भारत के बंदरगाह लाजिस्टिक नोड्स की पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर वाणिज्य के आधुनिक प्रवेश द्वार बन रहे हैं। क्षमता विस्तार, मशीनीकरण, डिजिटलीकरण और व्यापार सुगमता पर ध्यान केंद्रित करने से विशाखापत्तनम, मुंद्रा, जेएनपीए और कामराजर जैसे बंदरगाह वैश्विक रैंकिंग में ऊपर पहुंच गए हैं।
विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) 2023 ने भारत की दक्षता को मान्यता देते हुए इसे कई विकसित देशों से आगे रखा है। देश ने प्रमुख लॉजिस्टिक्स संकेतकों में सुधार किया है और 2023 में 139 देशों में हम 38वें स्थान पर है, जबकि 2014 में भारत 54वें स्थान पर था। इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट श्रेणी में भारत की रैंकिंग में भी काफी सुधार हुआ है और हम 44वें से 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि औसत कंटेनर ठहराव समय घटकर लगभग 2.6 दिन रह गया है, जो वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी आंकड़ा है। प्रमुख बंदरगाहों का टर्नअराउंड समय (टीआरटी) भी लगभग 94 घंटों से घटकर लगभग 48.06 घंटे रह गया है।
इस प्रगति का आधार पर्याप्त बुनियादी ढांचे का विकास है। पिछले एक दशक में हमारे प्रमुख बंदरगाहों की कार्गो हैंडलिंग क्षमता 800.5 मिलियन टन प्रति वर्ष से बढ़कर 1,681 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) हो गई है। अब तक कुल 32,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 98 बंदरगाह आधुनिकीकरण परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिससे बंदरगाहों की वार्षिक क्षमता में 230 मिलियन टन प्रति वर्ष से अधिक की वृद्धि हुई है।
प्रमुख बंदरगाहों का वित्तीय प्रदर्शन भी उतना ही प्रभावशाली रहा है, कुल आय वित्त वर्ष 2015 के 11,760 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 24,203 करोड़ रुपये हो गई— जो 10 वर्षों में 7.5 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) है। इसी अवधि में 13 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से परिचालन अधिशेष लगभग तीन गुना बढ़कर 12,314 करोड़ रुपये हो गया।
विश्व बैंक के लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) 2023 ने भारत की दक्षता को मान्यता देते हुए इसे कई विकसित देशों से आगे रखा है। देश ने प्रमुख लॉजिस्टिक्स संकेतकों में सुधार किया है और 2023 में 139 देशों में हम 38वें स्थान पर है, जबकि 2014 में भारत 54वें स्थान पर था। इस अवधि में अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट श्रेणी में भारत की रैंकिंग में भी काफी सुधार हुआ है और हम 44वें से 22वें स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि औसत कंटेनर ठहराव समय घटकर लगभग 2.6 दिन रह गया है, जो वैश्विक स्तर पर एक प्रतिस्पर्धी आंकड़ा है। प्रमुख बंदरगाहों का टर्नअराउंड समय (टीआरटी) भी लगभग 94 घंटों से घटकर लगभग 48.06 घंटे रह गया है
परिचालन दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, परिचालन अनुपात वित्त वर्ष 2015 के 64.7 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2025 में 42.3 प्रतिशत हो गया, जिससे बंदरगाहों की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।
तूतीकोरिन अंतरराष्ट्रीय कंटेनर टर्मिनल (टीआईसीटी) जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं और 76,000 करोड़ रुपये के वधावन बंदरगाह का शिलान्यास, बुनियादी ढांचे और रसद दक्षता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण मील के पत्थर हैं। हमारा विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह भारत की ट्रांस-शिपमेंट क्षमताओं को बढ़ावा देगा।
विश्व बैंक की सीपीपीआई 2023 रिपोर्ट में दस भारतीय बंदरगाह अब ग्लोबल टॉप 100 में जगह बना चुके हैं, विशाखापत्तनम पोर्ट 2022 में 122वें स्थान से बढ़कर 19वें स्थान पर पहुंच गया है। भारत आधुनिक लॉजिस्टिक्स के लिए अपनी नदियों की क्षमता, जो कभी वाणिज्य की जीवंत धमनियां थीं, पुनः प्राप्त कर रहा है। एनडीए सरकार के तहत गंगा और ब्रह्मपुत्र सहित 106 नदियों को राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में उन्नत किया गया है। इससे अंतर्देशीय जलमार्ग आधारित माल ढुलाई में सात गुना वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2014 में 18.1 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) से वित्त वर्ष 2025 में 146 एमएमटी हो गई है। यह क्षेत्र अब मल्टीमॉडल टर्मिनलों, रात्रि नेविगेशन और डिजिटल निगरानी प्रणालियों से सुसज्जित है।
इस पुनरुद्धार की ओर वैश्विक ध्यान आकर्षित हुआ है, जिनके सहयोग से प्रौद्योगिकी में वृद्धि हुई है तथा टिकाऊ माल ढुलाई को बढ़ावा मिला है। वित्त वर्ष 2026 के लिए 1,700 करोड़ रुपये का व्यय का लक्ष्य रखा गया है, जो 1986 से 2014 तक यानी 28 वर्षों के दौरान अंतर्देशीय जलमार्गों पर किये गये कुल व्यय से अधिक है।
अंतर्देशीय जलमार्गों के उपयोग के लिए 35 प्रतिशत प्रोत्साहन प्रदान करने वाली कार्गो प्रमोशन योजना इस वृद्धि को और बढ़ावा देती है। अंतर्देशीय जलमार्ग विकास परिषद् (आईडब्ल्यूडीसी) की पहली बैठक में 2047 तक नदी-परिभ्रमण पर्यटन विकास के लिए 45,000 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।
