प्रधानमंत्री का लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का उत्तर
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चार फरवरी को लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब दिया। सदन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने चर्चा में भाग लेने वाले सभी माननीय सांसदों के योगदान की सराहना की और कहा कि लोकतंत्र की परंपरा में जहां आवश्यक हो वहां प्रशंसा और जहां आवश्यक हो वहां कुछ नकारात्मक टिप्पणियां दोनों ही शामिल हैं, जो स्वाभाविक है। यहां प्रस्तुत है श्री मोदी के संबोधन की मुख्य बातें:
आदरणीय राष्ट्रपति जी का यह उद्बोधन ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मजबूती देने वाला है, नया विश्वास पैदा करने वाला है और जन सामान्य को प्रेरित करने वाला है।
गत 10 वर्ष में देश की जनता ने हमें सेवा करने का मौका दिया। 25 करोड़ देशवासी गरीबी को परास्त कर इससे बाहर निकले हैं।
अब तक गरीबों को 4 करोड़ घर मिले हैं। जिसने उस जिंदगी को जिया है ना, उसे समझ होती है कि पक्की छत वाला घर मिलने का मतलब क्या होता है।
हमने 12 करोड़ से ज्यादा शौचालय बनाकर बहनों-बेटियों की मुश्किलें दूर की हैं।
आजादी के 75 साल के बाद देश में 70-75% करीब-करीब 16 करोड़ से भी ज्यादा घरों के पास जल के लिए, नल का कलेक्शन नहीं था। हमारी सरकार ने 5 साल में 12 करोड़ परिवारों को घरों में नल से जल देने का काम किया है।
हमारा मॉडल है ‘बचत भी विकास भी’ जनता का पैसा जनता के लिए
हमारा मॉडल है ‘बचत भी विकास भी’, जनता का पैसा जनता के लिए। हमने जनधन आधार मोबाइल की जेम ट्रिनिटी बनाई और डीबीटी से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर देना शुरू किया। हमारे कार्यकाल में हमने 40 लाख करोड़ रुपया सीधा जनता जनार्दन के खाते में जमा किया।
इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट 10 साल पहले 1,80,000 करोड़ रुपए था। आज 11 लाख करोड़ रुपया इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट है।
आयुष्मान भारत योजना ने लोगों के लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपए बचाए हैं।
यूनिसेफ का भी अनुमान है कि जिसके घर में स्वच्छता और टॉयलेट बना है, उस परिवार को करीब-करीब साल भर में 70,000 रुपये की बचत हुई है।
WHO की एक रिपोर्ट आई है, WHO का कहना है की नल से जल शुद्ध पानी मिलने के कारण उन परिवारों में जो अन्य बीमारियों के खर्चे होते थे, औसत 40,000 रुपया बचा है।
पीएम सूर्यगढ़ मुफ्त बिजली योजना ने परिवारों की बिजली खर्च पर सालाना औसतन 25,000 रुपए से 30,000 रुपए की बचत की है।
जिन किसानों ने सॉइल हेल्थ कार्ड का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग किया है, उनको बहुत फायदा हुआ है और ऐसे किसानों को प्रति एकड़ 30,000 रुपये की बचत हुई है।
मध्यम वर्ग की बचत में वृद्धि
पिछले दस वर्षों में सरकार ने आयकर की दरों को कम किया है, जिससे मध्यम वर्ग की बचत में वृद्धि हुई है।
2013-14 में केवल 2 लाख रुपये आयकर से मुक्त थे, जबकि आज 12 लाख रुपये पूरी तरह से आयकर से मुक्त हैं।
2014, 2017, 2019 और 2023 के दौरान सरकार ने लगातार राहत प्रदान करने पर काम किया है और 75,000 रुपये की मानक कटौती के साथ वेतनभोगी व्यक्तियों को 1 अप्रैल से 12.75 लाख रुपये तक की आय पर कोई आयकर नहीं देना होगा।
भारत के एआई मिशन ने वैश्विक आशावाद पैदा किया है और विश्व एआई मंच पर भारत की उपस्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।
जब सत्ता सेवा बन जाए, तो राष्ट्र निर्माण होता है। जब सत्ता को विरासत बना दिया जाए, तब लोकतंत्र खत्म हो जाता है।
हम संविधान की भावना को लेकर के चलते हैं। हम जहर की राजनीति नहीं करते। हम देश की एकता को सर्वोपरि रखते हैं और इसलिए सरदार वल्लभभाई पटेल का दुनिया का सबसे ऊंचा स्टैच्यू बनाते हैं और देश को जोड़ने का जिस महापुरुष ने काम किया, उसका हम स्मरण करते हैं और वो भाजपा के नहीं थे, वो जनसंघ के नहीं थे। हम संविधान को जीते हैं, इसलिए इस सोच से आगे बढ़ते हैं।
हम संविधान की भावना को जीते हैं
सात दशक तक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को संविधान के अधिकारों से वंचित रखा गया। यह संविधान के साथ भी अन्याय था और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के साथ भी अन्याय था। हमने आर्टिकल 370 की दीवार गिरा दी, अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को; देशवासियों को जो अधिकार हैं, वो अधिकार उनको मिल रहे हैं और संविधान का महात्मय हम जानते हैं, संविधान की भावना को जीते हैं, इसलिए ऐसे मजबूत निर्णय भी हम करते हैं।
