‘यह विधेयक करोड़ों लोगों को सम्मान के साथ जीने का अवसर प्रदान करेगा’

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     गृहमंत्री श्री अमित शाह द्वारा संसद में दिए वक्तव्य के मुख्य बिंदु :

केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने संसद में नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 पर बोलते हुए कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान, इन तीन देशों के अल्पसंख्यकों को ही नागरिकता देने का प्रावधान इस विधेयक में है। प्रस्तुत हैं इसके मुख्य बिंदु :

विधेयक का उद्देश्य

यह विधेयक करोड़ों लोगों को सम्मान के साथ जीने का अवसर प्रदान करेगा।

पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए अल्पसंख्यकों को भी जीने का अधिकार है। इन तीनों देशों में अल्पसंख्यकों की आबादी में काफी कमी हुई है, वह लोग या तो मार दिए गए, उनका जबरन धर्मांतरण कराया गया या वे शरणार्थी बनकर भारत में आए।

तीनों देशों से आए धर्म के आधार पर प्रताड़ित ऐसे लोगों को संरक्षित करना इस विधेयक का उद्देश्य है।

भारत के अल्पसंख्यकों का इस बिल से कोई अहित नहीं है ।

इस बिल का उद्देश्य उन लोगों को सम्मानजनक जीवन देना है जो दशकों से पीड़ित थे।

यह उन निश्चित वर्गों के लिए है, जिनके धर्म के अनुसरण के लिए इन तीन देशों में अनुकूलता नहीं है, उनको प्रताड़ित किया जा रहा है।

इसमें उन तीन देशों के अल्पसंख्यकों को ही नागरिकता देने का प्रावधान है।
किसको मिलेगी नागरिकता

पाकिस्तान, बंगलादेश और अफ़गानिस्तान, इन तीन देशों की जो सीमाएं भारत को छूती हैं, उन तीनों देशों में हिंदू, जैन, बौद्ध, सिख, ईसाई और पारसी, वहां की लघुमती के लोग, जो भारत में आए हैं, वे किसी भी समय आए हों, उनको नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान इस विधेयक में है।

जो किसी भी तरह से भारत के संविधान के किसी भी प्रावधान के खिलाफ नहीं जाते हैं, ऐसे शरणार्थियों को उचित आधार पर नागरिकता प्रदान करने के प्रावधान हैं।

विधेयक में प्रावधान

धार्मिक प्रताड़ना के आधार पर जो लोग आए हैं, उनको नागरिकता देने का सवाल है।

हिन्दू, सिख, जैन, पारसी, बौद्ध और ईसाई, जो पाकिस्तान, बंगलादेश और अफ़गानिस्तान, इन तीन देशों से आते हैं, उनको अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा। इससे उनको मुक्ति दे दी गई है।

यदि धार्मिक उत्पीड़न के शिकार उपरोक्त प्रवासी निर्धारित की गई शर्तों और प्रतिबंधों के तौर-तरीकों को अपनाकर रजिस्ट्रेशन कराते हैं, तो उनके माध्यम से वे भारत की नागरिकता ले पाएंगे।

ऐसे प्रवासी अगर नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 या तीसरे शेड्यूल की शर्तें पूरी करने के उपरांत नागरिकता प्राप्त कर लेते हैं, तो जिस तिथि से वे भारत में आए हैं, उसी तिथि से उनको नागरिकता दे दी जाएगी।

पश्चिमी बंगाल के अन्दर ढ़ेर सारे शरणार्थी आए हुए हैं, अगर वे 1955 में आए, 1960 में आए, 1970 में आए, 1980 में आए, 1990 में आए या 2014 की 31 दिसंबर के पूर्व आए, उन सभी को उसी तिथि से नागरिकता दी जाएगी, जिस तिथि से वे आए हैं।

इससे उनको किसी कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अगर ऐसे अल्पसंख्यक प्रवासी के खिलाफ अवैध प्रवास या नागरिकता के बारे में, घुसपैठ या नागरिकता के बारे में कोई भी केस चल रहा है, तो वह केस इस बिल के विशेष प्रावधान से वहीं पर समाप्त हो जाएगा और उन्हें किसी कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अगर आवेदक किसी भी प्रकार का अधिकार या प्रिवीलेज ले रहा है, तो इस प्रावधान के तहत वह अधिकार व प्रिवीलेज से वंचित नहीं कर दिया जाएगा।

