सुशासन के सच्चे पथ प्रदर्शक ‘भारत रत्न’ अटल बिहारी वाजपेयी

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देश के पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी प्रखर वक्ता, कवि, राजनेता, कुशल लेखक, पत्रकार, स्‍वतंत्रता सेनानी और न जानें कितने दुर्लभ प्रतिभा के धनी थे। अटल बिहारी वाजपेयी नाम तो एक, लेकिन शख्सियत ऐसी कि मानो सभी गुण उन्‍हीं में समाहित हों। उनके मिलनसार स्‍वभाव के कारण ही लोग हमेशा उनके कायल रहे। भारत के लिए उनकी स्मृतियां जितनी अनमोल हैं, उतनी ही महत्‍वपूर्ण हैं उनसे जुड़ी हर जगह, जिससे उनको लगाव था। भारत माता के प्रति अटल जी का समर्पण और प्रतिबद्धता बहुत ही अलौकिक है, उनका व्यक्तित्व आज भी हम सभी को प्रेरणा देने का कार्य करता है।

बटेश्वर के रहने वाले थे अटल जी

मैंने 22 जुलाई, 2024 को लोकसभा के अंदर 377 के अधीन अटल जी की जनस्थली बटेश्वर में विशाल प्रतिमा बनवाने का आग्रह किया था जिसको मोदी सरकार ने स्वीकृति दे दी है। बहुत जल्द बटेश्वर में अटल जी की विशाल एवं अकल्पनीय 65 फुट ऊंची भव्य प्रतिमा बनकर तैयार होगी। इससे पूर्व भी मोदी सरकार ने बटेश्वर को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए 74 करोड़ रुपए की विशेष परियोजना को मंज़ूरी दी, जिसके लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जी के प्रति विशेष आभार व्यक्त करता हूं।

अटल जी के पैतृक गांव बटेश्वर जो फ़तेहपुर सीकरी लोकसभा में आता है। यह मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात हैं की लगातार दूसरी बार मुझे सांसद के रूप में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। आगरा से सटा बटेश्वर धाम, शिव मंदिरों की शृंखला से सुसज्जित ये धरा पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी का पैतृक गांव भी है। तीर्थों का भांजा कहे जाने वाले बटेश्वर धाम भारत के बहुत ही प्रसिद्ध स्थानों में से एक हैं। अटल जी मूल रूप से बटेश्वर के रहने वाले थे। इस जगह को भूतेश्‍वर नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार बटेश्‍वर को तीर्थों का भांजा कहा जाता है।

अटलजी ने किसानों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराई, गेहूं के समर्थन मूल्य में 19.6 प्रतिशत बढ़ोतरी कराई, चीनी मिलों को लाइसेंस प्रणाली से मुक्ति और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना तैयार कराई

वाजपेयी जी राजनीति के क्षेत्र में 5 दशकों तक सक्रिय रहे। वे लोकसभा में 9 बार और राज्यसभा में 2 बार चुने गए और एक कीर्तिमान स्थापित किया। वे 1980 में गठित भाजपा के संस्थापक अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने 13 अक्टूबर, 1999 को लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के प्रमुख के रूप में भारत के प्रधानमंत्री का पद ग्रहण किया और कार्यकाल पूर्ण किया। इससे पहले वे 1996 में 13 दिन और 1998 में 13 महीने के लिए दो बार प्रधानमंत्री रह चुके थे। इसके अलावा विदेश मंत्री, संसद की विभिन्न महत्वपूर्ण स्थायी समितियों के अध्यक्ष और विपक्ष के नेता के रूप में उन्होंने आजादी के बाद भारत की घरेलू और विदेश नीति को आकार देने में एक सक्रिय भूमिका निभाई। वे अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं।

गांव से थे इसलिए किसानों की पीड़ा को समझते थे

अटल बिहारी वाजपेयी जी किसानों की पीड़ा को समझते थे। जब देश के प्रधानमंत्री बने तो सबसे पहले किसानों के हक में ऐतिहासिक फैसले लिए। किसानों को साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराई, गेहूं के समर्थन मूल्य 19.6 प्रतिशत बढ़ोतरी कराई, चीनी मिलों को लाइसेंस प्रणाली से मुक्ति और राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना तैयार कराई। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल मिले, इसके लिए नदियों को आपस में जोड़ने की योजना लाए। किसान की उपज अन्य प्रांतों में भी पहुंचे, उसके लिए उन्होंने उच्चस्तरीय सड़कों की कनेक्टिविटी पर कार्य किया।

इतना ही नहीं अटल बिहारी वाजपेयी 15 अगस्त 2003 को जब लाल किले के प्राचीर से देश को संबोधित कर रहे थे, तब पहली बार उन्होंने ही किसानों की आय दोगुना करने की बात कही थी।

गांव, गरीब के लिए ऐति‍हासिक फैसले

वाजपेयी जी के कार्यकाल में ही 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का अभियान शुरू किया गया था, जिसे उन्होंने सन् 2000-01 में सर्व शिक्षा अभियान स्कीम को लागू करके पैसे के अभाव से पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों को फायदा पहुंचाया तथा ‘स्कूल चले हम’ थीम की लाइन लिखकर प्रमोट किया। इस तरह ‘सर्व शिक्षा अभियान’ को बढ़ावा मिला।