पिछले 30 साल से सदन में आने वाले ओबीसी समाज के सांसद, दलों के भेदभाव से ऊपर उठकर के एक हो करके 30-35 साल से मांग कर रहे थे कि ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा दिया जाए। जिन लोगों को आज जातिवाद में मलाई दिखती है, उनको उस समय ओबीसी समाज की याद नहीं आई, यह हम हैं जिन्होंने ओबीसी समाज को संवैधानिक दर्जा दिया। पिछड़ा वर्ग आयोग आज संवैधानिक व्यवस्था में जुड़ा है।
2014 से पहले हमारे देश में मेडिकल कॉलेज की संख्या 387 थी। आज 780 मेडिकल कॉलेज हैं। अब मेडिकल कॉलेज बढ़े हैं तो सीटें भी बढ़ी हैं।
2014 से पहले हमारे देश में एससी छात्रों की एमबीबीएस की सीट 7700 थी। हमारे आने से पहले दलित समाज के हमारे 7700 युवा डॉक्टर बनने की संभावना थी। 10 साल हमने काम किया, आज संख्या बढ़कर एससी समाज के 17,000 एमबीबीएस डॉक्टर की व्यवस्था की है।
2014 के पहले एसटी छात्रों के लिए एमबीबीएस की सीटें 3800 थीं। आज यह संख्या बढ़कर लगभग 9,000 हो गई है। 2014 के पहले ओबीसी के छात्रों के लिए एमबीबीएस में 14,000 से भी कम सीटें थी। आज इनकी संख्या लगभग 32,000 हो गई है। ओबीसी समाज के 32,000 एमबीबीएस डॉक्टर बनेंगे।
आज आयुष्मान से देश के 30,000 अस्पताल जुड़े हैं और अच्छे स्पेशलाइज्ड प्राइवेट अस्पताल जुड़े हैं। जहां आयुष्मान कार्ड वाले को मुफ्त इलाज मिलता है।
इस बजट में भी हमने कैंसर की दवाइयों को सस्ती करने की दिशा में बहुत बड़ा महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
वीमेन लेड डेवलपमेंट
आज भारत ‘वीमेन लेड डेवलपमेंट’ के मंत्र को लेकर के आगे बढ़ रहा है। अगर आधी आबादी को पूरा अवसर मिले, तो भारत दो गुनी रफ्तार से आगे बढ़ सकता है।
पिछले 10 साल में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स में अब तक 10 करोड़ नई महिलाएं जुड़ी हैं और ये महिलाएं वंचित परिवारों से हैं, ग्रामीण बैकग्राउंड से हैं। समाज के अंतिम पायदान पर बैठी इन महिलाओं का सामर्थ्य बढ़ा, उनका सामाजिक स्तर भी ऊपर उठा और सरकार ने इनकी मदद 20 लाख रुपए तक बढ़ा दी है, ताकि वो इस काम को आगे बढ़ा सकें।
‘विकसित भारत’ के 4 स्तंभों में हमारा किसान एक मजबूत स्तंभ है। बीते दशक में खेती के बजट में 10 गुना वृद्धि की गई है।
आज भारत सरकार को जो बोरा यूरिया का 3,000 रुपये में पड़ता है, सरकार ने बोझ झेला और किसान को 300 रुपये से भी कम कीमत पर दिया है।
सस्ती खाद हेतु पिछले 10 साल में 12 लाख करोड़ रुपया खर्च
किसानों को सस्ती खाद मिले इस एक काम के लिए पिछले 10 साल में 12 लाख करोड़ रुपया खर्च किया गया है। पीएम किसान सम्मान निधि, उससे करीब साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए डायरेक्ट किसान के खाते में पहुंचे हैं। हमने रिकॉर्ड एमएसपी भी बढ़ाया और पहले की तुलना में बीते दशक में तीन गुना अधिक खरीदी की है।
किसान को ऋण मिले, आसान ऋण मिले, सस्ता ऋण मिले, उसमें भी तीन गुना वृद्धि की गई है। पहले प्राकृतिक आपदा में किसान को अपने हाल पर छोड़ दिया जाता था। हमारे सेवाकाल के दौरान पीएम फसल बीमा के तहत 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को मिले हैं।
मिशन मैन्युफैक्चरिंग पर बल
इस बार हमने मिशन मैन्युफैक्चरिंग पर बल दिया है और एक मिशन मोड में हम मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर; मतलब की MSMEs को बल देना और MSMEs के माध्यम से अनेक नौजवानों को रोजगार देना और स्किल डेवलपमेंट से रोजगार के लिए नौजवानों को तैयार करना, ऐसे पूरे इकोसिस्टम को हम बल देते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
2014 के पहले खिलौने जैसे चीजें हम इंपोर्ट करते थे, आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि मेरे देश के खिलौने बनाने वाले छोटे उद्योग, आज दुनिया के अंदर खिलौने एक्सपोर्ट हो रहे हैं और आयात में बहुत बड़ी गिरावट आई है। निर्यात में करीब 239 परसेंट वृद्धि हुई है।
‘विकसित भारत’ के सपने को पूरा करने के लिए देश आगे बढ़ रहा है और बड़े आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। विकसित भारत का सपना, यह कोई सरकारी सपना नहीं होता है। वो 140 करोड़ देशवासियों का सपना है।

