रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की कर्ज होंगे सस्ते

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भारतीय रिजर्व बैंक ने 2 अगस्त को नई रेपो रेट दर की घोषणा करते हुए रेपो रेट में 0.25 बेसिस पाइंट की कमी कर दी। दरअसल, थोक व खुदरा महंगाई दर में कमी के कारण िरजर्व बैंक पर रेपो रेट में कमी करने का दबाव बढ़ गया था। अब रेपो रेट 6.25 फीसदी से घटकर 6 फीसदी हो गया है, वहीं रिवर्स रेपो रेट 5.75 फीसदी हो गया है।

गौरतलब है कि रेपो रेट कम होने से देश की अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी क्योंकि मौजूदा समय में महंगाई दर नियंत्रण में है। यही नहीं, रेपो रेट कम होने से ऑटो और होमलोन सेक्टर को फायदा होगा, क्योंकि कर्ज सस्ता होने के बाद लोग ज्यादा संख्या में घर एवं कार खरीदना पसंद करेंगे।

रिज़र्व बैंक ने अपने मौद्रिक नीति वक्तव्य में कहा कि खाद्य और पेय पदार्थों की कीमत, जो नई सीपीआई शृंखला में पहली बार मई 2017 में अपस्फीति में आई, जून में दालों, सब्जियों, मसाले और अंडों की कीमतों में साल दर साल गिरावट दर्ज की गई और ज्यादातर अन्य उप-समूहों में मुद्रास्फीति कम हो गई।

रिज़र्व बैंक ने अपने वक्तव्य में कहा कि घरेलू मोर्चे पर लगातार दूसरे वर्ष दक्षिण-पश्चिमी मानसून के सामान्य और सही वितरण से कृषि तथा संबद्ध गतिविधियों और ग्रामीण मांग की संभावनाएं उज्ज्वल हुई हैं। 1 अगस्त तक, दीर्घावधि औसत (एलपीए) से 1 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई और देश के भौगोलिक क्षेत्र के 84 प्रतिशत हिस्से में अधिक से सामान्य बारिश हुई है। खरीफ की बुआई पिछले वर्ष की तुलना में अधिक तेज गति से हुई है जहां गन्ने, पटसन और सोयाबीन की पूरे मौसम की बुआई पूरी हो चुकी है।

रिज़र्व बैंक ने कहा कि कपास और मोटे अनाज की बुआई पिछले वर्ष के स्तर से अधिक हुई है किंतु तिलहन की बुआई पिछड़ी हुई है। कुल मिलाकर, इन गतिविधियों से वर्ष 2017-18 के लिए फसल उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी, जिन्हें कृषि मंत्रालय द्वारा पिछले वर्ष में हासिल शीर्ष स्तर की अपेक्षा उच्चतर स्तर पर निर्धारित किया है।

इसी बीच रबी विपणन मौसम के दौरान चावल और गेहूं के संबंध में खरीद परिचालन रिकार्ड स्तर तक बढ़ गए हैं, जो अप्रैल-जून 2017 में 36.1 मिलियन टन थे और स्टॉक सितंबर को समाप्त होने वाली तिमाही के लिए बढ़कर बफर मानदंड के 1.5 गुणा हो गए हैं।