प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 10 मार्च को जल शक्ति मंत्रालय के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, जिसमें जल जीवन मिशन (जेजेएम) के कार्यान्वयन को बुनियादी ढांचे के निर्माण से पुनर्गठित करने और इसे सेवा वितरण की ओर मोड़ने की बात कही गई है। इसकी पेयजल व्यवस्था और स्थायी ग्रामीण पाइपलाइन से पीने योग्य पानी की आपूर्ति के लिए संस्थागत इकोसिस्टम द्वारा सहायता की जाएगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित करते हुए जेजेएम के पुनर्गठन के लिए कुल परिव्यय को बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये करने की मंजूरी दी है, जिसमें कुल केंद्रीय सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये है। यह 2019-20 में स्वीकृत 2.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक है, यानी 1.51 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त केंद्रीय हिस्सा है।

उल्लेखनीय है कि जेजेएम 2.0 देश भर के सभी 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों को दिसंबर, 2028 तक नल-जल कनेक्शन उपलब्ध कराकर सभी ग्राम पंचायतों को ‘हर घर जल’ के प्रमाणन में सहयोग देगा।
वर्ष 2019 में नल-जल कनेक्शन वाले 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण परिवारों की आधारभूत स्थिति से अब तक जल जीवन मिशन (जेजेएम) योजना के तहत 12.56 करोड़ से अधिक अतिरिक्त ग्रामीण परिवारों को नल-जल कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। वर्तमान में देश में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा चिन्हित 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.80 करोड़ (81.61 प्रतिशत) परिवारों के पास नल-जल कनेक्शन उपलब्ध हैं।
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अनुमान लगाया है कि जेजेएम से महिलाओं के श्रमसाध्य कार्य में प्रतिदिन 5.5 करोड़ घंटे की बचत हुई है और डायरिया से होने वाली 4 लाख मौतों को रोका जा सका है।

