जब युवा पीढ़ी अपनी सभ्यता के साथ गर्व से जुड़ जाती है, तो उसकी जड़ें और मजबूत होती हैं: नरेन्द्र मोदी

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‘कुंभ’, ‘पुष्करम’ और ‘गंगा सागर मेला’- हमारे ये पर्व – हमारे सामाजिक मेल-जोल को, सद्भाव को, एकता को बढ़ाने वाले पर्व हैं

     प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 19 जनवरी को मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 118वीं कड़ी की शुरुआत में कहा कि मैं सभी देशवासियो को ‘गणतंत्र दिवस’ की अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं। इस बार का ‘गणतंत्र दिवस’ बहुत विशेष है। ये भारतीय गणतंत्र की 75वीं वर्षगांठ है। इस वर्ष संविधान लागू होने के 75 साल हो रहे हैं। मैं संविधान सभा के उन सभी महान व्यक्तित्वों को नमन करता हूं, जिन्होंने हमें हमारा पवित्र संविधान दिया। संविधान सभा के दौरान अनेक विषयों पर लंबी-लंबी चर्चाएं हुईं। वे चर्चाएं संविधान सभा के सदस्यों के विचार, उनकी वो वाणी हमारी बहुत बड़ी धरोहर है।

श्री मोदी ने कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ का श्रीगणेश हो चुका है। चिरस्मरणीय जन-सैलाब, अकल्पनीय दृश्य और समता-समरसता का असाधारण संगम! इस बार कुंभ में कई दिव्य योग भी बन रहे हैं। कुंभ का ये उत्सव विविधता में एकता का उत्सव मनाता है। संगम की रेती पर पूरे भारत के, पूरे विश्व के लोग, जुटते हैं। हजारों वर्षों से चली या रही इस परंपरा में कहीं भी कोई भेदभाव नहीं, जातिवाद नहीं। इसमें भारत के दक्षिण से लोग आते हैं, भारत के पूर्व और पश्चिम से लोग आते हैं। कुंभ में गरीब-अमीर सब एक हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि सब लोग संगम में डुबकी लगाते हैं, एक साथ भंडारों में भोजन करते हैं, प्रसाद लेते हैं- तभी तो ‘कुंभ’ एकता का महाकुंभ है। कुंभ का आयोजन हमें ये भी बताता है कि कैसे हमारी परम्पराएं पूरे भारत को एक सूत्र में बांधती हैं। उत्तर से दक्षिण तक मान्यताओं को मानने के तरीके एक जैसे ही हैं। एक तरफ प्रयागराज, उज्जैन, नासिक और हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होता है, वैसे ही दक्षिण भू-भाग में गोदावरी, कृष्णा, नर्मदा और कावेरी नदी के तटों पर पुष्करम होते हैं। ये दोनों ही पर्व हमारी पवित्र नदियों से, उनकी मान्यताओं से जुड़े हुए हैं। इसी तरह कुंभकोणम से तिरुक्कड-यूर, कूड़-वासल से तिरुचेरई अनेक ऐसे मंदिर हैं, जिनकी परम्पराएं कुंभ से जुड़ी हुई हैं।

श्री मोदी ने कहा कि इस बार आप सबने देखा होगा कि कुंभ में युवाओं की भागीदारी बहुत व्यापक रूप में नजर आती है और ये भी सच है कि जब युवा पीढ़ी अपनी सभ्यता के साथ गर्व के साथ जुड़ जाती है, तो उसकी जड़ें और मजबूत होती हैं और तब उसका स्वर्णिम भविष्य भी सुनिश्चित हो जाता है। हम इस बार कुंभ के डिजिटल फुटप्रिंट्स भी इतने बड़े स्केल पर देख रहे हैं। कुंभ की ये वैश्विक लोकप्रियता हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।

‘पर्व’ भारत के लोगों को भारत की परंपराओं से जोड़ते हैं

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कुछ दिन पहले ही पश्चिम बंगाल में ‘गंगा सागर’ मेले का भी विहंगम आयोजन हुआ है। संक्रांति के पावन अवसर पर इस मेले में पूरी दुनिया से आए लाखों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई है। ‘कुंभ’, ‘पुष्करम’ और ‘गंगा सागर मेला’- हमारे ये पर्व – हमारे सामाजिक मेल-जोल को, सद्भाव को, एकता को बढ़ाने वाले पर्व हैं। ये पर्व भारत के लोगों को भारत की परंपराओं से जोड़ते हैं और जैसे हमारे शास्त्रों ने संसार में धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष – चारों पर बल दिया है। वैसे ही हमारे पर्वों और परम्पराएं भी आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक – हर पक्ष को भी सशक्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि इस महीने हमने ‘पौष शुक्ल द्वादशी’ के दिन रामलला के प्राण प्रतिष्ठा पर्व की पहली वर्षगांठ मनाई है। इस साल ‘पौष शुक्ल द्वादशी’ 11 जनवरी को पड़ी थी। इस दिन लाखों राम भक्तों ने अयोध्या में रामलला के साक्षात दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। प्राण प्रतिष्ठा की ये द्वादशी भारत की सांस्कृतिक चेतना की पुनः प्रतिष्ठा की द्वादशी है। इसलिए पौष शुक्ल द्वादशी का ये दिन एक तरह से प्रतिष्ठा द्वादशी का दिन भी बन गया है। हमें विकास के रास्ते पर चलते हुए ऐसे ही अपनी विरासत को भी सहेजना है, उनसे प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है।