क्रूज़ पर्यटन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, क्योंकि प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब मुंबई, कोच्चि, गोवा और विशाखापत्तनम जैसे भारतीय बंदरगाहों पर डॉक कर रही हैं। सितंबर, 2024 में ‘क्रूज़ भारत मिशन’ की शुरुआत की गयी, जिसका लक्ष्य 2029 तक क्रूज़ यात्रियों की संख्या को दोगुना करना है, जिसमें छह नए अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनलों को स्थापित करने की योजना है। समुद्री क्रूज़ यात्रियों की संख्या 2014 के 84,000 से बढ़कर 2024-25 में 4.92 लाख हो गई, जो 500 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है।
समुद्री क्षेत्र में स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता अग्रणी हरित पहलों के माध्यम से स्पष्ट है। हरित सागर हरित बंदरगाह दिशानिर्देशों का उद्देश्य कार्बन उत्सर्जन को कम करना है, और ग्रीन टग ट्रांज़िशन प्रोग्राम (जीटीटीपी) का लक्ष्य 2030 तक प्रमुख बंदरगाहों के जहाजों से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 30 प्रतिशत की कमी लाना है, जो कि समुद्री अमृत काल विज़न 2047 के अनुरूप है। राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत तीन प्रमुख बंदरगाहों को हरित हाइड्रोजन या अमोनिया हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। हरित नौका दिशानिर्देश 2047 तक 100 प्रतिशत हरित जहाजों को बढ़ावा देते हैं और भारत ने अपना पहला स्वदेशी हाइड्रोजन ईंधन सेल पोत भी लॉन्च किया है।
भारत को 2024-25 की द्विवार्षिक अवधि के लिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की परिषद् में सर्वोच्च मतों के साथ पुनः निर्वाचित किया गया है। सहयोग के नए मार्ग प्रशस्त हो रहे हैं, विशेष रूप से भारत-मध्य पूर्व यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के लिए संयुक्त अरब अमीरात के साथ अंतर-सरकारी ढांचा समझौते पर हस्ताक्षर ने इसे नई गति दी है। ईरान के साथ शाहिद बेहेश्टी बंदरगाह टर्मिनल, चाबहार के विकास के लिए हस्ताक्षरित दीर्घकालिक अनुबंध, मध्य एशिया के लिए अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) को खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बुनियादी ढांचे के अलावा, मानव पूंजी और विरासत भी प्रमुख फोकस क्षेत्र हैं। पिछले दशक में वैश्विक समुद्री समुदाय में भारत की उपस्थिति में 200 प्रतिशत की आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है, जिससे सक्रिय भारतीय नाविकों की संख्या 2014 में 1.08 लाख से बढ़कर इस वर्ष 3.20 लाख हो गई है। महिला नाविकों की संख्या 2014 में 341 से बढ़कर 2025 में 2,557 हो गई है। पत्तन, पोत परिवहन और
क्रूज़ पर्यटन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है, क्योंकि प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब मुंबई, कोच्चि, गोवा और विशाखापत्तनम जैसे भारतीय बंदरगाहों पर डॉक कर रही हैं। सितंबर, 2024 में ‘क्रूज़ भारत मिशन’ की शुरुआत की गयी, जिसका लक्ष्य 2029 तक क्रूज़ यात्रियों की संख्या को दोगुना करना है, जिसमें छह नए अंतरराष्ट्रीय क्रूज़ टर्मिनलों को स्थापित करने की योजना है। समुद्री क्रूज़ यात्रियों की संख्या 2014 के 84,000 से बढ़कर 2024-25 में 4.92 लाख हो गई, जो 500 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाता है
जलमार्ग मंत्रालय ने समुद्री क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए सागर में सम्मान योजना भी शुरू की है।
गुजरात के लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को विश्व स्तरीय समुद्री संग्रहालय एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करना और साथ ही प्रथम भारत समुद्री विरासत सम्मेलन का आयोजन, भारत के समृद्ध समुद्री इतिहास को संरक्षित करने और प्रदर्शित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
वित्त वर्ष 2026 के बजट में जहाज निर्माण और जहाज पुनर्चक्रण के लिए वित्तीय प्रोत्साहनों की एक शृंखला की घोषणा की गई, जिसमें समुद्री विकास निधि, जहाज निर्माण वित्तीय सहायता नीति 2.0, इंफ्रास्ट्रक्चर हार्मोनाइज्ड मास्टर सूची में निर्दिष्ट आकार से बड़े बड़े जहाजों को शामिल करना, जहाज निर्माण समूहों को सुविधाजनक बनाने के उपाय, अंतर्देशीय जहाजों के लिए टन भार कर व्यवस्था का विस्तार, जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत के लिए कच्चे माल और घटकों पर बुनियादी सीमा शुल्क छूट का अगले 10 वर्षों के लिए विस्तार शामिल है।
इन पहलों ने प्रमुख वैश्विक जहाज निर्माण कंपनियों को भारतीय शिपिंग कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए आकर्षित करना शुरू कर दिया है। इससे रोजगार के व्यापक अवसर और निवेश में वृद्धि होना निश्चित है।
संक्षेप में, पिछले दशक ने भारत की समुद्री यात्रा में एक निर्णायक बदलाव का संकेत दिया है। भारत तेज़ी से व्यापार, नवाचार और निवेश के लिए एक पसंदीदा समुद्री गंतव्य के रूप में उभर रहा है, क्योंकि यह विकसित और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
(लेखक केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री हैं)

