सांस्कृतिक विरासत की जनक और कुशल शासन की पर्याय, मालवा की महारानी अहिल्याबाई होल्कर आज देश के दिशा-निर्धारकों के रूप में मानी जाती हैं। उनके द्वारा किए गए सांस्कृतिक पुनरुत्थान के प्रतीकों ने भारत को एक विश्वव्यापी पहचान दी है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी इसी विरासत को और सुदृढ़ करने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
किसी भी देश की प्रगति में आर्थिक व सामाजिक विकास के साथ ही सांस्कृतिक उत्थान का बहुत बड़ा महत्व होता है। भारत आज पूरे विश्व के लिए एक नवनिर्माण और नवजागरण का प्रतीक बन गया है, जिसके पीछे उस सांस्कृतिक उत्थान का बड़ा योगदान है जो पिछले दस सालों से हमारी नीतियों और शासन तंत्र में परिलक्षित होता आया है। यह सांस्कृतिक उत्थान भले ही आज देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सोच और दूरदर्शिता का परिणाम है, लेकिन इस परिप्रेक्ष्य में पिछली तीन शताब्दियों में सबसे असाधारण योगदान भारत की दूरदर्शी और कुशल शासक रानी अहिल्याबाई होल्कर का है।
रानी अहिल्याबाई ने अपने जीवनकाल में कई मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया जो आक्रांताओं और अंग्रेजी शासकों के अत्याचारों के शिकार हुए थे। उन्होंने न केवल काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया, बल्कि ध्वस्त हो चुके सोमनाथ मंदिर के समीप दो मंजिला मंदिर का निर्माण भी करवाया
रानी अहिल्याबाई का जन्म 31 मई, 1725 को वर्तमान महाराष्ट्र राज्य के जामखेड़, अहमदनगर स्थित चौंढी नामक गांव में हुआ था। उनके पिता मान्कोजी शिंदे एक सामान्य किसान थे और वे सादगी एवं घनिष्ठता से जीवन व्यतीत करते थे।
यह देश का सौभाग्य है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी देवी अहिल्याबाई होल्कर के पदचिन्हों पर चल रहे हैं। दोनों ही व्यक्तियों ने समान संस्कार प्राप्त किए, समान संघर्षों को जीया।
विषम परिस्थितियों के बावजूद और अपने परिवारजनों का साथ छूट जाने के बाद भी कालांतर में अहिल्याबाई 1767 में मालवा के इंदौर की शासक बनीं। यह उनके सैन्य और प्रशासनिक मामलों में प्रशिक्षित होने का ही परिणाम था कि उन्होंने 28 वर्षों तक बुद्धिमत्तापूर्ण और न्यायोचित तरीके से मालवा पर शासन किया, जिसे आज भी याद किया जाता है। उनके शासन काल में न केवल मालवा में शांति, समृद्धि और स्थिरता बनी रही बल्कि शिक्षा, उद्योग, संस्कृति, धर्म व सैन्य नवीनीकरण की दिशा में भी उल्लेखनीय काम हुए।
सनातन संस्कृति की रक्षा
सनातन संस्कृति की रक्षा व प्रचार-प्रसार का अटल संकल्प एक और विशिष्टता है जो रानी अहिल्याबाई और श्री नरेन्द्र मोदी में समान रूप से देखी जाती है। रानी अहिल्याबाई ने अपने जीवनकाल में कई मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया जो आक्रांताओं और अंग्रेजी शासकों के अत्याचारों के शिकार हुए थे।
उन्होंने न केवल काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया, बल्कि ध्वस्त हो चुके सोमनाथ मंदिर के समीप दो मंजिला मंदिर का निर्माण भी करवाया। भारत के आधुनिक इतिहास के पूर्वार्ध में सभ्यता के पुनरुत्थान को सुदृढ़ करने के लिए उनके द्वारा जो व्यापक कार्य हुए उनमें श्रीनगर, हरिद्वार, केदारनाथ, बद्रीनाथ, ऋषिकेश, प्रयाग, काशी, नैमिषारण्य, पुरी, रामेश्वरम, सोमनाथ, नासिक, ओंकारेश्वर, महाबलेश्वर, पुणे, इंदौर, श्रीशैलम, उडुपी, गोकर्ण और काठमांडू में मंदिरों का निर्माण प्रमुख हैं।
