दो युग – एक दृष्टि

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बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती (14 अप्रैल) पर विशेष

देश भारत रत्न बाबा साहेब डॉ० भीमराव अम्बेडकर जी की जयंती को उत्साह के साथ मना रहा है। बाबा साहेब का जन्म 14 अप्रैल 1891 को हुआ था। अस्पृश्यता के विरोध में आन्दोलन, संविधान निर्माता, श्रम नीति कर निर्माण, विधि व्यवस्था  एवं नारी शक्ति के सशक्तिकरण में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जायेगा। लोकतंत्र एवं संविधान के प्रति वह सदैव समर्पित थे। अपने देश की समस्त समस्याओं का समाधान लोकतांत्रिक पद्धति से संविधान द्वारा ही खोजने का आग्रह उन्होंने किया था। स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुता के वह सदैव पक्षधर थे। 25 दिसंबर 1952 में बोलते हुए उन्होंने कहा था कि “आज के युग में संपत्ति ही आजादी का अधिकार है। जब तक महिलाओं को संपत्ति में वारिस नहीं माना जाता, तब तक उनकी गुलामी खत्म होने वाली नहीं है।” जिस समय देश बाबा साहेब  की जयंती मना रहा है उसी के निकटवर्ती समय में महिलाओं के सशक्तीकरण एवं लोकतंत्र में 33 प्रतिशत भागीदारी के लिए संसद विशेष सत्र बुलाकर ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के प्रस्ताव को पारित करने की ओर अपने ऐतिहासिक कदम बढ़ा रही है। ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भारत रत्न बाबा साहेब  डॉ भीमराव अंबेडकर जी एवं उन सदृश महापुरुषों के सपनों एवं संकल्पों को ही पूर्ण कर रहे हैं।

भारतीय चिंतन में स्त्री-पुरुष को अलग-अलग देखना यह दृष्टि नहीं रही है। दोनों में एक ही तत्व है। केवल भौतिक शरीर रचना में अंतर दिखाई देता है। इस दृष्टि को समाज में स्थायी बनाने के लिये हमारे ऋषि मुनियों ने स्त्री को आदिशक्ति, अर्धनारीशवर आदि के माध्यम से स्थापित किया था। स्त्री के प्रति सम्मान का भाव ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:’ जैसे अनेक वेदमन्त्रो में उदभाषित होता है।  वेद में वर्णित अनेक ऋषिकाओं जैसे मैत्रीयी, अपाला, लोपामुद्रा, गार्गी, अदिति आदि ने शिक्षा में अपना योगदान दिया। सुशासन एवं समाज सुधार की प्रतीक अनेक महिला बनीं। स्वतंत्रता के आंदोलन में भी अपना योगदान देकर भारतीय महिलाओं ने अपना जीवन उत्सर्ग किया। जिस समय पश्चिमी जगत में स्त्री को वोट का अधिकार एवं समानता का अधिकार दें अथवा न दें, इस विषय पर विवाद चल रहा था, उस समय हमारे संविधान निर्माताओं ने पुरुषों के समान ही महिलाओं को समान मैत्रेयीअधिकार देकर अपने प्राचीन भारतीय दृष्टिकोण का पालन ही किया था।

डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर ने 20 जुलाई 1942 को नागपुर में दलित महिला अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा था कि, “किसी समाज की प्रगति का अनुमान इस बात से लगाया जाता है कि उस समाज में महिलाओं की प्रगति कितनी है|”

डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर ने 20 जुलाई 1942 को नागपुर में दलित महिला अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा था कि, “किसी समाज की प्रगति का अनुमान इस बात से लगाया जाता है कि उस समाज में महिलाओं की प्रगति कितनी है|” 1927 में तथाकथित अस्पृश्य समाज की महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा था कि जिस प्रकार गृहस्थी  की समस्याएं पति-पत्नी मिलकर सुलझाते हैं, वैसे ही समाज की समस्याएं भी स्त्री पुरुषों ने मिलकर सुलझानी चाहिए। आप  पुरुषों की जन्मदाता हैं।” बाबा साहेब द्वारा भूमिहीन कृषकों को भूमि दिलाए जाने के लिए आंदोलन में शांति बाई दाणी, गीता बाई गायकवाड़ तथा मीनल के योगदान को भुलाना असंभव है।

विवाह की आयु 18 वर्ष, एक विवाह को वैधता, गोद लेने का अधिकार जैसे कानून बनवाना, महिला सशक्तीकरण में बाबा साहेब  का महती योगदान है। गर्भवती महिलाओं को प्रसूति अवकाश यह बाबा साहेब  की ही देन है। संविधान के अनुच्छेद 14 से 16 में स्त्री-पुरुषों की समानता का अधिकार, नौकरियों में स्त्रियों को समान अधिकार एवं  समान वेतन दिलाने में बाबा साहेब की महत्वपूर्ण भूमिका है।

