एमएसएमई क्षेत्र भारत के विनिर्माण और औद्योगिक विकास का आधार है: प्रधानमंत्री

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बजट पश्चात् वेबिनार: विनिर्माण और निर्यात

केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर 40,000 से अधिक अनुपालन समाप्त किए गए, जिससे व्‍यापार करने में आसानी हुई

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने चार मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बजट पश्चात् वेबिनार को संबोधित किया। ये वेबिनार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को विकास का इंजन बनाने, विनिर्माण, निर्यात और परमाणु ऊर्जा मिशन, विनियामक, निवेश और व्यापार करने में आसानी जैसे विषयों पर आयोजित किए गए। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विनिर्माण और निर्यात पर बजट पश्चात वेबिनार बहुत महत्वपूर्ण हैं।

श्री मोदी ने कहा कि देश में एक दशक से भी अधिक समय से सरकारी नीतियों में निरंतरता देखने को मिली हैं और पिछले 10 वर्षों में देश ने सुधारों, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निरंतरता और सुधारों के आश्वासन ने उद्योग जगत में नया आत्मविश्वास आया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थिर नीति और बेहतर कारोबारी वातावरण किसी भी देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले सरकार ने ‘जन विश्वास अधिनियम’ पेश किया था और अनुपालन कम करने के प्रयास किए थे। श्री मोदी ने कहा कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर 40,000 से अधिक अनुपालन समाप्त किए गए, जिससे व्‍यापार करने में आसानी हुई। इस प्रकिया को जारी रखने पर जोर देते हुए उन्होंने उल्लेख किया कि सरकार ने आयकर के सरल प्रावधान पेश किए हैं और जन विश्वास 2.0 विधेयक पर काम जारी है।

श्री मोदी ने कहा, “वर्तमान में दुनिया राजनीतिक अनिश्चितता का सामना कर रही है और पूरी दुनिया भारत को विकास केंद्र के रूप में देख रही है।” प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्तमान में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना से 14 क्षेत्र लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना के अंतर्गत 750 से अधिक इकाइयों को मंजूरी दी गई है, जिसके परिणामस्वरूप 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक का उत्पादन और 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात हुआ है।

6 करोड़ से अधिक एमएसएमई

श्री मोदी ने कहा, “एमएसएमई क्षेत्र भारत के विनिर्माण और औद्योगिक विकास का आधार है।” उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि वर्ष 2020 में सरकार ने 14 वर्षों के बाद एमएसएमई की परिभाषा को संशोधित करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया, जिससे एमएसएमई का यह भय समाप्‍त हो गया कि यदि वे अपने क्षेत्र का विस्‍तार करेंगे तो सरकारी लाभ खो देंगे। उन्होंने कहा कि देश में एमएसएमई की संख्या बढ़कर 6 करोड़ से अधिक हो गई है, जिससे करोड़ों लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं।

श्री मोदी ने कहा कि दस साल पहले एमएसएमई को लगभग 12 लाख करोड़ रुपये का ऋण मिला था, जो अब बढ़कर लगभग 30 लाख करोड़ रुपये हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बजट में एमएसएमई ऋणों के लिए गारंटी कवर को दोगुना करके 20 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, कार्यशील पूंजी की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए 5 लाख रुपये की सीमा वाले कस्टमाइज्ड क्रेडिट कार्ड प्रदान किए जाएंगे।

उन्होंने घोषणा की पहली बार उद्योग स्‍थापित करने वाली महिलाओं, अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदायों के पांच लाख उद्यमियों को 2 करोड़ रुपए का ऋण मिलेगा।

मुख्य बातें

 पिछले 10 वर्षों में भारत ने सुधार, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और समावेशी विकास के प्रति अपनी निरंतर प्रतिबद्धता दिखाई है
 ‘सुधारों में निरंतरता और आश्वासन’ ऐसा परिवर्तन है, जिससे हमारे उद्योग में नया आत्मविश्वास आया है
 आज दुनिया का हर देश भारत के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना चाहता है
 हमारे विनिर्माण क्षेत्र को इस साझेदारी का अधिकतम लाभ उठाने के लिए आगे आना चाहिए
 हमने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाया और सुधारों की गति को और तेज किया
 हमारे प्रयासों से अर्थव्यवस्था पर कोविड महामारी का प्रभाव कम हुआ, जिससे भारत को तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने में मदद मिली
 भारत की विनिर्माण यात्रा में शोध एवं विकास ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसे आगे बढ़ाने और गति देने की आवश्‍यकता है
 शोध एवं विकास के माध्यम से हम नवोन्मेषी उत्पादों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं, साथ ही उत्पादों में मूल्य संवर्धन भी कर सकते हैं