विश्व ‘मेक इन इंडिया’ चाहता है

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10 साल की यह एक उल्लेखनीय यात्रा रही है, जिसने औद्योगिक क्षेत्रों को नया उत्साह दिया है और इन्हें विकास के इंजन में बदल दिया है। यह न केवल घरेलू मांग को पूरा कर रहे हैं, बल्कि निर्यात को गति देने में भी अपना योगदान दे रहे हैं

25 सितंबर को देश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की परिवर्तनकारी ‘मेक इन इंडिया’ पहल के 10 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया। यह पहल एक ओर रोजगार सृजन करने वाले निवेश को आकर्षित कर रही, वही दूसरी ओर अनेक नागरिकों को धन सृजनकर्ता बनने का आत्मविश्वास देकर भारत के औद्योगिक परिदृश्य में बदलाव ला रही है।

यह 10 साल की एक उल्लेखनीय यात्रा रही है, जिसने औद्योगिक क्षेत्रों को नया जोश दिया है और इन्हें विकास के इंजन में बदल दिया है। यह न केवल घरेलू मांग को पूरा कर रहे हैं, बल्कि निर्यात को गति देने में भी अपना योगदान दे रहे हैं। यह रोमांचक यात्रा एक कठिन समय में शुरू हुई, जब घरेलू निवेशक नीतिगत पक्षाघात और निर्णय लेने में अक्षम कांग्रेस सरकार के खराब शासन के कारण निराश थे। अर्थव्यवस्था नीचे की ओर जा रही थी, कारोबारियों का आत्मविश्वास टूट रहा था, भ्रष्टाचार के मामले नियमित तौर पर सुर्खियों में छाए हुए थे, मुद्रास्फीति बढ़ रही थी, ब्याज दरें ऊंची थीं और रुपये का भविष्य अनिश्चित था।

व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए 42,000 अनुपालन आवश्यकताओं को समाप्त कर दिया गया और छोटे व्यवसायों को उत्पीड़न से बचाने के लिए विभिन्न कानूनों के 3,700 प्रावधानों को हटा दिया गया, जिनमें मामूली अपराधों के लिए भी आपराधिक दंड का प्रावधान था। भारत ने विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रिपोर्ट में अपनी रैंकिंग में तेजी से सुधार किया – जो 2014 के 142 से बढ़कर 2019 में 63 हो गयी

निराशा की इस भावना को खत्म करने के लिए हमारे मतदाताओं ने एक निर्णायक फैसला दिया और फिर प्रधानमंत्री मोदी का चयन किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारत के लिए एक नया दृष्टिकोण लेकर आए। वह यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि भारत एक वैश्विक महाशक्ति बनें। वह चाहते थे कि भारत युवाओं को रोजगार एवं अवसर प्रदान किये जा सकें, क्योंकि वह मानते थे कि देश की सफलता की कहानी के लिए विनिर्माण क्षेत्र महत्वपूर्ण है। तभी प्रधानमंत्री ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत की।
यह दस साल का सफर एक उल्लेखनीय यात्रा रही है, परंतु यह भी मोदी सरकार द्वारा किए गए अन्य बहुआयामी और परिवर्तनकारी बदलावों के बिना यह संभव नहीं हो पाता। इन पहलों में जीएसटी, दिवालियापन संहिता और कई अन्य सुधार शामिल हैं। व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए 42,000 अनुपालन आवश्यकताओं को समाप्त कर दिया गया और छोटे व्यवसायों को उत्पीड़न से बचाने के लिए विभिन्न कानूनों के 3,700 प्रावधानों को हटा दिया गया, जिनमें मामूली अपराधों के लिए भी आपराधिक दंड का प्रावधान था। भारत ने विश्व बैंक की डूइंग बिजनेस रिपोर्ट में अपनी रैंकिंग में तेजी से सुधार किया – जो 2014 के 142 से बढ़कर 2019 में 63 हो गयी।

