारत मानवता की सेवा में सदैव तत्पर है। आज जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सुदृढ़ एवं प्रो-एक्टिव नेतृत्व में जी-20 की अध्यक्षता भारत कर रहा है, यह विश्व के अनेक देशों का विश्वसनीय मित्र के रूप में उभरा है।

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