ये अधिकतर क्षेत्र उनके मालवा साम्राज्य से बाहर थे, लेकिन उनकी दूरदर्शिता पूरे समाज को एक सूत्र में जोड़ने की थी। मंदिरों के पुनरुत्थान को लेकर ठीक वैसी ही प्रतिबद्धता आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों में स्पष्ट रूप से दिखती है। अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर का निर्माण पूरे सनातन हिन्दू समाज के लिए एक विराट उपलब्धि है।
रानी अहिल्याबाई ने नदी-घाटों पर साफ-सफाई तथा पुनर्विकास का काम भी कराया। कानपुर के बिठूर (ब्रह्मवर्त) में उन्होंने कई घाट बनवाए। काशी में उन्होंने मणिकर्णिका के अलावा एक ‘नया घाट’ भी बनवाया। तुलसी घाट के पास ‘लोलार्क कुंड’ स्थित है, भदैनी में इसी से सम्बंधित एक कूप का निर्माण रानी अहिल्याबाई ने करवाया। नदी-घाटों के जीर्णोद्धार की प्रेरणा लेकर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने काशी के घाटों का तो कायाकल्प ही कर दिया है। उन्होंने काशी को अपना राजनीतिक कर्मक्षेत्र बनाने के समय कहा कि उन्हे मां गंगा ने बुलाया है और वे इसलिए काशी आए। उन्होंने काशी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण कराया। इसकी वजह से जो अपार जनसमूह वहां दर्शन के लिए पहुंचता है उससे सीधे गंगा के तट पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इस कॉरिडोर में रानी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा भी स्थापित की गई। घाटों की सफाई और सौंदर्यीकरण ने तो इन्हें एक पर्यटन स्थल बना दिया है। नमो घाट पर अब तक 77 करोड़ रुपए खर्च कर काशी में देशवासियों के लिए एक दर्शनीय स्थल तैयार किया गया है। गोदौलिया घाट से दशाश्वमेध घाट तक सड़क और भवनों के सौंदर्यीकरण पर तथा सीएसआर के तहत 10 घाटों के सौंदर्यीकरण पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
सोमनाथ मंदिर के प्रांगण में श्री मोदी ने कई परियोजनाओं की शुरुआत की है। मंदिर के पीछे समुद्र तट पर एक किलोमीटर लंबा पैदल-पथ बनाया गया है। वहां एक सोमनाथ प्रदर्शनी केंद्र भी बनाया गया, है जहां पुराने सोमनाथ मंदिर के खंडित हिस्से और मूर्तियां रखी गई हैं।
अभूतपूर्व कार्य
प्रयागराज में ऐतिहासिक महाकुंभ के लिए भी अभूतपूर्व कार्य करवाए गए हैं जिसके फलस्वरूप महाकुंभ मेले को दिसंबर, 2017 में यूनेस्को ने अपनी अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया। आज महाकुंभ एक वैश्विक आस्था, श्रद्धा और चेतना का प्रतीक है।
सामाजिक कुप्रथाओं के विरुद्ध सशक्त आवाज बुलंद करने में रानी अहिल्याबाई की विशिष्ट भूमिका रही है। वे स्वयं मालवा राज्य में सती प्रथा के खिलाफ खड़ी हुई थीं और तत्कालीन कुप्रथाओं को तोड़ते हुए उन्होंने लड़कियों के विवाह की उम्र बढ़ाने का साहसिक कार्य किया। विधवा महिलाओं को संपत्ति में हक दिलाया
इसी प्रकार, उज्जैन में श्री महाकाल मंदिर में कॉरिडोर का निर्माण किया गया जिससे इस प्रख्यात तीर्थस्थल पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को इस स्थान के महत्व और इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है।
आधुनिक समय में गिने-चुने लोगों ने ही देवी अहिल्याबाई की सनातन धर्म की शिक्षा, दर्शन व परंपरा के मार्ग पर चलने का साहस किया और इनमें प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का नाम सर्वोपरि है। रानी अहिल्याबाई की इसी परम्परा से प्रेरणा लेकर उन्होंने पाली भाषा के लिए बड़ा काम किया। भगवान बुद्ध ने पाली भाषा में ही अपने उपदेश दिए थे। पाली को उनकी सरकार द्वारा शास्त्रीय भाषा (क्लासिकल लैंग्वेज) के रूप में मान्यता देकर भगवान बुद्ध की महान विरासत तथा धरोहर को विनम्र श्रद्धांजलि दी गई है।
