भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज सोमवार को हरियाणा के अंबाला में श्रद्धेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित स्मरणोत्सव कार्यक्रम को संबोधित किया। श्री जगत प्रकाश नड्डा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को भारतीय जनसंघ के संस्थापक, प्रखर राष्ट्रवादी, दूरदर्शी शिक्षाविद् और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के प्रणेता के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डॉ. मुखर्जी के आदर्शों और संकल्पों को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में साकार किया गया है। श्री नड्डा ने धारा 370 की समाप्ति, सीएए, आत्मनिर्भर भारत, नई शिक्षा नीति और औद्योगिक विकास को डॉ. मुखर्जी के विचारों का विस्तार बताया। कार्यक्रम के दौरान मंच पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्षा डॉ. अर्चना गुप्ता जी, पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव सहित अन्य नेतागण उपस्थित रहे।
श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जन्म जयंती के अवसर पर हरियाणा की पवित्र भूमि अंबाला आने का अवसर मिला। मैं इस भूमि को नमन करता हूं, जो सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से गीता की भूमि कही जाती है। यह धरती देश की आजादी की लड़ाई से जुड़ी रही है, देश के वीरों की कर्मभूमि रही है तथा खेलों में देश का नाम रोशन करने वाली हरियाणा की भूमि है। यहाँ उपस्थित सभी लोग डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की जन्म जयंती के अवसर पर उनकी जीवन गाथा और उससे मिलने वाली प्रेरणा पर गहराई से चर्चा करने के लिए एकत्र हुए हैं, ताकि सभी पुनः उनसे प्रेरणा लेकर अपने जीवन को समर्पित करने का संकल्प लें। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का कर्तृत्व केवल इतिहास नहीं है, बल्कि वह जीवन की एक दृष्टि है। उन्होंने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। हम सभी जिस पार्टी के सदस्य हैं, उसके संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ही थे। उन्होंने ही भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी और हम सभी जानते हैं कि 21 अक्टूबर, 1951 को उन्होंने इस विचारधारा के साथ भारतीय जनसंघ की स्थापना की। आज यह हम सभी के लिए प्रसन्नता की बात है कि जिस पौधे की जड़ों को उन्होंने सींचा और उसे विकसित किया, वही आज आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। आज भारतीय जनता पार्टी और एनडीए देश की लगभग 78 प्रतिशत जनसंख्या पर शासन कर रहे हैं। साथ ही, देश के लगभग 72 प्रतिशत भू-भाग पर एनडीए और भारतीय जनता पार्टी का कमल खिला हुआ है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी एक विचार बताया, तो उसका आशय यह था कि वे सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भर भारत तथा भारत की एकता और अखंडता के लिए समर्पित विचार के साथ आगे बढ़ने वाले व्यक्तित्व थे। हम सभी को इस बात का गौरव होना चाहिए कि जिस पार्टी के हम सदस्य और कार्यकर्ता हैं, उसके प्रथम अध्यक्ष और संस्थापक, जिन्होंने इस पार्टी की स्थापना की, उनका परिवार और उनका स्वयं का कर्तृत्व कितना महान था। उनके संस्कार आज भी हमारी पार्टी में रचे-बसे हैं। यह जानकर सभी को आश्चर्य, प्रसन्नता और गौरव का अनुभव होगा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी किसी साधारण परिवार में जन्मे नहीं थे। वे डॉ. आशुतोष मुखर्जी के सुपुत्र थे। डॉ. आशुतोष मुखर्जी अपने जीवनकाल में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी रहे और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे। कुलपति के रूप में उन्होंने ब्रिटिश शासन के सामने यह स्पष्ट कहा था कि अंग्रेज और भारतीय प्रोफेसरों के वेतन तथा सुविधाओं में कोई अंतर नहीं रहेगा। उन्होंने उसी समय भारतीयता का बीज बोया था। उन्होंने कुलपति रहते हुए यह भी कहा था कि कलकत्ता विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ाया जाना चाहिए। जिस पिता ने अंग्रेजों के शासनकाल में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य किया, उसी विश्वविद्यालय में उनके सुपुत्र डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी 33 वर्ष की आयु में कुलपति बने और सबसे कम उम्र के कुलपति बने।
श्री नड्डा ने कहा कि वर्ष 1934 में उन्होंने पहली बार दीक्षांत समारोह में भाषण देने के लिए रवीन्द्रनाथ टैगोर जी को आमंत्रित किया। रवीन्द्रनाथ टैगोर जी ने पहली बार कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में अपनी मातृभाषा बंगाली में भाषण दिया और इस प्रकार एक महत्वपूर्ण परिवर्तन की शुरुआत की। