सेवा, दृष्टिकोण एवं ‘राष्ट्र प्रथम’ से प्रेरित एक नेतृत्व यात्रा

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सेवा के 8931 दिन

     माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 22 मार्च, 2026 को सरकार के प्रमुख के रूप में 8,931 दिन पूरे करके एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। दो दशकों से अधिक समय तक चली यह असाधारण यात्रा, केवल अपने कार्यालय में समय पूर्ण करने का रिकॉर्ड मात्र नहीं है, बल्कि यह अथक समर्पण, अटूट प्रतिबद्धता एवं जनसेवा को समर्पित जीवन का प्रतिबिंब है।

गुजरात के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री होने से लेकर 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार तीन जनादेश हासिल करने तक— यह उपलब्धि निरंतरता, स्थिरता और परिवर्तनकारी नेतृत्व का प्रतीक है। यह एक ऐसी यात्रा है जिसे जनविश्वास ने आकार दिया है और जिसे एक अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण ने आगे बढ़ाया है। भारत को केवल एक प्रधानमंत्री ही नहीं मिला, बल्कि श्री नरेन्द्र मोदी के रूप में उसे एक ‘प्रधान सेवक’ मिला।

एक दूरदृष्टा और एक संस्था

श्री नरेन्द्र मोदी केवल एक नेता ही नहीं, बल्कि वह एक दूरदर्शी नेता और अपने आप में एक संस्था हैं; जिन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री और भारत के प्रधानमंत्री, दोनों पदों पर राष्ट्र हित के लिए निरंतर कार्य किया है। भूकंप आपदा के बाद प्रदेश का पुनर्निर्माण, नर्मदा जल प्रबंधन, कृषि विकास, ‘वाइब्रेंट गुजरात’, बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, स्टार्टअप्स और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलें उनकी दूरदृष्टि के उदाहरण हैं। प्रधानमंत्री के रूप में श्री नरेन्द्र मोदी ने जन कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और सभी के लिए सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण, समाज के कमजोर वर्गों का कल्याण तथा किसानों, श्रमिकों एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक नेतृत्व, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और सांस्कृतिक संवर्धन के माध्यम से राष्ट्र को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।

एक व्यक्ति से कहीं बढ़कर

जनसेवा के प्रति प्रधानमंत्री श्री मोदी की प्रतिबद्धता एवं समर्पण के विभिन्न उदाहरण हैं। ऐसी ही एक घटना में जब प्रधानमंत्री जी की पूजनीय माताजी का निधन हुआ, उस दिन वह तमिलनाडु के दौरे पर थे। खबर मिलते ही श्री मोदी गांधीनगर गए और अपनी माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद उनका अंतिम संस्कार अत्यंत सादगीपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। इससे पहले कि कोई और कदम उठाया जाता, यह ज्ञात हुआ कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का एक पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम था, जिसके तहत उन्हें एक रेलवे कार्यक्रम में शामिल होना था, उन्होंने ठीक वैसा ही किया और इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। इस घटना को एक असाधारण उदाहरण के रूप में वर्णित किया गया। एक पुत्र के लिए माता का वियोग सबसे गहरे व्यक्तिगत दु:खों में से एक होता है और यह ऐसी घटना नहीं है कि जिसे आसानी से भूलाया जा सके। फिर भी, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनका व्यक्तिगत शोक राष्ट्रीय कर्तव्य पर हावी न हो, श्री नरेन्द्र मोदी ने निर्देश दिया कि कोई भी अपना काम छोड़कर वहां न आए और वह स्वयं अपने आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन करते रहे। प्रधानमंत्री ने मात्र दो से तीन दिनों के अंतराल में तीन-चार देशों का दौरा किया और स्वदेश लौटने पर भी वह तुरंत बाद बिना किसी विश्राम के पुनः अपने कार्य में जुट गए।

राष्ट्र सर्वोपरि

श्री नरेन्द्र मोदी की बुनियादी प्रेरणा हमेशा से देशभक्ति रही है। उन्होंने राष्ट्र को सर्वोपरि मना है और हमेशा ही राष्ट्र को प्रथम प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री भारत माता के सच्चे सपूत, राष्ट्र के उपासक और जनता के सेवक हैं। उनके काम के पीछे हमेशा यही मुख्य प्रेरक शक्ति रही है। एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के तौर पर उन्होंने पूरे गुजरात में लोगों के दिलों में भारतीय जनता पार्टी की जड़ों को मजबूत करने के लिए जबरदस्त प्रयास किए।

