18वां प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन, ओडिशा
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने नौ जनवरी को ओडिशा के भुवनेश्वर में 18वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का उद्घाटन किया। दुनिया के विभिन्न हिस्सों से आए सभी प्रतिनिधियों और प्रवासियों का स्वागत करते हुए श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में दुनिया भर में विभिन्न भारतीय प्रवासी कार्यक्रमों में यह उद्घाटन गीत बजाया जाएगा।
एक वीडियो संदेश में उत्साहपूर्ण और स्नेह से भरे शब्दों के लिए मुख्य अतिथि त्रिनिदाद और टोबैगो की राष्ट्रपति क्रिस्टीन कार्ला कंगालू को धन्यवाद देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वह भारत की प्रगति के बारे में भी चर्चा कर रही थीं और उनके शब्दों ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों पर प्रभाव डाला।
वर्ष 1915 में इसी दिन महात्मा गांधीजी लंबे समय तक विदेश में प्रवास के बाद भारत लौटे थे इसका स्मरण करते हुए श्री मोदी ने कहा कि ऐसे अद्भुत समय में भारत में प्रवासी भारतीयों की उपस्थिति ने उत्सव की भावना को और बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस का यह संस्करण एक और कारण से विशेष है। श्री मोदी ने कहा कि यह आयोजन श्री अटल बिहारी वाजपेयी की जन्म शताब्दी के कुछ दिनों बाद आयोजित किया गया, जिनकी दूरदर्शिता प्रवासी भारतीय दिवस के लिए महत्वपूर्ण थी।
उन्होंने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस भारत और उसके प्रवासियों के बीच संबंधों को प्रगाढ़ करने वाली एक संस्था बन चुकी है। श्री मोदी ने उल्लेख किया कि हम सब मिलकर भारत, भारतीयता, अपनी संस्कृति और प्रगति का उत्सव मनाते हैं और साथ ही अपनी जड़ों से जुड़ते हैं।
श्री मोदी ने कहा कि ओडिशा की महान भूमि, जहां हम एकत्र हुए हैं, भारत की समृद्ध विरासत का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा कि ओडिशा में हर कदम पर हम अपनी विरासत देख सकते हैं।
भारतीय प्रवासियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए तथा वैश्विक मंच पर उन्हें गर्व से सिर ऊंचा करने का अवसर प्रदान करने के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए श्री मोदी ने कहा कि पिछले दशक में उन्होंने अनेक वैश्विक प्रमुखों से भेंट की, जिनमें से सभी ने भारतीय प्रवासियों की उनके सामाजिक मूल्यों तथा अपने-अपने समाजों में योगदान के लिए प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत न केवल लोकतंत्र की जननी है, बल्कि लोकतंत्र भारतीय जीवन का अभिन्न अंग है।
21वीं सदी के भारत में विकास की असाधारण गति और व्यापकता का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि मात्र 10 वर्षों में भारत ने 250 मिलियन लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है और दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत शीघ्र ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
चंद्रयान मिशन का शिव-शक्ति बिंदु तक पहुंचना और डिजिटल इंडिया की ताकत की वैश्विक मान्यता जैसी भारत की उपलब्धियों पर जोर देते हुए श्री मोदी ने कहा कि भारत में हर क्षेत्र नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है। अक्षय ऊर्जा, विमानन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, मेट्रो नेटवर्क और बुलेट ट्रेन परियोजनाओं में रिकॉर्ड तोड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत अब ‘मेड इन इंडिया’ लड़ाकू जेट और परिवहन विमान बना रहा है। श्री मोदी ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की, जहां लोग ‘मेड इन इंडिया’ विमानों में प्रवासी भारतीय दिवस के लिए भारत की यात्रा करेंगे।
गिरमिटिया विरासत का अध्ययन
प्रधानमंत्री ने गिरमिटिया विरासत का अध्ययन और शोध करने के महत्व का उल्लेख किया और इस उद्देश्य के लिए एक विश्वविद्यालय पीठ की स्थापना का प्रस्ताव रखा। श्री मोदी ने नियमित रूप से विश्व गिरमिटिया सम्मेलन आयोजित करने का भी आग्रह किया और अपनी टीम को इन संभावनाओं का पता लगाने और इन पहलों को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति, ओडिशा के मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण मांझी, केंद्रीय मंत्री श्री एस. जयशंकर, श्री अश्विनी वैष्णव, श्री धर्मेंद्र प्रधान, केंद्रीय राज्य मंत्री श्री जुएल ओराम और कार्यक्रम में अन्य गणमान्य व्यक्तियों में सुश्री शोभा करंदलाजे, श्री कीर्ति वर्धन सिंह और श्री पबित्रा मार्गेरिटा उपस्थित थे।