इन सबके अलावा अटल बिहारी वाजपेयी ने सड़कों के माध्यम से भारत को जोड़ने की योजना बनाई थी, जिसमें उन्होंने प्रमुख रूप से चेन्नई, कोलकाता, दिल्ली और मुंबई को जोड़ने के लिए स्वर्णिम चतुर्भुज सड़क परियोजना लागू की, साथ ही ग्रामीण सड़क योजना के उनके फैसले ने देश के ग्रामीण और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया, जिसे भारतीय राजनीति में सबसे ज्यादा अहम कार्य माना जा सकता है।

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना

गांवों को जोड़ने वाली प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की पक्की सड़कों ने तो गांवों की तस्वीर बदल दी। अटल बिहारी वाजपेयी जी ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिीविटी के अभाव को सबसे बड़ी समस्या मानते थे। 70 फीसदी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों के लिए उनके एक क्रांतिकारी फैसले से ग्रामीण भारत की तकदीर बदल गई। उन्होंने गांवों को सड़क से जोड़ने का काम शुरू किया। उन्हीं के कार्यकाल के दौरान दिसंबर, 2000 में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की शुरुआत हुई थी। फिलहाल प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से देश के 90 फीसदी से ज्यादा गांव सड़क से जुड़ चुके हैं। अटल जी की चलाई यह योजना आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। शहरों से सीधे जुड़ाव हो जाने से गांव में रहने वाले लोगों की जिंदगी बदल गई। कृषि उपज को मंडियों तक ले जाने और रोजी-रोजगार के रास्ते आसान हुए। पक्की सड़क हो जाने से गांव तक लोगों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतें आसानी से मुहैया हो रही हैं।

गांवों का संपूर्ण विकास ‘प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना’

अटल बिहारी वाजपेयी जी गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार को लेकर हमेशा प्रयासरत रहे। इसी मकसद से 2000-2001 में उनकी सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना की शुरुआत की। इसके जरिए गांव में रहने वाले लोगों को शुरुआती शिक्षा, बेहतर सड़कें, पीने के लिए साफ पानी, बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं और पोषण मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया। बाद में इसमें बिजली मुहैया कराने का भी लक्ष्य जोड़ दिया गया। इस योजना का मुख्य मकसद ग्रामीण इलाकों में गरीबी दूर कर लोगों के जीवन को बेहतर बनाना था।

संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना

ग्रामीण भारत के गरीबों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए अटल बिहारी वाजपेयी जी ने 25 सितंबर, 2001 को संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना की शुरुआत की। इसके लिए 10,000 करोड़ रुपए सालाना का बजट भी निर्धारित किया गया था। योजना के लाभार्थियों को प्रतिदिन की मजदूरी के हिसाब 40 रुपए या 8 किलो गेहूं दिया जाता था।

गरीबों के लिए अंत्योदय अन्न योजना

अंत्योदय अन्न योजना देश के गरीबों के लिए वाजपेयी सरकार की ओर से चलाई गई सबसे बड़ी योजना थी। 25 दिसंबर, 2000 को इस योजना की शुरुआत की गई। इस योजना के तहत गरीबों में भी ज्यादा गरीब लोगों को रियायती दर पर गेहूं और चावल उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई। इसके तहत 1 करोड़ परिवारों को 2 रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं और तीन रुपये प्रति किलो की दर पर चावल उपलब्ध करवाना था। इसके बाद 2003 में इस योजना को बढ़ाया गया और 50 लाख परिवार और जोड़ दिए गए। 2004 में योजना एक बार फिर से बढ़ाई गई और फिर से 50 लाख परिवारों को जोड़ा गया।

कुल मिलाकर इस योजना के तहत 2 करोड़ परिवारों को सस्ती कीमत पर राशन मुहैया करवाने की व्यवस्था की गई। इन परिवारों की पहचान के लिए वाजपेयी सरकार ने पूरे देश में व्यापक स्तर पर सर्वे करवाए थे और उनके लिए राशन कार्ड बनवाए थे। इतना सस्ता अनाज पहले कभी नहीं दिया गया। ये दुनिया की सबसे बड़ी खाद्य सुरक्षा योजना थी। अटल जी ‘मां भारती’ के सच्चे सपूत होने के साथ ही साथ उनका संपूर्ण जीवन देश के विकास और गांव खेत किसान की प्रगति के लिए पूरी तरह से समर्पित था, उनके द्वारा राष्ट्र के कल्याण व उत्थान के हित में लिए गए फ़ैसले बहुत ही ऐतिहासिक और अभूतपूर्व थे, अटल जी का आदर्शपूर्ण जीवन सदैव ही हम सभी करोड़ों करोड़ कार्यकर्ताओं को प्रेरणा देता रहेगा।

(लेखक भाजपा किसान मोर्चा के
राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद हैं)