उदय में भाग लेने वाले राज्यों ने अपने डिस्कॉम का 2.09 लाख करोड़ रुपये का ऋण अधिगृहित किया

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उज्ज्वल डिस्कॉम बीमा योजना (उदय) नवंबर, 2015 में शुरू की गई थी और इसने अपनी शुरुआत का एक वर्ष से अधिक समय पूरा कर लिया है। उदय में भाग लेने वाले राज्यों ने 2015-2016 तथा 2016-2017 वर्षों के लिए उदय में दिए एफआरबीएम अधिनियम में उधारी में छूट के अंतर्गत अपने डिस्कॉम्स का 2.09 लाख करोड़ का लक्षित ऋण अपने हाथ में ले लिया है।

लक्षित ऋणों को अपने हाथ में लेने तथा उन्हें एसडीएल बॉन्ड जारी करने की राज्यों की प्रक्रिया अब पूरी हो चुकी है। अब भागीदार डिस्कॉम्स को लगभग 37 हजार करोड़ रुपये के बांड जारी करने हैं, जो यथा समय कर दिए जाएंगे। डिस्कॉम का बाकी ऋण कैपेक्स ऋण के रूप में है, जो स्वयं भुगतान करता है अथवा स्कीम आधारित ऋण, जो पूर्णतः या आंशिक रूप से अनुदान में परिवर्तित होता है। अतः राज्यों को उन्हें अधिगृहीत करने की आवश्यकता नहीं है।

ऊपर बताए गए ऋण तथा अन्य परिचालनिक हस्तक्षेपों के परिणामस्वरूप भागीदार डिस्कॉम्स ने मार्च 2017 तक लगभग 15 हजार करोड़ रुपये की शुद्ध बचत हासिल की है। इसके अलावा भागीदार राज्यों में आपूर्ति की औसत लागत (एसीएस)–औसत राजस्व जारी (एआरआर) का अंतर प्रति यूनिट करीब 14 पैसे कम हो गया है तथा वित्त वर्ष 2017 में एटी एंड सी के घाटे में तकरीबन 1 प्रतिशत की कमी आई है।

उदय योजना के प्रावधानों के अनुसार राज्य अब डिस्कॉम के घाटों का अधिग्रहण ग्रेडेड तरीके से शुरू करेंगे, जिसकी शुरूआत चालू वित्त वर्ष से वित्त वर्ष 2017 के घाटे के 5 प्रतिशत अधिग्रहण से होगी। केन्द्र, राज्यों तथा डिस्कॉम द्वारा सहकारिता तथा प्रतिस्पर्धात्मक संघवाद की भावना से किए गए सतत, समेकित तथा सहक्रियात्मक प्रयास से वित्त वर्ष 2019 तक वितरण क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाने में मदद मिलेगी।