रानी अहिल्याबाई की तरह ही श्री मोदी ने दूरस्थ क्षेत्रों में धर्म और संस्कृति के संरक्षण और उत्थान के लिए कई कार्य करवाए। उन्होंने केदारनाथ धाम का पुनर्विकास किया, जहां वर्ष 2013 की बाढ़ में व्यापक विनाश हुआ था। पूरे मंदिर परिसर की संरचना दोबारा तैयार की गई और मंदिर को उसकी पूर्ण भव्यता में स्थापित करने के लिए नए परिसर भी जोड़े गए। वर्ष 2017 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस मंदिर में पांच प्रमुख पुनर्निर्माण परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी। इसी के साथ यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के चार तीर्थ स्थलों को जोड़ने वाले एक आधुनिक और विस्तृत चार धाम सड़क नेटवर्क के निर्माण को मंजूरी देकर चार धाम परियोजना की शुरुआत की गई।
श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा भारत के अलावा कई अन्य देशों में फैली सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयास किए गए हैं। उनके द्वारा बहरीन की राजधानी में 200 साल पुराने श्रीनाथजी मंदिर के जीर्णोद्धार का कार्य प्रारंभ हुआ। उनके प्रयासों से ही संयुक्त अरब अमीरात ने अबू धाबी में स्वामीनारायण मंदिर के तौर पर पहले परंपरागत हिंदू मंदिर निर्माण की अनुमति दी। भारत की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पिछले पांच वर्षों में विदेशों से रिकॉर्ड कलाकृतियां प्राप्त कीं। भारतीय सर्वेक्षण विभाग ने ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, जर्मनी, कनाडा व इंग्लैंड से भारत से चुराई गई 44 कलाकृतियां हासिल की हैं। इसके अलावा 119 अन्य कलाकृतियां भी जल्द ही भारत आएंगी। प्रधानमंत्री की अमेरिका यात्रा के अवसर पर अमेरिकी पक्ष ने भारत से चोरी की गई या तस्करी के माध्यम से ले जायी गई 297 प्राचीन वस्तुओं की वापसी में सहायता की है। उल्लेखनीय है कि श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले एक दशक में 600 से अधिक प्राचीन विरासतों, कलाकृतियों, मूर्तियों और अवशेषों को भारत वापस लाने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किया है।
सामाजिक कुप्रथाओं के विरुद्ध सशक्त आवाज बुलंद करने में रानी अहिल्याबाई की विशिष्ट भूमिका रही है। वे स्वयं मालवा राज्य में सती प्रथा के खिलाफ खड़ी हुई थीं और तत्कालीन कुप्रथाओं को तोड़ते हुए उन्होंने लड़कियों के विवाह की उम्र बढ़ाने का साहसिक कार्य किया। विधवा महिलाओं को संपत्ति में हक दिलाया। यही नहीं, रानी अहिल्याबाई स्वयं एक सक्षम तीरंदाज थीं। उन्होंने अपने शासन काल में महिला सुरक्षा बल की स्थापना की। जिस तरह उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि महिलाएं सेना का हिस्सा बनें, वैसे ही श्री मोदी ने सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन स्थापित किया और सेना में 12 नई शाखाएं महिला अधिकारियों के लिए खोली गई हैं। साथ ही, नौसेना एवं वायुसेना में महिला अग्निवीरों की भर्ती से उनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महाराष्ट्र के वर्धा जिले में ‘पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होल्कर महिला स्टार्टअप योजना’ का शुभारंभ किया, जिसके अंतर्गत महिलाओं के नेतृत्व वाले स्टार्टअप को शुरुआती चरण में 25 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह योजना रानी अहिल्याबाई के उस भविष्य को साकार करने का एक सार्थक प्रयास है जिसमें महिलाएं आत्मनिर्भर हों।