उपग्रहों की स्पेस डॉकिंग

श्री मोदी ने कहा कि कुछ दिन पहले हमारे वैज्ञानिकों ने स्पेस सेक्टर में ही एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की। हमारे वैज्ञानिकों ने उपग्रहों की स्पेस डॉकिंग कराई है। जब अंतरिक्ष में दो स्पेसक्रॉफ्ट जोड़े जाते हैं, तो इस प्रक्रिया को स्पेस डॉकिंग कहते हैं। यह तकनीक अंतरिक्ष में स्पेस स्टेशन तक सप्लाई भेजने और क्रू मिशन के लिए अहम है। भारत ऐसा चौथा देश बना है, जिसने ये सफलता हासिल की है।

उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही स्टार्टअप इंडिया के 9 साल पूरे हुए हैं। हमारे देश में जितने स्टार्टअप्स 9 साल में बने हैं उनमें से आधे से ज्यादा Tier 2 और Tier 3 शहरों से हैं और जब यह सुनते हैं तो हर हिन्दुस्तानी का दिल खुश हो जाता है यानी हमारा स्टार्टअप कल्चर बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि छोटे शहरों के स्टार्टअप्स में आधे से ज्यादा का नेतृत्व हमारी बेटियां कर रही हैं। जब यह सुनने को मिलता है कि अंबाला, हिसार, कांगड़ा, चेंगलपट्टु, बिलासपुर, ग्वालियर और वाशिम जैसे शहर स्टार्टअप्स के सेंटर बन रहे हैं, तो ‘मन’ आनंद से भर जाता है।

देश की महान विभूति नेताजी सुभाष चंद्र बोस

श्री मोदी ने कहा कि पल-भर के लिए आप एक दृश्य की कल्पना कीजिए— कोलकाता में जनवरी का समय है। दूसरा विश्व युद्ध अपने चरम पर है और इधर भारत में अंग्रेजों के खिलाफ गुस्सा उफान पर है। इसकी वजह से शहर में चप्पे-चप्पे पर पुलिसवालों की तैनाती है। कोलकाता के बीचों–बीच एक घर के आस-पास पुलिस की मौजूदगी ज्यादा चौकस है। इसी बीच लंबा ब्राउन कोट, पैंट्स और काली टोपी पहने हुए एक व्यक्ति रात के अंधेरे में एक बंगले से कार लेकर बाहर निकलता है। मजबूत सुरक्षा वाली कई चौकियों को पार करते हुए वो एक रेलवे स्टेशन गोमो पहुंच जाता है। ये स्टेशन अब झारखंड में है। यहां से एक ट्रेन पकड़कर वो आगे के लिए निकलता है। इसके बाद अफगानिस्तान होते हुए वो यूरोप जा पहुंचता है और यह सब अंग्रेजी हुकूमत के अभेद किलेबंदी के बावजूद होता है।

उन्होंने कहा कि ये कहानी आपको फिल्मी सीन जैसी लगती होगी। आपको लग रहा होगा, इतनी हिम्मत दिखाने वाला व्यक्ति आखिर किस मिट्टी का बना होगा। दरअसल, ये व्यक्ति कोई और नहीं, हमारे देश की महान विभूति नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे। 23 जनवरी यानी उनकी जन्म-जयंती को अब हम ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाते हैं। उनके शौर्य से जुड़ी इस गाथा में भी उनके पराक्रम की झलक मिलती है।

श्री मोदी ने कहा कि सुभाष बाबू एक विजनरी थे। साहस तो उनके स्वभाव में रचा-बसा था। इतना ही नहीं, वे बहुत कुशल प्रशासक भी थे। महज 27 साल की उम्र में वो कोलकाता कॉर्पोरेशन के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर बने और उसके बाद उन्होंने मेयर की जिम्मेदारी भी संभाली। एक प्रशासक के रूप में भी उन्होंने कई बड़े काम किए। बच्चों के लिए स्कूल, गरीब बच्चों के लिए दूध का इंतजाम और स्वच्छता से जुड़े उनके प्रयासों को आज भी याद किया जाता है।

उन्होंने कहा कि मैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस को नमन करता हूं। देशभर के युवाओं से मेरा आग्रह है कि वे उनके बारे में अधिक से अधिक पढ़ें और उनके जीवन से निरंतर प्रेरणा लें।