भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं केन्द्रीय मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने 17 अप्रैल, 2025 को केन्द्रीय कार्यालय में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेताओं की संलिप्तता पर बड़े खुलासे किए। श्री पुरी ने बताया कि दिल्ली के बहादुरशाह जफर मार्ग पर स्थित प्लॉट नंबर 5A की बिल्डिंग में नेशनल हेराल्ड की कभी प्रेस चल ही नहीं रही थी, जबकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा प्रेस चलाने के लिए ही बहुत ही कम दर पर भूमि उपलब्ध करायी गयी थी। कांग्रेस नेताओं ने इन बिल्डिंग्स का निजी और व्यवसायिक उपयोग किया और कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित पूरे देश को धोखा दिया।
श्री पुरी ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा यह केस फाइल किए जाने पर कांग्रेस पार्टी के नेता आरोप लगा रहे हैं कि यह मोदी सरकार की बदले की कार्रवाई है और केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। भाजपा का कांग्रेस से बस इतना कहना है कि वह थोड़ा आत्ममंथन करें। कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को गुमराह कर रही है, असल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी के नेतृत्व के खिलाफ प्रदर्शन करना चाहिए। नेशनल हेराल्ड का इतिहास बहुत पुराना है, जिसे 1937 में स्थापित किया गया था। हालांकि, 2008 में इस अखबार की छपाई बंद हो गई थी और इसके बाद नेशनल हेराल्ड केस 2012-13 के आसपास शुरू हुआ। इस मामले में भाजपा सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं था। असली प्रश्न यह है कि कैसे महज 50 लाख रुपये की रकम से 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की गई?
उन्होंने कहा कि यह नेशनल हेराल्ड का मामला धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है और पूरी तरह से शट एंड क्लोज केस हैं। 2014 में जब यह मामला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष आया था, उस समय मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘यह प्रतीत होता है कि यंग इंडिया लिमिटेड (वाईआईएल) को सार्वजनिक धन को निजी उपयोग में बदलने के उद्देश्य के साथ बनाया गया।‘ यह मामला 2014 से लगातार विभिन्न अदालतों में घूमता रहा है और कांग्रेस पार्टी ने अपने वकीलों का उपयोग करके इसे कई बार टालने का प्रयास किया है। यंग इंडिया लिमिटेड को 2010 में एक सेक्शन 25 के तहत कंपनी के रूप में रजिस्टर्ड किया गया था, जिसका उद्देश्य चैरिटी था और इसकी पूंजी 5 लाख रुपये थी। इसके बावजूद, कांग्रेस पार्टी ने यह लोन बढ़ाकर 80-90 करोड़ रुपए तक कर दिया और अब सवाल यह उठता है कि इसे चुकाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने क्या कदम उठाए हैं? इसके बाद, 50 लाख रुपये की राशि प्राप्त कर 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की गई।
प्रमुख बिंदु
• कांग्रेस की वास्तविक रुचि अखबार प्रकाशित करने में नहीं थी, यह परिवार पहले से ही एजेएल की संपत्तियों को लेकर ‘रियल एस्टेट’ में सक्रिय था।
• बहादुरशाह जफर मार्ग पर स्थित प्लॉट नंबर 5A को 1963 में एजेएल को ₹1.25 लाख प्रति एकड़ की दर से अलॉट किया गया था, जिसमें प्रेस और ऑफिस होना प्रस्तावित था, लेकिन 2016 में जांच में पता चला कि इस बिल्डिंग में कभी प्रिंटिंग प्रेस थी ही नहीं।
• इस बिल्डिंग में बेसमेंट पूरी तरह से खाली था, जबकि ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर पर पासपोर्ट ऑफिस किराए पर दिया गया था जबकि सेकंड और थर्ड फ्लोर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज को किराए पर दिया गया था, जिससे बड़ी रकम में किराया प्राप्त हुआ।
• नवंबर 2010 में, गांधी परिवार ने एक नई कंपनी बनाई, जिसका नाम था ‘यंग इंडिया’ और ₹90 करोड़ के बकाया लोन को भरने के लिए केवल ₹50 लाख का भुगतान किया।
• केवल ₹50 लाख में एजेएल के 99% शेयर यंग इंडिया को ट्रांसफर किए गए, जबकि एजेएल की संपत्तियों की कीमत ₹2000 करोड़ से अधिक थी। कुछ लोग तो यह दावा करते हैं कि इनकी वास्तविक कीमत ₹5000 करोड़ के करीब है।
• 2008 में नेशनल हेराल्ड अखबार की छपाई बंद हो गई थी और 2012-13 में यह मामला शुरू हुआ। इस मामले में भाजपा सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं था।
• 2014 में जब यह मामला मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष आया तो उस समय मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट रूप से कहा था कि ‘यह प्रतीत होता है कि यंग इंडिया लिमिटेड सार्वजनिक धन को निजी उपयोग में बदलने के उद्देश्य के साथ बनाया गया।’
• कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं को अपनी पार्टी के उन नेताओं के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए, जिन्होंने चैरिटेबल उद्देश्य का गलत इस्तेमाल किया और पार्टी के संसाधनों को निजी लाभ के लिए उपयोग किया।
• 2008 में अखबार के बंद होने पर खड़गे सहित बाकी कांग्रेस नेता क्या कर रहे थे? कृपया एक सूची दें कि उस समय कांग्रेस ने उस अखबार को चलाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए?

