प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की स्थिति पर दिया संबोधन
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 24 मार्च को राज्यसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न स्थिति पर सरकार का पक्ष प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी इस युद्ध ने एक गंभीर वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न कर दिया है, जिसका भारत पर चिंताजनक प्रभाव पड़ रहा है। श्री मोदी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह संघर्ष भारत के व्यापारिक मार्गों को बाधित कर रहा है और पेट्रोल, डीजल, गैस तथा उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की नियमित आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है। खाड़ी देशों में रह रहे और वहां कार्यरत लगभग एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और जीविका का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने इसे गहरी चिंता का विषय बताया। साथ ही, उन्होंने होर्मुज़ स्ट्रेट में जहाजों पर फंसे बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्यों की स्थिति की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। सदन को आश्वस्त करते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक समुदाय को यह मजबूत संदेश देते हुए कहा कि ऐसी चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील परिस्थितियों में यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत की संसद के इस गरिमामय उच्च सदन से संपूर्ण विश्व के लिए शांति और संवाद का एक साझा एवं एकजुट स्वर गूंजे
प्रधानमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें निम्न हैं:
पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है। इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान के रूटीन सप्लाई प्रभावित हो रही है।
गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है। होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए।
युद्ध की शुरुआत के बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। हम गल्फ के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य डायलॉग और डिप्लोमेसी के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने डि-एस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी उनसे बात की है। कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है।
होर्मुज स्ट्रेट विश्व व्यापार के सबसे बड़े रूट्स में से एक
होर्मुज स्ट्रेट विश्व व्यापार के सबसे बड़े रूट्स में से एक है। विशेष तौर पर कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बहुत बड़ी मात्रा में होता है। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद से, कूटनीति के माध्यम से रास्ते बनाने का प्रयास किया है। प्रयास यह है कि जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई भारत पहुंचे। ऐसी हर कोशिश के नतीजे भी देश देख रहा है। बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं। इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगे।
भारत का प्रयास है कि तेल हो, गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचे, लेकिन इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियां अगर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो गंभीर दुष्परिणाम तय है। इसलिए भारत अपनी रेसिलियंस बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास बीते वर्षों में किए हैं, उनको और गति दे रहा है।
इकोनॉमी के फंडामेंटल्स मजबूत
वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला दिया है। अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे रिकवर होने में भी दुनिया को बहुत समय लगेगा। भारत में इसका कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। हमारे इकोनॉमी के फंडामेंटल्स मजबूत हैं और सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए है। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म ऐसे हर प्रभाव के लिए एक रणनीति के साथ काम कर रही है।
सरकार यह भी प्रयास कर रही है कि आने वाले बुवाई के सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त सप्लाई के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। सरकार का निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ ना पड़े। मैं देश के किसानों को फिर आश्वस्त करूंगा कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है।
यह राज्यों का सदन है। आने वाले समय में यह संकट हमारे देश की बड़ी परीक्षा लेने वाला है और इस परीक्षा में सफलता के लिए राज्यों का सहयोग बहुत आवश्यक है। इसलिए इस सदन के माध्यम से मैं देश के सभी राज्यों की सरकारों से भी कुछ आग्रह करना चाहता हूं। संकट के समय गरीबों पर, श्रमिकों पर, प्रवासी साथियों पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। इसलिए पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना का लाभ समय पर मिलता रहे, यह सुनिश्चित करना होगा। जहां प्रवासी श्रमिक साथी काम करते हैं, उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाए जाएं।
इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहने की प्रबल आशंका है, लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं, सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है, हर निर्णय ले रही है। देश की जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। यही हमारी पहचान है, यही हमारी ताकत है।