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी तीन बार विधानसभा के सदस्य रहे और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री भी रहे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बारे में एक बात हमें सदैव ध्यान रखनी चाहिए कि उन्होंने कभी पद को महत्व नहीं दिया, बल्कि विचार को सर्वोपरि रखा। जब-जब विचार और पद के बीच चुनने की स्थिति आई, तब-तब उन्होंने पद का त्याग किया और अपने विचारों के साथ दृढ़ता से खड़े रहे। हुसैन सुहरावर्दी की सरकार ने उस समय, जब पश्चिम और पूर्व बंगाल एक साथ थे, यह योजना बना ली थी कि विभाजन के समय पूरा बंगाल पाकिस्तान के साथ जाएगा। उस समय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने जन आंदोलन चलाया और स्पष्ट कहा कि वे ऐसा कभी नहीं होने देंगे। आज का पश्चिम बंगाल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की ही देन है। यदि ऐसा न हुआ होता, तो कांग्रेस ने यह मान लिया था कि पूरा बंगाल पूर्वी पाकिस्तान के साथ चला जाएगा। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने कहा था कि “जब बंगाल के 45 प्रतिशत हिंदुओं को मुस्लिम लीग का गुलाम बनाने की तैयारी की जा रही है, तब यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने लिए ऐसी भूमि की मांग करें, जहाँ हम सम्मान के साथ रह सकें। मैं कांग्रेस और विशेष रूप से नेहरू से पूछना चाहता हूँ कि क्या आपने मुस्लिम लीग को खुश करने के लिए बंबई और सिंध के विभाजन को स्वीकार नहीं किया था?”
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि क्या आपने मुस्लिम लीग के तुष्टिकरण और उसे खुश करने के लिए मुंबई और सिंध का विभाजन स्वीकार नहीं किया था? ऐसे में यदि आज हम बंगाल की बात कर रहे हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। आज जिस बंगाल को पश्चिम बंगाल कहा जाता है, वह इसलिए है क्योंकि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्पष्ट कहा था कि बंगाल का पश्चिमी भाग, जहाँ हिंदुओं की बहुसंख्या है, भारत का हिस्सा रहना चाहिए। इसी कारण पश्चिम बंगाल का निर्माण हुआ। आज का पश्चिम बंगाल उनकी ही देन है। यह भी खुशी की बात है कि उनकी 125वीं जन्म जयंती के अवसर पर उसी पश्चिम बंगाल में यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में कमल खिला है। इससे बड़ी श्रद्धांजलि शायद कोई और नहीं हो सकती थी कि पश्चिम बंगाल की जनता ने वहाँ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाई। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की औद्योगिक नीति दूरदर्शी थी और वे एक कुशल प्रशासक थे। वे एक महान शिक्षाविद् भी थे। वे कुलपति बने और उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे विधायक बने, मंत्री बने, लेकिन अपने विचारों से कभी समझौता नहीं किया और आवश्यकता पड़ने पर पद भी छोड़ दिया। वर्ष 1947 में जब पंडित नेहरू ने उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया और मंत्री बनाया, तब उन्होंने एक वर्ष के भीतर ही देश के लिए औद्योगिक नीति प्रस्तुत कर दी। आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जिस आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए दिन-रात कार्य कर रहे हैं, उसकी नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने वर्ष 1948 में ही रख दी थी।
श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि मात्र दो-तीन वर्षों के भीतर, वर्ष 1950 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने इस्तीफा भी दे दिया। आजादी के केवल तीन वर्षों के भीतर ही चित्तरंजन लोकोमोटिव, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु, सिंदरी फर्टिलाइजर, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, हीराकुड डैम और भिलाई स्टील प्लांट जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं की नींव डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने रख दी थी। यह उनकी दूरदृष्टि थी और वे एक कुशल प्रशासक थे। वर्ष 1950-51 में जब लियाकत अली और जवाहरलाल नेहरू के बीच समझौता हुआ, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने स्पष्ट कहा था, “तुम गलत कर रहे हो।” उन्होंने संसद में यह भी कहा था, “यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि तानाशाही है। तुम गलत कर रहे हो, यह हम नहीं होने देंगे।” उस समय नेहरू-लियाकत समझौते के अनुसार यह तय हुआ था कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू भाइयों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिलेगा, लेकिन लियाकत अली के समय में ही पूर्वी पाकिस्तान में इस समझौते की धज्जियां उड़ गईं। इससे नाराज होकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने जवाहरलाल नेहरू की मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। इसी प्रकार धारा 370 के मुद्दे पर भी, जब जवाहरलाल नेहरू इसे लागू करना चाहते थे, तब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने इसका विरोध करते हुए कहा था, “यह तुम्हारी तुष्टिकरण की नीति है, इससे देश मजबूत नहीं होगा, मैं तुम्हारे कैबिनेट से इस्तीफा देता हूँ।” इसके बाद उन्होंने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस पार्टी के विरुद्ध एक सशक्त विपक्ष की आवश्यकता थी और इसी उद्देश्य से डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की। वर्ष 1952 के चुनाव में भारतीय जनसंघ के केवल तीन सांसद निर्वाचित होकर आए, जिनमें