अहिल्याबाई जी की तरह ही श्री मोदी ने महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देते हुए ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का आह्वान किया। इसका सुखद परिणाम यह हुआ है कि जन्म के समय लिंगानुपात वर्ष 2014-2015 में 918 के मुकाबले वर्ष 2022-23 में 933 हो गया। यह प्रधानमंत्री के अथक प्रयासों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। देश में तीन तलाक की कुप्रथा को खत्म कर श्री मोदी ने लाखों महिलाओं को सम्मान दिलाया। आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। खेल का मैदान हो या सीमाओं की सुरक्षा, हर मोर्चे पर देश की बेटियां देश का सिर ऊंचा कर रही हैं।
सुशासन की व्यापक पहल
रानी अहिल्याबाई ने भूमि राजस्व प्रबंधन की प्रक्रियाएं सरल बनाई थी। उनके आदर्शों पर चलते हुए ही मोदी सरकार भी भू-प्रबंधन के सरलीकरण में जुटी है। स्वामित्व योजना के जरिए जमीन के रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण जैसे कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं। रानी अहिल्याबाई द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान गरीबों के लिए मुफ़्त भोजन की व्यवस्था, उनके लिए रहने और ठहरने की व्यवस्था और उनकी सुरक्षा की व्यवस्था की गई थी और श्री मोदी के कार्यकाल में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए मुफ़्त राशन की व्यवस्था की गई, जो महामारी के दिनों में शुरू की गई। परिस्थितियों को देखते हुए यह

रानी अहिल्याबाई एक कुशल राजनीतिज्ञ थीं और उनका मानना था कि धन, वैभव तथा राजसत्ता प्रजा व ईश्वर की दी हुई वह धरोहर स्वरूप निधि है जिसका प्रजाहित में उपयोग किए जाने हेतु वे संरक्षक हैं
वर्तमान में भी जारी है। महारानी अहिल्याबाई ने मालवा के महेश्वर में जिस वस्त्र उद्योग की स्थापना की वह आज भी देश-विदेश में अपनी कलात्मक व सुरुचिपूर्ण माहेश्वरी साड़ियों के लिए प्रसिद्ध है। उसी प्रकार श्री मोदी भी ‘वोकल फॉर लोकल’ के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। रानी अहिल्याबाई के शासन काल में सड़क निर्माण व जल संरक्षण के बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गया। उनकी प्रेरणा से ही मोदी सरकार भी आज रिकॉर्ड गति से हाइवे निर्माण कर रही है और युद्ध स्तर पर जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही है।
रानी अहिल्याबाई होल्कर के शासन काल में इंदौर एक छोटे से गांव से एक भव्य खूबसूरत शहर बन गया था। आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश को स्वच्छ तथा सुंदर बनाने के लिए नई-नई योजनाओं को लागू किया गया है। रानी अहिल्याबाई होल्कर पशुओं के दर्द को समझती थीं और आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर देश में गौ-सुरक्षा को लेकर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का पशुओं से विशेष लगाव है। उनके सरकारी आवास में कई गायें रहती हैं और वे गौ सेवा भी करते हैं।
समाज की संरक्षक

