भारत की अनुपम उपलब्धियों से चमत्कृत है विश्व

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इंदौर में 17वां प्रवासी भारतीय दिवस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सभी प्रवासी भारतीयों को विश्वभर में भारत की सांस्कृतिक विरासत, ‘मेक इन इंडिया’ अभियान, योग, आयुर्वेद, घरेलू उद्योग एवं हस्तशिल्प के ‘ब्रांड एम्बेसडर’ की भूमिका निभाने का आह्वान किया। श्री मोदी उन्हें भारतीय मिलेट्स, जो विश्व में आकर्षण के केंद्र बन रहे हैं, उनके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अनुरोध किया। ध्यान देने योग्य है कि वैश्विक कोरोना महामारी के कारण चार वर्षों बाद भौतिक रूप से प्रवासी भारतीय दिवस का आयोजन हुआ है। इसके पूर्व वर्ष 2021 में वर्चुअल माध्यम से इस कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। प्रवासी भारतीयों ने विश्वभर में विभिन्न देशों में अपने महत्वपूर्ण योगदानों से तथा लोकतांत्रिक, शांतिप्रिय एवं अनुशासित नागरिकों के रूप में अपनी सकारात्मक पहचान बनाई है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रवासी भारतीय दिवस के आयोजन से पिछले आठ वर्षों में भारत से उनके संबंध अत्यंत प्रगाढ़ हुए हैं

उन्होंने अपने कार्यों से पूरे विश्व में भारत का मस्तक ऊंचा किया है। साथ ही, भारत के साथ अपने संबंधों को सहेजकर रखते हुए वे देश की विकास यात्रा में सकारात्मक योगदान करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रवासी भारतीय दिवस के आयोजन से पिछले आठ वर्षों में भारत से उनके संबंध अत्यंत प्रगाढ़ हुए हैं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जहां पूरा विश्व भारत की ओर अचंभे से देख रहा है तथा देश के बारे में और भी अधिक जानना चाहता है, प्रवासी भारतीय उन्हें भारत की अद्भुत उपलब्धियों से अवगत करा सकते हैं। आज जब भारत आजादी के 75 वर्ष पूर्ण कर चुका है तथा ‘अमृतकाल’ में प्रवेश कर चुका है, प्रवासी भारतीय देश की प्रगति गाथा में कई प्रकार से अपना सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।

एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने विमुद्रीकरण के निर्णय को सही ठहराते हुए सरकार के 500 रु. एवं 1000 रु. के नोट को वापस लेने के विरुद्ध दायर की गई सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। केंद्र सरकार का यह कदम, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 8 नवंबर, 2016 को की थी, पर अपना निर्णय सुनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि विमुद्रीकरण की निर्णय प्रक्रिया में कोई त्रुटि नहीं थी। एक ओर जहां सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय से विमुद्रीकरण के विरुद्ध विपक्ष के दुष्प्रचार की कलई खोल दी, वहीं दूसरी ओर कोरोना वैश्विक महामारी के बाद भी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति से इस निर्णय के महत्व का भी पता चलता है। विमुद्रीकरण, जो उचित समय एवं सही नियत से लिया गया निर्णय था, उससे न केवल आतंकवाद, आतंकी गुटों की फंडिंग, भ्रष्टाचार, हवाला, नकली नोट और शेल कंपनियों पर अंकुश लगा, बल्कि इससे अर्थव्यवस्था में औपचारीकरण एवं डिजिटलीकरण की प्रक्रिया अत्यंत तीव्र हुई। आज जब कोरोना महामारी के कारण विश्व के अनेक विकसित देशों की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है, भारत एक चमकते तारे की भांति उच्च विकास दर के आंकड़ों को छू रहा है। साथ ही, अर्थव्यवस्था का विमुद्रीकरण के द्वारा शुद्धिकरण करने के फलस्वरूप आज भारत निवेश के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन गया है, जिसका परिणाम देश के रिकाॅर्ड विदेशी निवेश एवं निरंतर बढ़ते विदेशी मुद्रा भंडार के रूप में देखा जा सकता है। जहां तक अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण का विषय है, विमुद्रीकरण ने इसमें एक महती भूमिका निभाई। परिणामस्वरूप आज सभी विकसित देशों को पीछे छोड़ते हुए डिजिटल लेन-देन में भारत की भागीदारी 40 प्रतिशत से भी अधिक है।

आज, पूरा विश्व भारत की अद्भुत उपलब्धियों से चमत्कृत है। भारत ने न केवल कोरोना वैश्विक महामारी का मजबूती से सामना किया, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव डाली। जहां प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के करिश्माई एवं सुदृढ़ नेतृत्व में देश ने हर चुनौती को अवसर में बदला, वहीं भारत ने न केवल ‘मेड इन इंडिया’ टीकों का निर्माण किया, बल्कि 220 करोड़ टीके देश में निःशुल्क लगाए। इसी दौरान भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भी बन गया। भारत की अकल्पनीय उपलब्धियों की धमक हर क्षेत्र में महसूस की जा सकती है तथा इसकी सफलताओं की गाथा पूरे विश्व को चमत्कृत कर रही है।

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