स्वयं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी दक्षिण कलकत्ता से निर्वाचित हुए थे। मात्र तीन सांसद होने के बावजूद डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने 33 सांसदों को साथ लेकर नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी का गठन किया और विपक्ष के इन 33 सांसदों को एकजुट कर अपने कार्य की शुरुआत की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने “एक देश में दो विधान, दो प्रधान, दो निशान नहीं चलेंगे” का आह्वान किया था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने जम्मू में जाकर कहा था, “जम्मू वालों, तुमको मैं विश्वास दिलाता हूँ कि तुमको एक संविधान दूँगा और अगर नहीं दूँगा तो अपना बलिदान दूँगा।” हम सभी जानते हैं कि किस प्रकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने इस उद्देश्य के लिए अपनी यात्रा प्रारंभ की। आज जब सभी अंबाला में बैठे हैं, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी अंबाला में ही उतरे थे और यहीं से उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत की थी। उन्होंने सोनीपत, पानीपत, करनाल, नीलोखेड़ी और शाहबाद सहित अनेक स्थानों पर संबोधन करते हुए जम्मू-कश्मीर की ओर प्रस्थान किया था। वही यात्रा उनकी अंतिम यात्रा सिद्ध हुई। वर्ष 1951 से लेकर 1953 में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के बलिदान के बाद लगातार यह नारा लगाया जाता रहा, “जहाँ बलिदान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है और वो कश्मीर सारे का सारा है।” चार पीढ़ियाँ बीत गईं और लगातार यह नारा गूंजता रहा कि “एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो संविधान नहीं चलेगा।” 5 अगस्त, 2019 को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की इच्छाशक्ति ने धारा 370 को धाराशायी कर दिया। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में एक निशान, एक विधान, एक संविधान और एक प्रधान की व्यवस्था लागू हो गई।
श्री नड्डा ने कहा कि जिन उद्देश्यों के लिए डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने अपना बलिदान दिया था, उन्हें अक्षरशः पूरा करने का कार्य यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का मानना था कि पूर्वी पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न नहीं होना चाहिए, लेकिन उस समय कांग्रेस मौन रही और तुष्टिकरण की नीति अपनाती रही। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लेकर आए। इसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए लोगों को नागरिकता देने का अधिकार प्रदान किया गया और इस प्रकार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के सपने को पूरा किया गया। इसी प्रकार आत्मनिर्भर भारत की जिस नींव को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने रखा था, उसे साकार करने का कार्य ‘मेक इन इंडिया’, पीएलआई योजना, रक्षा विनिर्माण तथा सेमीकंडक्टर निर्माण जैसी पहलों के माध्यम से किया गया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने की थी और आज वहीं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र के विमान बनाए जा रहे हैं। इस प्रकार भारत निरंतर बदलते हुए आगे बढ़ रहा है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का स्पष्ट मत था कि शिक्षा भारतीय भाषाओं में होनी चाहिए। आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने मातृभाषा में शिक्षा की व्यवस्था लागू की है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का मानना था कि शिक्षा सभी के लिए उपलब्ध (Available), वहनीय (Affordable), सुलभ (Accessible) और लचीली (Flexible) होनी चाहिए। इन सभी उद्देश्यों को भी माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने नई शिक्षा नीति के माध्यम से पूरा किया है। एक नजर से देखो सबको, किसी के साथ भेदभाव नहीं करो। कांग्रेस पार्टी जवाहरलाल नेहरू के टाइम से लेकर और इंदिरा गांधी के टाइम तक और मनमोहन सिंह के टाइम तक हमेशा तुष्टिकरण पर चलती रही। जो गलतियाँ वक्फ बोर्ड में हो रहा था, उस वक्फ बोर्ड को भी नियम बदल करके उसको भी कानून को सबके लिए बराबर करने का काम मोदी सरकार ने किया।
भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि आज जब हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को याद करते हैं, तो दो बातों का संतोष होता है। पहली, जिन उद्देश्यों के लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया, उन सभी को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अक्षरशः लागू किया है। दूसरी, उनसे जो प्रेरणा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की मिली है, उसे भारतीय जनता पार्टी का प्रत्येक कार्यकर्ता साकार करने के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करते हुए विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ा रहा है। यह संकल्प आज पूरा होता हुआ दिखाई दे रहा है। यदि हरियाणा की बात करें, तो पिछले 12 वर्षों में राज्य ने विकास की लंबी छलांग लगाई है। विकसित भारत की दिशा में विकसित हरियाणा तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। पिछले 12 वर्षों में हरियाणा में लगभग 1,300 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण हुआ है। यमुनानगर में लगभग ₹8,469 करोड़ की लागत से निर्मित 800 मेगावाट क्षमता वाले दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर स्टेशन को भी आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हरियाणा की जनता को समर्पित किया है। लगभग ₹1,070 करोड़ की लागत से निर्मित रेवाड़ी बाईपास भी समर्पित किया गया है। गुरुग्राम, हरियाणा में लगभग ₹1 लाख करोड़ की लागत से 112 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का कार्य भी पिछले 12 वर्षों में हरियाणा को मिला है। इसके साथ ही हरियाणा खंड में लगभग 19 किलोमीटर लंबे द्वारका एक्सप्रेसवे का निर्माण लगभग ₹4,100 करोड़ की लागत से किया गया है। सड़क, रेल और अन्य सभी प्रकार के बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में हरियाणा ने तीव्र गति से विकास किया है और इस विकास में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
श्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि आज दुनिया की सबसे बड़ी मारुति सुजुकी की फैक्ट्री हरियाणा के खरखौदा में लगभग ₹35,000 करोड़ की लागत से स्थापित हो रही है। इसमें प्रतिवर्ष लगभग 10 लाख गाड़ियों का निर्माण होगा। हरियाणा में सड़कों का व्यापक जाल बिछाया गया है, जैसा कि वे बार-बार उल्लेख कर चुके हैं। दिल्ली-अंबाला तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना के निर्माण के लिए भी लगभग ₹5,938 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस प्रकार यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आत्मनिर्भर हरियाणा को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने के लिए आवश्यक कार्यों को अत्यंत तीव्र गति से आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में भी हरियाणा निरंतर और तीव्र गति से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। आज हरियाणा ऐसा प्रदेश है, जहाँ प्रत्येक कृषि उपज पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिया जाता है। यह हरियाणा की विशिष्ट उपलब्धि है। सभी फसलों की खरीद सुनिश्चित करने के लिए सभी फसलों पर एमएसपी देने की दिशा में हरियाणा आगे बढ़ा है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यहाँ उपस्थित हमारे पुराने साथियों ने इनेलो का शासन भी देखा है, कांग्रेस का शासन भी देखा है और वह दौर भी देखा है, जब भर्ती घोटालों के मामलों में नेताओं को वर्षों तक जेल जाना पड़ता था। जब से प्रदेश में भाजपा सरकार बनी है, पहले श्री मनोहर लाल जी के नेतृत्व में और अब श्री नायब सिंह सैनी जी के नेतृत्व में, तब से “ना खर्ची, ना पर्ची” के सिद्धांत पर कार्य हुआ है। इसके बावजूद लगभग 35,000 लोगों को सी-ग्रेड की नौकरियाँ दी गई हैं और इसी प्रकार आगे बढ़ने का कार्य किया गया है। दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत प्रत्येक पात्र महिला को ₹2,100 दिए जा रहे हैं। हर घर, हर गृहिणी योजना के अंतर्गत एलपीजी गैस सिलेंडर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। छोटे से प्रदेश हरियाणा को भी आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने रेवाड़ी में लगभग ₹1,100 करोड़ की लागत से एक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) प्रदान किया है, जिसका निर्माण कार्य चल रहा है। देश का सबसे बड़ा एम्स कैंसर सेंटर झज्जर में स्थापित किया गया है। हरियाणा को सात नए मेडिकल कॉलेज दिए गए हैं तथा सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक भी स्थापित किए गए हैं। अंबाला को भी कैंसर केयर अस्पताल तथा कैंसर के लिए अलग अस्पताल प्रदान किया गया है। इसलिए हर दृष्टि से विकास की एक नई गंगा बही है और उसे निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।
श्री नड्डा ने कहा कि आज जब हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को स्मरण करते हैं, तो हमें इस बात का गौरव होना चाहिए कि वे हमारे संस्थापक थे, जिन्होंने देश को एक दिशा दी और पार्टी को भी एक स्पष्ट दिशा प्रदान की। यह भी हमारे लिए गर्व का विषय है कि आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में न केवल पार्टी, बल्कि पूरा देश उनके बताए मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जन्म जयंती पर उन्हें यही सच्ची श्रद्धांजलि हो सकती है और उसी दिशा में प्रयास किया गया है। आज का दिन यह संकल्प लेने का है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने देशवासियों से जिस कार्य की अपेक्षा की थी और जिसके लिए उन्होंने अपना बलिदान दिया, उसे हम समर्पित भाव से अपने जीवन का संकल्प बनाएँ। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आह्वान पर आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के निर्माण में कोई कसर न छोड़ी जाए तथा अपना एक-एक पल, एक-एक दिन और एक-एक क्षण समर्पित किया जाए। यही डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

