श्री ए.के. लिंगावेलु साल 1939 में रोजगार की तलाश में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह आए, वह तब 12 वर्ष के थे। यहां उन्होंने पोर्ट ब्लेयर में अपने चाचा की दुकान पर काम करना शुरू किया। इस दौरान वह हिंदुत्व की विचारधारा से आकर्षित हुए और उनका जुड़ाव विश्व हिंदू परिषद् से हुआ।
एक समय था, जब कांग्रेस के डर के कारण कोई भी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भाजपा का नेतृत्व करने के लिए तैयार नहीं था। इसी दौरान श्री लिंगावेलु ने वर्ष 1990 में भाजपा के संस्थापक-अध्यक्ष दयित्व ग्रहण करने का साहस दिखाया। उन्हें कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष धमकियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, श्री लिंगावेलु ने अंडमान द्वीप समूह में भाजपा को मजबूत करने की दिशा में काम करना जारी रखा।


