राइजिंग नॉर्थ-ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025 का उद्घाटन
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 23 मई को नई दिल्ली के भारत मंडपम में राइजिंग नॉर्थ-ईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025 का उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों का हार्दिक स्वागत करते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र के भविष्य पर गर्व, उत्साह और अपार विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने भारत मंडपम में हाल ही में आयोजित अष्टलक्ष्मी महोत्सव का स्मरण करते हुए इस बात पर बल दिया कि आज का कार्यक्रम पूर्वोत्तर में निवेश का उत्सव है।
श्री मोदी ने दुनिया के सबसे विविधतापूर्ण राष्ट्र के रूप में भारत की स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर हमारे विविधतापूर्ण राष्ट्र का सबसे विविध क्षेत्र है। उन्होंने व्यापार, परंपरा, वस्त्र और पर्यटन में व्याप्त संभावनाओं पर बल देते हुए कहा कि इस क्षेत्र की विविधता इसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने में पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल देते हुए श्री मोदी ने पूर्वोत्तर को इसका सबसे महत्वपूर्ण घटक बताया। प्रधानमंत्री ने पिछले 11 वर्षों में पूर्वोत्तर में हुए परिवर्तनकारी बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रगति केवल आंकड़ों में नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर भी दिख रही है।
श्री मोदी ने पूर्वोत्तर में केंद्रीय मंत्रियों द्वारा की गई 700 से अधिक यात्राओं को रेखांकित किया, जो इस भूमि को समझने, लोगों की आंखों में दिखने वाली आकांक्षाओं को महसूस करने और उस विश्वास को विकास नीतियों में बदलने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पूर्वोत्तर: पिछले दशक में 11,000 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण
श्री मोदी ने पिछले दशक में 11,000 किलोमीटर राजमार्गों के निर्माण, व्यापक नई रेलवे लाइनों, हवाई अड्डों की संख्या में दोगुनी वृद्धि, ब्रह्मपुत्र और बराक नदियों पर जलमार्गों के विकास और सैकड़ों मोबाइल टावरों की स्थापना सहित प्रमुख प्रगति का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि आसियान के साथ भारत का व्यापार वर्तमान में लगभग 125 बिलियन डॉलर है और आने वाले वर्षों में इसके 200 बिलियन डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है, जिससे पूर्वोत्तर एक रणनीतिक व्यापार सेतु और आसियान बाजारों के लिए प्रवेश द्वार बन जाएगा।
श्री मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर एक समय नाकाबंदी और संघर्ष से जूझ रहा था, जिसने यहां के युवाओं के अवसरों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। उन्होंने शांति समझौतों के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले 10-11 वर्षों में 10,000 से अधिक युवाओं ने शांति को अपनाने के लिए हथियार छोड़ दिए हैं।
श्री मोदी ने कहा कि पिछले एक दशक में पूर्वोत्तर के शिक्षा क्षेत्र में 21,000 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। उन्होंने 800 से अधिक नए स्कूलों, क्षेत्र के पहले एम्स, नौ नए मेडिकल कॉलेजों और दो नए आईआईआईटी की स्थापना सहित प्रमुख विकासों का उल्लेख किया।
श्री मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर दो रणनीतिक क्षेत्रों— ऊर्जा और सेमीकंडक्टर के लिए एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभर रहा है। उन्होंने पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में जलविद्युत और सौर ऊर्जा में सरकार के व्यापक निवेश का उल्लेख किया जिसमें कई हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं पहले ही स्वीकृत हो चुकी हैं। श्री मोदी ने घोषणा की कि पूर्वोत्तर स्थित सेमीकंडक्टर प्लांट से पहली मेड इन इंडिया चिप जल्द ही पेश की जाएगी, जो इस क्षेत्र के लिए एक प्रमुख उपलब्धि है।
इस अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों के अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया, मणिपुर के राज्यपाल श्री अजय कुमार भल्ला, असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू, मेघालय के मुख्यमंत्री श्री कॉनराड के संगमा, मिजोरम के मुख्यमंत्री श्री लालदुहोमा, नागालैंड के मुख्यमंत्री श्री नेफ्यू रियो, सिक्किम के मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तमांग, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री श्री माणिक साहा, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार भी उपस्थित थे।