रानी अहिल्याबाई एक कुशल राजनीतिज्ञ थीं और उनका मानना था कि धन, वैभव तथा राजसत्ता प्रजा व ईश्वर की दी हुई वह धरोहर स्वरूप निधि है जिसका प्रजाहित में उपयोग किए जाने हेतु वे संरक्षक हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भी हमेशा सत्ता और अपने पद को देशवासियों की सेवा के एक निमित्त मात्र के रूप में स्वीकार किया है। चाहे वह उनका काशी को अपना कर्मक्षेत्र बनाने का निर्णय हो, या देश भर के उपेक्षित, कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली व्यक्तियों को चिन्हित करके उन्हे सम्मानित करना हो, यह श्री मोदी द्वारा रानी अहिल्याबाई की ही नीतियों का प्रतिपादन है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोकमाता के आदर्शों पर चलते हुए राजनीति के ढाई दशक में देश को भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति से मुक्त शासन देने का कार्य किया है। आज देश सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और अब सबका प्रयास के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। रानी अहिल्याबाई के सिद्धांतों का अनुसरण करते हुए ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भ्रष्टाचार को लेकर भारत में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी है और यह सर्व-विदित है कि भ्रष्टाचार के मामले में जो भी पकड़ा जाएगा वह बचेगा नहीं।
सनातन की धरोहर को एक संन्यासी ही संजो सकता है। आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी सनातन परंपरा का प्रचार-प्रसार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी ने जी-20 जैसे बड़े आयोजन में सनातन संस्कृति का झंडा बुलंद करके भारत माता का मान बढ़ाया है। नटराज की प्रतिमा, कोणार्क चक्र, रामायण, महाभारत, विष्णु अवतार के दर्शन, गीता ऐप के जरिये जीवन दर्शन आदि से विदेशी मेहमान भी मोहित हुए बिना नहीं रह सकते थे। अठारहवीं शताब्दी में रानी अहिल्याबाई ने संभल में कल्कि मंदिर का निर्माण करवाया। यह शाही जामा मस्जिद के पास स्थित है।
रानी अहिल्याबाई का जीवन भारत के सांस्कृतिक इतिहास का एक स्वर्णिम उदाहरण है। यह इस बात का एक प्रतीक है कि यदि कोई शासक अपने परिवेश की कठिनाइयों के बावजूद समाज और देश के हित को सर्वोपरि रखे तो उस देश को विश्वगुरु बनने से कोई रोक नहीं सकता। दयालु हृदय, उज्ज्वल कीर्ति, न्यायपूर्ण व्यवहार और सामाजिक व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण रानी अहिल्याबाई के जीवन के कुछ स्मरणीय बिन्दु हैं। भारत की सनातन-संस्कृति ने सदैव ही दुनिया को प्रेरित किया और इसी संस्कृति की प्रतीक अहिल्याबाई होल्कर के सपनों को आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी साकार कर रहे हैं। हर काल में अहिल्याबाई होल्कर जैसी वीरांगनाओं ने जन्म लिया, जिनके व्यक्तित्व एवं कर्तव्य के आगे सारा संसार सिर झुकाता है। उन्हीं के समान ही अमृत काल में आज देश में सनातन परंपरा को संरक्षित करना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का लक्ष्य बन गया है। इतिहासकार जॉन कीय ने अहिल्याबाई होल्कर को फिलॉसफर क्वीन कहा था। इसी प्रकार देश के प्रबुद्ध जनों ने श्री नरेन्द्र मोदी के शासन की तुलना उनके प्रभावशाली, मजबूत व जनकल्याणकारी कार्यों के साथ की है। रानी अहिल्याबाई के समान नीतियों को अपने शासन का आधार बना कर श्री मोदी के नेतृत्व में देश और भी सुदृढ़ बनने की दिशा की ओर अग्रसर है।
(लेखक भाजपा राष्ट्रीय आईटी एवं सोशल मीडिया विभाग के प्रभारी एवं
भाजपा, पश्चिम बंगाल प्रदेश के सह-प्रभारी हैं)

