भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती (जनजातीय गौरव दिवस) पर विशेष लेख
प्राचीन भारत में जनजातीय समाज सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण अंग था। स्वतंत्रता के पश्चात् पूर्ववर्ती सरकारों की भेदभावपरक नीतियों की वजह से देश की तरक्की को गति देने वाला यह वर्ग विकास की मुख्यधारा में अलग-थलग पड़ता गया। केंद्र में श्रद्धेय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने सर्वप्रथम जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन कर इस वर्ग के समावेशी विकास को प्राथमिकता दी। जनजातीय समाज के उत्थान की इस यात्रा को गति देते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकास का एक ऐसा सर्वस्पर्शी मॉडल देश को दिया है, जिसमें वनों और दूरस्थ अंचलों में निवास करने वाली विभिन्न जातियां राष्ट्र की तरक्की में न सिर्फ भागीदार बन रही हैं, बल्कि नेतृत्व के नये सोपान गढ़ रही हैं।
हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय गौरव के प्रतीक भगवान बिरसा मुण्डा जी की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मान्यता दी। आज जनजातीय समाज की बेटी श्रीमती द्रोपदी मुर्मु राष्ट्रपति के पद पर विराजमान है। यह भाजपा और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि से संभव हुआ है।
प्रधानमंत्री बनने के बाद सेंट्रल हॉल में दिए गए पहले भाषण में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि उनकी सरकार वंचित, गरीब और आदिवासियों के कल्याण के लिए समर्पित होगी। छत्तीसगढ़ समेत देश के आदिवासी समाज के बीच सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के रूप में इसे परिलक्षित होते देखा जा सकता है। छत्तीसगढ़ की 32 प्रतिशत आबादी जनजातीय समाज के हैं। अंत्योदय आधारित हमारी नीतियों में आदिवासी समाज का उत्थान पहली प्राथमिकता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आदिवासी विकास के लिए पीएम जनमन योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य है शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और बुनियादी सुविधाओं को आदिवासी इलाकों तक तेजी से पहुंचाना।
पीएम जनमन योजना के तहत राज्य के 18 जिलों के 2121 ग्रामों की 2 हजार 160 बसाहटों में 59 हजार 758 विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के परिवारों को लाभान्वित किया गया है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत देश में 4781 किलोमीटर लंबाई की सड़कें स्वीकृत की गई हैं, जिनमें 2 हजार 449 किलोमीटर
प्रधानमंत्री बनने के बाद सेंट्रल हॉल में दिए गए पहले भाषण में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि उनकी सरकार वंचित, गरीब और आदिवासियों के कल्याण के लिए समर्पित होगी। छत्तीसगढ़ समेत देश के आदिवासी समाज के बीच सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के रूप में इसे परिलक्षित होते देखा जा सकता है। छत्तीसगढ़ की 32 प्रतिशत आबादी जनजातीय समाज के हैं। अंत्योदय आधारित हमारी नीतियों में आदिवासी समाज का उत्थान पहली प्राथमिकता है
की सड़कें अकेले छत्तीसगढ़ में ही हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान अंतर्गत राज्य के 32 जिलों के 6 हजार 691 अनुसूचित जनजाति बाहुल्य ग्रामों को लाभान्वित किया जा रहा है। आदि कर्मयोगी अभियान में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर रहा। 128 विकास खंडों के 6,650 गांवों में 1.33 लाख वालेंटियरों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। यह अभियान जनजातीय समुदायों में उत्तरदायी शासन और आत्मनिर्भरता की भावना को सशक्त कर रहा है।
बस्तर, सरगुजा, मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास, अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरणों का पुनर्गठन किया है। इन पांचों प्राधिकरणों में जनप्रतिनिधित्व को और मजबूती दी गई है।
छत्तीसगढ़ अपने स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। यह हमारा सौभाग्य है कि महोत्सव के शुभारंभ के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी स्वयं उपस्थित रहे। उन्होंने नवा रायपुर अटल नगर के आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के विद्रोहों पर बने शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-संग्रहालय का लोकार्पण किया। यह संग्रहालय जनजातीय गौरव एवं संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का सेतू बनेगा।
तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक दर 4000 रुपए प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर अब 5500 रुपए प्रति मानक बोरा किया गया है। 13 लाख तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। चरण पादुका योजना को पुनः शुरू किया गया। नई दिल्ली के ट्रायबल यूथ हॉस्टल में सीटों की संख्या 50 से बढ़ाकर अब 185 कर दी गई है। नई दिल्ली में रहकर संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा की तैयारी करने के इच्छुक अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अब इस हॉस्टल में तीन गुने से भी अधिक सीटें उपलब्ध हैं। हमारी सरकार बैगा, गुनिया को सालाना 5-5 हजार रुपए की सम्मान निधि दे रही है। जनजातीय गांवों में अखरा निर्माण विकास योजना शुरू की गई।
छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में माओवाद आतंक ने विकास को लम्बे अरसे तक बाधित रखा है। इसका सबसे अधिक दंश जनजातीय समाज को झेलना पड़ा है। आज जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश माओवाद आतंक से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है, तो जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से विकास का नया सूर्याेदय भी देखने को मिल रहा है
जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित की जा रही है।
छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में माओवाद आतंक ने विकास को लम्बे अरसे तक बाधित रखा है। इसका सबसे अधिक दंश जनजातीय समाज को झेलना पड़ा है। आज जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के नेतृत्व में देश माओवाद आतंक से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है, तो जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से विकास का नया सूर्याेदय भी देखने को मिल रहा है। बस्तर की ही बात करें तो यहां बस्तर पंडुम तथा बस्तर आलेम्पिक जैसे आयोजनों ने जनजातीय समाज में छिपी प्रतिभा और हुनर को दुनिया के सामने लाने का काम किया है।
हम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए विकसित छत्तीसगढ़ के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं। इस यात्रा में जनजातीय समाज की सबसे अग्रणी भूमिका होगी। जनजातीय समाज की सम्पन्न विरासत, समृद्ध संस्कृति एवं पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली हमारे देश एवं प्रदेश के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण घटक बनेगा।
(लेखक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री हैं)

