भारतीय जनता पार्टी द्वारा पं. दीनदयाल उपाध्याय जयंती (25 सितंबर) से पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जयंती (25 दिसंबर) तक ‘आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान’ आयोजित किया गया। इस अभियान के राष्ट्रीय संयोजक एवं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री अरुण सिंह से कमल संदेश के सह संपादक संजीव कुमार सिन्हा ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में बातचीत की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश :
आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के बारे में बताएं। इस अभियान का क्या उद्देश्य है?
आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान का उद्देश्य है कि ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ इस मंत्र को जन-जन अपनाएं और यह जन आंदोलन बने। जब लोग स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएंगे तो उसके माध्यम से भारत आत्मनिर्भर बनेगा और आत्मनिर्भरता के साथ ही ‘विकसित भारत’ का संकल्प पूरा होगा।
देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कई उद्बोधनों में जनता से यह आह्वान किया कि आइए हम स्वदेशी को अपनाएं और विशेष रूप से उन वस्तुओं को अपनाएं जिसमें भारत की मिट्टी की सुगंध आती हो, जिसमें भारत के युवा और युवतियों का पसीना बहा हो, जो भारत में निर्मित हो। ऐसी वस्तुओं को अपनाकर भारत को आत्मनिर्भर बनाए। इससे भारत की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी तथा हम स्वावलंबन की ओर बढ़ेंगे। साथ ही, इसके माध्यम से रोजगार के अनेक अवसर उपलब्ध होंगे। हम लोगों ने प्रधानमंत्रीजी के ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को भी आगे बढ़ाया है। स्थानीय वस्तुओं का अधिक से अधिक उपयोग करें, लघु-सूक्ष्म उद्योगों को प्रोत्साहन मिले, यह आवश्यक है।
इस अभियान को लेकर किस तरह की सक्रियता रही?
आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान को लेकर सबसे प्रसन्नता की बात है कि आदरणीय प्रधानमंत्रीजी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के कवर पेज पर ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ का लोगो प्रदर्शित किया। इसका अनुकरण पार्टी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने किया, जिससे यह अभियान बड़ा प्रभावी साबित हुआ।
इस अभियान के दौरान 1 करोड़ 71 लाख लोगों ने स्वदेशी संकल्प-पत्र भरे। यही नहीं, दाहिना हाथ आगे करके उन्होंने संकल्प भी लिया कि हम भारत में निर्मित स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे। इसके साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वभाषा के प्रोत्साहन को लेकर भी संकल्प लिया गया। लगभग 2 करोड़ 70 लाख घरों पर ‘हर घर स्वदेशी – घर-घर स्वदेशी’ स्टीकर लगाए गए। देश भर में 13,443 आत्मनिर्भर भारत सम्मेलन आयोजित किए गए। विधानसभा स्तर पर सम्मेलनों का आयोजन हुआ। 53062 स्कूलों एवं कॉलेजों में भी बच्चों को आत्मनिर्भर भारत एवं स्वदेशी का संकल्प दिलवाया गया। 4063 रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर भी लोगों से संकल्प-पत्र भरवाए गए। इस अभियान का प्रचार-प्रसार होडिंग के माध्यम से भी हुआ। 2030 युवा, महिला, उद्यमी सम्मेलन भी आयोजित हुए। अनेक स्थानों पर स्थानीय कारीगरों एवं सूक्ष्म व्यापारियों के सम्मान का कार्यक्रम हुआ। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर लोगों ने भरोसा जताया, जिससे यह अभियान व्यापक स्तर पर जन-आंदोलन बना।
कुछ एनजीओ ने अच्छा कार्य किया। उदाहरण के रूप में अमूल ने अपने ढाई करोड़ दूध के पैकेट पर ‘हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी’ का स्टीकर लगाया। जब महीने भर दूध का पैकेट बंटा, उसमें यह स्लोगन लिखा रहा। ऐसे अनेक अभियानों को जन सामान्य, उद्योग जगत या एनजीओ ने पूरा समर्थन दिया। दुकानों पर विशेष रूप से यह स्टीकर कि ‘गर्व से कहो यह स्वदेशी है’ लगाया गया। स्थानीय उत्पादों को लेकर 827 स्वदेशी मेला लगाए गए।
इस अभियान के दौरान प्रमुख रूप से किन विषयों पर चर्चा की गई?
आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान के दौरान आयोजित कार्यक्रमों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत कैसे आत्मनिर्भर बन रहा है, यह प्रमुख तौर पर चर्चा का विषय रहा। रक्षा क्षेत्र हो, मेक इन इंडिया हो, हरित ऊर्जा हो या हमारी अर्थव्यवस्था हो, हर क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और आत्मनिर्भर हो रहा है, यह भी चर्चा का विषय रहा। विकसित भारत का संकल्प कैसे साकार हो, उसके लिए सभी का योगदान रहे, इसके लिए जन-जागरण करने का कार्य किया।
वैश्वीकरण के युग में स्वदेशी विचार कितना सार्थक है?
देखिए, अमेरिका से लेकर चीन तक, सभी देश अब यह प्राथमिकता दे रहे हैं कि उनके यहां अधिक से अधिक उद्योग लगे, अधिक से अधिक रोजगार उत्पन्न हो। स्वदेशी विचार आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और स्वावलंबन को बढ़ावा देता है। आत्मनिर्भर भारत संकल्प अभियान सीमित समय के लिए नहीं है, बल्कि यह विकसित भारत बनाने के लिए निरंतर चलता रहेगा।