उस दिन को भी याद किया जाता है जब भुज एवं कच्छ में विनाशकारी भूकंप आया था। उस समय श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने पुनर्निर्माण के बेहद चुनौतीपूर्ण काम को इस तरह से अंजाम दिया कि भुज एवं कच्छ फिर से उठ खड़े हुए और पूरी तरह बदल गए। दुनिया भर की सरकारों और संगठनों ने इस पुनर्निर्माण को एक ‘केस स्टडी’ के तौर पर स्वीकार किया है। यह प्रयास केवल राजनीतिक नहीं था; यह राष्ट्रीय पुनर्निर्माण, जन कल्याण, गरीबों की सेवा और एक ‘विकसित गुजरात’ तथा ‘विकसित भारत’ बनाने के उद्देश्य से की गई पहल का एक उदाहरण था। गुजरात कभी पानी की कमी, भीषण सूखे और नर्मदा के पानी के समुद्र में बह जाने की समस्या से जूझता था। लोगों ने लंबे समय से सरदार सरोवर बांध के बारे में सुन रखा था, लेकिन राजनीति के चलते अक्सर प्रगति में देरी होती रही। हालांकि, श्री मोदी की दूरदृष्टि और नेतृत्व के परिणामस्वरूप नर्मदा का पानी गुजरात के लोगों तक पहुंचा और उनके खेतों की सिंचाई हुई। मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि एक ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे नर्मदा का पानी गुजरात तक पहुंचे और साथ ही राष्ट्र को भी लाभ हो; जिससे मध्य प्रदेश को बिजली और पानी तथा गुजरात को भी पानी मिल सके।

गुजरात ने नई ऊंचाइयां छुईं

साबरमती नदी, जिसके किनारों पर कभी बापू ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाई थी, पहले सूखी रहती थी; लेकिन आज साबरमती एक जीवंत और निरंतर धारा के रूप में बहती है और इसका पानी गुजरात की कई अन्य नदियों तक पहुंचाया गया है। यदि नदी-जोड़ो परियोजना का सपना कहीं सचमुच साकार हुआ है, तो वह श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ही हुआ है। भला कौन कल्पना कर सकता था कि पानी सुदूर कच्छ और भुज तक पहुंच जाएगा? गुजरात के वे गांव, जो कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते थे, आज हरे-भरे और समृद्ध क्षेत्रों में बदल चुके हैं। कृषि विकास ने भी नई ऊंचाइयां छुई हैं। गुजरात को कभी मुख्य रूप से एक व्यापारिक राज्य के तौर पर जाना जाता था; लेकिन ‘कृषि महोत्सव’, ‘मृदा स्वास्थ्य परीक्षण’, आवश्यक पोषक तत्वों पर आधारित फसल और उर्वरक नियोजन तथा आधुनिक वैज्ञानिक कृषि तकनीकों को अपनाने जैसी पहलों के माध्यम से राज्य की कृषि विकास दर एक दशक से भी अधिक समय तक 8 प्रतिशत से ऊपर बनी रही। यह बात कल्पना से भी परे थी, विशेषकर ऐसे समय में जब राष्ट्रीय औसत कृषि विकास दर मात्र 2-3 प्रतिशत के आसपास ही सिमटी हुई थी। न केवल पारंपरिक फसलें, बल्कि अधिक मूल्य वाली फसलें भी, साथ ही प्रसंस्करण और विनिर्माण क्षेत्र— गुजरात को आर्थिक गतिविधियों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में रूपांतरित करने में सहायक सिद्ध हुए हैं।

जब श्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब केंद्र में कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार सत्ता में थी। उस दौर में निवेशकों को अक्सर गुजरात न जाने की सलाह दी जाती थी। तथापि, उद्योगपतियों और निवेशकों ने राज्य पर अपना भरोसा कायम रखा; उन्हें विश्वास था कि वहां वास्तविक और लाभकारी निवेश करना संभव है। पर्यटन के क्षेत्र में भी गुजरात एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा। ‘कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में’ जैसे अभियानों ने— साथ ही ‘रण उत्सव’ (कच्छ) और ‘पतंग महोत्सव’ जैसे आयोजनों ने— इस राज्य को और भी अधिक आकर्षक बना दिया। इसी को ‘गुजरात मॉडल’ के नाम से जाना गया, जिसकी चर्चा पूरे देश और दुनिया भर में हुई।

