लोकमाता अहिल्याबाई भारत की विरासत की एक महान संरक्षिका थीं: नरेन्द्र मोदी

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   लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 31 मई को भोपाल, मध्य प्रदेश में लोकमाता देवी अहिल्याबाई महिला सशक्तीकरण महासम्मेलन को संबोधित किया। कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने ‘मां भारती’ को श्रद्धांजलि अर्पित की और भारत की नारी शक्ति का आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म जयंती है। यह 140 करोड़ भारतीयों के लिए प्रेरणा का अवसर है और राष्ट्र निर्माण के महान प्रयासों में योगदान देने का क्षण है। देवी अहिल्याबाई को उद्धृत करते हुए उन्होंने दोहराया कि सच्चे शासन का मतलब लोगों की सेवा करना और उनके जीवन को बेहतर बनाना है।

देवी अहिल्याबाई: दृढ़ इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक

लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर का नाम सुनकर गहरी श्रद्धा व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उनके असाधारण व्यक्तित्व का वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देवी अहिल्याबाई दृढ़ इच्छाशक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रतीक हैं, जो दर्शाती हैं कि चाहे कितनी भी प्रतिकूल परिस्थितियां क्यों न हों, परिवर्तनकारी परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। इतिहास का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने इस कहा कि ढाई सौ से तीन सौ साल पहले, जब देश उत्पीड़न की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, ऐसे असाधारण कार्य करना – इतने बड़े कि पीढ़ियां आज भी उनको याद करती हैं – कोई आसान काम नहीं था।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर ने कभी भी ईश्वर की सेवा और लोगों की सेवा के बीच अंतर नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे हमेशा अपने साथ शिवलिंग रखती थीं। यह उनकी गहरी भक्ति को दर्शाता है। उस समय की चुनौतियों पर विचार करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे युग में राज्य का नेतृत्व करना कांटों का ताज पहनने के समान था। फिर भी, लोकमाता अहिल्याबाई ने अपने राज्य की समृद्धि को एक नई दिशा प्रदान की, स्वयं को सबसे गरीब लोगों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित कर दिया।

श्री मोदी ने कहा, “लोकमाता अहिल्याबाई भारत की विरासत की एक महान संरक्षिका थीं।” प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि ऐसे समय में जब देश की संस्कृति, मंदिर और तीर्थ स्थलों पर हमला हो रहा था, उन्होंने उनके संरक्षण की जिम्मेदारी ली। उन्होंने काशी विश्वनाथ सहित देश भर में कई मंदिरों के जीर्णोद्धार में उनके योगदान का उल्लेख किया।

श्री मोदी ने रेखांकित किया कि माता अहिल्याबाई ने एक अनुकरणीय शासन मॉडल लागू किया, जिसमें गरीबों और हाशिए पर पड़े लोगों के कल्याण को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की। उन्होंने कृषि, वन उपज पर आधारित कुटीर उद्योगों और हस्तशिल्प को बढ़ावा दिया। कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्होंने छोटी नहरें बनवाईं और लगभग 250-300 साल पहले कई तालाबों का निर्माण करवाकर जल संरक्षण के प्रयास किए। श्री मोदी ने आदिवासी समुदायों और खानाबदोश समूहों के लिए उनके दूरदर्शिता पर जोर दिया। उन्होंने इन समूहों की आजीविका बढ़ाने के लिए अप्रयुक्त भूमि पर कृषि में सहयोग दिया।

श्री मोदी ने कहा, “देवी अहिल्याबाई होल्कर को हमेशा लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु बढ़ाने, महिलाओं के संपत्ति के अधिकार को सुरक्षित करने और विधवाओं के पुनर्विवाह का समर्थन करने जैसे उनके महत्वपूर्ण सामाजिक सुधारों के लिए याद किया जाएगा। ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर उनके समय में चर्चा करना भी मुश्किल था।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक चुनौतियों के बावजूद देवी अहिल्याबाई ने इन प्रगतिशील सुधारों का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने मालवा सेना में एक विशेष महिला यूनिट भी बनाई और गांवों में महिला सुरक्षा समूह स्थापित किए, जिससे सुरक्षा और सशक्तीकरण सुनिश्चित हुआ।