सरकार की ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल ने नौकरी चाहने वालों को नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे इस साल जून में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या बढ़कर 1,40,803 हो गई है, जिससे निवेश आया है और 15 लाख से ज्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं। ये स्टार्टअप देश में इनोवेशन इकोसिस्टम को आगे बढ़ा रहे हैं, स्वच्छता, अंतरिक्ष नेविगेशन, खाद्य अपव्यय को कम करने, स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने जैसे क्षेत्रों को लेकर उनके समाधान पर काम कर रहे हैं।
11 औद्योगिक गलियारों का विकास एक अन्य प्रमुख क्षेत्र है। इस कार्यक्रम के तहत 20 औद्योगिक स्मार्ट शहर विकसित किए जा रहे हैं, जो इन गलियारों को भारत के विनिर्माण विकास की रीढ़ बनाने में मदद करेंगे। इनमें से चार स्मार्ट शहर पहले से ही निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं, क्योंकि यहां विनिर्माण इकाइयों को स्थापित करने के लिए अवश्यक बुनियादी ढांचा और अन्य मंजूरी प्रदान की जा चुकी है। इन केंद्रों के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश की प्रतिबद्धता मिल चुकी है, जिससे 80,000 लोगों को प्रत्यक्ष और कई अन्य लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।

सरकार की पीएलआई योजना इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और मेडिकल डिवाइस जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करती हैं, ताकि इनके सतत विकास के लिए एक इको-सिस्टम तैयार किया जा सके और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए इन्हें तैयार किया जा सके। पीएलआई योजनाओं के परिणामस्वरूप 1.32 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और विनिर्माण उत्पादन में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस पहल के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 8.5 लाख से अधिक नौकरियां पैदा हुई हैं।

बुनियादी ढांचा निर्माण पर प्रधानमंत्री का जोर विनिर्माण के लिए एक और प्रोत्साहन रहा है। वस्तुओं और सेवाओं की मांग पैदा करने के अलावा बुनियादी ढांचे का विकास औद्योगिक गतिविधि का एक प्रमुख कारक होता है। आज, भारत में एक्सप्रेसवे और राजमार्गों का एक विशाल एवं बढ़ता हुआ नेटवर्क है। नए विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन बनाए जा रहे हैं, साथ ही नए माल ढुलाई गलियारे बन रहे हैं।

भारत को निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है। देश 4डी लाभ प्रदान कर रहा है — प्रधानमंत्री मोदी का निर्णायक नेतृत्व; हमारे युवा, प्रतिभाशाली, कुशल भारतीयों का जनसांख्यिकीय लाभांश; 140 करोड़ भारतीयों द्वारा उत्पन्न की जाने वाली मांग; और लोकतंत्र जो निवेशकों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करता है। यहां कानून का शासन है जो कभी भी किसी के खिलाफ भेदभाव की अनुमति नहीं देगा। 4डी भारत में निर्माताओं को आकर्षित करने के लिए बहुत ही आकर्षक विषय है।

पीएलआई योजनाओं के परिणामस्वरूप 1.32 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और विनिर्माण उत्पादन में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इस पहल के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 8.5 लाख से अधिक नौकरियां पैदा हुई हैं

निवेशकों में काफी उत्साह है। कई प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहे हैं, जो निवेश करने और भारतीय विकास की कहानी हिस्सा बनने के लिए अवसरों की तलाश में हैं। विदेशी सरकारें और वैश्विक सीईओ भारत में अवसरों पर नजर गड़ाए हुए हैं। कई देश भारत के साथ व्यापार समझौते करने के इच्छुक हैं।
दुनिया अब भारत को विनिर्माण गंतव्य के रूप में देख रही है और इसका मुख्य कारण भारत का अपना प्रतिस्पर्धी लाभ और मजबूत आर्थिक बुनियादी ढांचा है। आज, मुद्रास्फीति नियंत्रण में है, आर्थिक विकास मजबूत है और मोदी सरकार सख्त राजकोषीय अनुशासन का पालन कर रही है। संघर्ष और अनिश्चितता से ग्रस्त वर्तमान वैश्विक स्थिति में यह और भी सराहनीय है।

प्रधानमंत्री मोदी की पहलों ने भारत को 2014 में दुनिया के ‘फ्रैजाइल फाइव’ देशों में से एक की स्थिति से ऊपर उठने में मदद की है और अब वह शीर्ष पांच वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया है। वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों ने पिछले 10 वर्षों को एक परिवर्तनकारी दशक बनाने में योगदान दिया है, जो कांग्रेस शासन के खोए हुए दशक से आगे बढ़कर एक बड़ी छलांग लगा रहा है।

(लेखक केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री हैं )