हिंदू कोड बिल जिसमें महिलाओं को तलाक का अधिकार, बहुविवाह से संरक्षण, संपत्ति में पुत्री का पुत्र के समान अधिकार मिलना जिस पर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से उनकी असहमति सभी को ज्ञात है जो उनके मंत्रिमंडल से त्यागपत्र का भी एक कारण बनी थी। केवल हिंदू महिला ही नहीं बाबा साहेब ने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की भी पुरज़ोर वकालत की थी। बाबा साहेब ने 1928 में ही कहा था कि “राष्ट्रहित में है कि माता को प्रसव- पूर्व एवं पश्चात् आराम मिलना चाहिये। भारत का पहला मातृत्व लाभ विधेयक उन्होंने ही प्रस्तुत किया था।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘नारी तू नारायणी’ के संकल्प के साथ 2014 से ही महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक प्रयास किए। समाज में जागरण के साथ-साथ लिंगानुपात में वृद्धि, समाज में सम्मान, आर्थिक सशक्तीकरण, महिला नेतृत्व आदि की दिशा में वह प्रयास सराहनीय है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘नारी तू नारायणी’ के संकल्प के साथ 2014 से ही महिला सशक्तीकरण के लिए अनेक प्रयास किए। समाज में जागरण के साथ-साथ लिंगानुपात में वृद्धि, समाज में सम्मान, आर्थिक सशक्तीकरण, महिला नेतृत्व आदि की दिशा में वह प्रयास सराहनीय है।

मातृशक्ति की कठिनाइयों को समझकर 11 करोड़ शौचालयों का निर्माण जिसका उन्होंने इज्जतघर कहा वह ऐतिहासिक पहल थी। घर तक जल पहुंचाना, प्रधानमंत्री आवास योजना में महिला को मालिकाना हक, बेटी बचाओ -बेटी पढ़ाओ अभियान ने न केवल लिंगानुपात में परिवर्तन किया बल्कि बेटी बोझ है की मानसिकता से भी मुक्ति दिलाई है।

स्टार्टअप्स, मुद्रा योजना, जनधन खातों में 55 प्रतिशत महिला भागीदारी, स्टैंड अप इंडिया, स्वयं सहायता समूह जिसमें 10 करोड़ से अधिक महिलाओं की सहभागिता है, लखपति दीदी जैसी अनेक योजनाओं से आर्थिक क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाया है।

गणतंत्र दिवस की परेड का नेतृत्व, सेना में अवसर, नमो ड्रोन दीदी, ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस ब्रीफिंग महिलाओं द्वारा आदि ने महिलाओं के प्रति सम्मान को बहुगुणित किया है। तीन तलाक से मुक्ति के कानून ने मुस्लिम समाज की महिलाओं में विश्वास जगाने का कार्य किया है।

नारी केवल मतदान तक सीमित न रहते हुए निर्णय प्रक्रिया में उसका योगदान हो, इस उद्देश्य से 16,17 एवं 18 अप्रैल में संसद एक ऐतिहासिक निर्णय ले रही है। लंबे समय से लंबित यह कानून मोदी सरकार ने 2023 में पास किया था। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8 अप्रैल 2026 को संविधान संशोधन विधेयक को स्वीकृति प्रदान की है। लोकतंत्र में 33 प्रतिशत भागीदारी के लिये संसद की स्वीकृति के बाद यह स्त्री को सशक्त  बनाने में सहायक होगा। जिसका परिणाम होगा कि 50 प्रतिशत देश की जनसंख्या में सहभागी महिला शक्ति देश के विकास में अपना योगदान दे सकेंगी।

भारत रत्न बाबा साहेब  अंबेडकर ने 100 वर्ष पूर्व स्त्री के सम्मान का जो सपना देखा था, जिसको संविधान एवं संसद के माध्यम से उन्होंने पूर्ण करने का प्रयास भी किया था, आज 100 वर्षों के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी उसको पूर्ण कर रहे हैं

भारत रत्न बाबा साहेब  अंबेडकर ने 100 वर्ष पूर्व स्त्री के सम्मान का जो सपना देखा था, जिसको संविधान एवं संसद के माध्यम से उन्होंने पूर्ण करने का प्रयास भी किया था, आज 100 वर्षों के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी उसको पूर्ण कर रहे हैं। समस्त विपक्षी दल उनके आह्वान अनुसार ‘नारी शक्ति वंदन’ अधिनियम को पारित करने में सहायक बनें, बाबासाहेब  के जन्म दिवस पर यह उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय सह महामंत्री (संगठन ) हैं)