कई जगह कुछ जो शरणार्थी आए हैं, उन्होंने छोटी-मोटी दुकान खरीद ली है, वे अपना काम कर रहे हैं। कानून की दृष्टि में हो सकता है कि वह अवैध हो, गैर-कानूनी हो, मगर यह बिल उनको रक्षित करता है कि उन्होंने भारत में अपने निवास के समय में जो कुछ भी किया है, उसको यह बिल रेगुलराइज कर देगा। उनकी उस स्टेटस को कहीं पर भी वंचित नहीं करेगा।

– जैसे किसी की शादी हुई, बच्चे हुए, इन सब चीजों को यह बिल रेगुलराइज करेगा।

उत्तर-पूर्व के राज्यों में लागू नहीं होगा विधेयक

जो पूर्वोत्तर के राज्य हैं, उनके अधिकारों को, उनकी भाषा को, उनकी संस्कृति को और उनकी सामाजिक पहचान को संरक्षित करने के लिए, उनको संरक्षित करने के लिए भी इसके अंदर प्रावधान हुए हैं।

जनजातीय इलाकों पर यह बिल लागू नहीं होगा।

उत्तर-पूर्व के सभी राज्यों में जो प्रोटेक्शन दिया गया है, उसी को आगे बढ़ाते हुए, छठवीं अनुसूची में असम, मेघालय, मिज़ोरम, त्रिपुरा और अब पूरा मणिपुर भी नोटिफाई हो चुका है।

इसी तरह बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट, 1973 के तहत इनर लाइन परमिट के इलाके, पूरा मिज़ोरम, अरुणाचल प्रदेश, अधिकांश नागालैंड और मणिपुर, इन सारे एरिया में भी ये प्रावधान लागू नहीं होंगे।

1985 से लेकर 35 साल तक किसी को चिंता नहीं हुई कि असम के लोगों की भाषा की रक्षा, साहित्य की रक्षा, संस्कृति की रक्षा, पूरे सामाजिक परिवेश की रक्षा, उनके राजनैतिक प्रतिनिधित्व की सुरक्षा, इन सारी चीज़ों के लिए जो करना था, वह हुआ ही नहीं।

वह तब हुआ, जब इस देश ने नरेन्द्र मोदी जी को प्रधान मंत्री बनाया और भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई।

श्री नरेन्द्र मोदी सरकार पूर्वोत्तर राज्यों की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।

असम के सभी मूल निवासियों की सभी हितों की चिंता क्लॉज़- 6 कमिटी के माध्यम से किया जायेगा।

उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के लोगों की आशंकाओं को दूर करते हुए माननीय गृह मंत्री जी ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की भाषाई, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को संरक्षित रखा जाएगा और इस विधेयक में संशोधन के रूप में इन राज्यों के लोगों की समस्याओं का समाधान है।

मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं है यह विधेयक

नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2019 पर बोलते हुए केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, एक बहुत बड़ी भ्रांति फैलाई जा रही है कि यह बिल माइनॉरिटी के खिलाफ है, यह बिल विशेषकर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ है।’

श्री अमित शाह ने कहा, ‘जो इस देश के मुसलमान हैं, उनके लिए इस देश के अंदर किसी चिंता की सवाल ही नहीं है।’

श्री नरेन्द्र मोदी सरकार के होते हुए इस देश में किसी भी धर्म के नागरिक को डरने की जरूरत नहीं है, यह सरकार सभी को सुरक्षा और समान अधिकार देने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री अमित शाह ने कहा कि मोदी जी के शासनकाल में पिछले 5 वर्षों में 566 से ज्यादा मुस्लिमों को भारत की नागरिकता दी गई।

श्री शाह ने कहा कि यह बिल सिर्फ नागरिकता देने के लिए है किसी की नागरिकता छीनने का अधिकार इस बिल में नहीं है।

श्री नरेन्द्र मोदी सरकार मानती है कि जिनकी प्रताड़ना हुई है, उन सबकी मदद सरकार को करनी चाहिए।

श्री शाह ने कहा ‘वे नागरिक हैं, नागरिक रहेंगे, उन्हें कोई प्रताड़ित नहीं कर सकता।’

यहां के अल्पसंख्यक और विशेषकर किसी भी मुसलमान को चिंता करने की जरूरत नहीं है।