आशा और विश्वास के प्रतीक के रूप में उभरे

2004 से 2013 तक के साल एक ऐसे अंधकारमय दौर के गवाह बने, जब हर तरफ घोटालों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सुनाई दे रहे थे। बेईमानी, भ्रष्टाचार और नीतिगत पंगुता ने देश की छवि को परिभाषित करना शुरू कर दिया था और जनता हताशा तथा निराशा से भर चुकी थी। निराशा के उस माहौल में श्री नरेन्द्र मोदी आशा और विश्वास के प्रतीक के रूप में उभरे। 2014 में दुनिया ने आश्चर्य के साथ देखा कि गठबंधन की राजनीति का दौर समाप्त हुआ और श्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाई। हालांकि, हम एनडीए का हिस्सा थे, लेकिन 30 साल बाद यह पहला मौका था जब किसी एक पार्टी ने बहुमत हासिल किया था। लोगों के बीच यह दृढ़ विश्वास था कि ‘मोदी है तो मुमकिन है।’ इसके बाद प्रगति और विकास का एक नया युग शुरू हुआ, जिसे अक्सर ‘मोदी युग’ कहा जाता है। जो कभी असंभव प्रतीत होता था, वह अब प्राप्त करने योग्य लगने लगा। राष्ट्रीय राजमार्गों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, रेलवे, मेट्रो प्रणालियों और यहां तक कि बुलेट ट्रेनों के इर्द-गिर्द चर्चाओं ने आकार लेना शुरू कर दिया था, बुनियादी ढांचे का ऐसा विस्तार हुआ जिसकी लोगों ने पहले कभी कल्पना भी नहीं की थी। ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टैंड-अप इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों ने निवेश, आशावाद और विश्वास का माहौल तैयार किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में समाज के हर वर्ग के कल्याण को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता भी जताई गई।

गरीब कल्याण

गरीब कल्याण एक मुख्य प्रतिबद्धता है और इसी उद्देश्य के साथ कई योजनाएं शुरू की गई। चाहे वह खाद्य सुरक्षा हो या आवास। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल घर उपलब्ध कराए, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि वे सभी आवश्यक सुविधाओं से सुसज्जित हों। आवास के साथ-साथ, सड़कें, बिजली के कनेक्शन, नल से जल, उज्ज्वला कनेक्शन और आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त स्वास्थ्य सेवा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। पीएम सूर्य योजना के माध्यम से घरों में बिजली की पहुंच भी सुनिश्चित की गई है। एनडीए सरकार के पिछले 11 वर्षों में भारत में लगभग 25 करोड़ लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकला है। यह एक व्यापक प्रतिबद्धता को दिखाता है, जिसमें गरीबों को ‘नारायण’ के रूप में स्वीकार किया गया और उनके कल्याण के सभी पहलुओं का ध्यान रखा गया।

किसानों का कल्याण

किसानों के कल्याण के संबंध में पीएम किसान सम्मान निधि, उत्पादन की सही लागत पर आधारित एमएसपी, नुकसान होने पर फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 25 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संस्थागत ऋ ण तथा किसानों के लिए पेंशन जैसी पहलें की गई। अब देश केवल गेहूं और चावल पर ही निर्भर नहीं है। इसलिए, फसल विविधीकरण, नकदी फसलों की खेती, उर्वरक सब्सिडी और ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ जैसी पहलों ने कृषि क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की है, जिसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में भारी वृद्धि हुई है।

महिलाओं का कल्याण

लड़कियों की शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। गुजरात में एक समय लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर बहुत अधिक थी। मुख्यमंत्री के तौर पर श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं गांवों का दौरा किया और अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का काम सौंपा कि कोई भी लड़की स्कूल जाने से वंचित न रहे। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए साइकिल, स्कूल बैग और यूनिफॉर्म जैसी सुविधाएं दी गईं। बाद में यह पहल ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान में बदल गई। महिलाओं के कल्याण के लिए आवास सहायता, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और ‘लखपति दीदी’ पहल लागू की गईं।

प्रधानमंत्री ने 2027 तक तीन करोड़ ‘लखपति दीदियों’ को तैयार करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन यह लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिया गया। अब इस लक्ष्य को बढ़ाकर छह करोड़ ‘लखपति दीदियों’ तक पहुंचाने का निर्णय किया गया है। श्री नरेन्द्र मोदी ने महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक सशक्तीकरण का एक नया अध्याय लिखा है। ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत अब राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। देश के युवा उत्साह से भरे हुए हैं, लगातार नए स्टार्टअप शुरू हो रहे हैं और सरकारी नौकरियों में 10 लाख से अधिक नियुक्ति पत्र पहले ही बांटे जा चुके हैं।

राष्ट्र और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद को भी करारा जवाब दिया गया है। चाहे सर्जिकल स्ट्राइक हो, हवाई हमले हों, या ‘ऑपरेशन सिंदूर’— प्रधानमंत्री श्री मोदी को अंतरराष्ट्रीय समुदाय में मित्रों के प्रति फूल जैसा कोमल और शत्रुओं के विरुद्ध वज्र से भी अधिक कठोर बताया गया है। किसी को भी अनावश्यक रूप से उकसाया नहीं जाता, लेकिन राष्ट्र के सामने आने वाली किसी भी चुनौती का सामना पूरी दृढ़ता से किया जाता है।

नक्सलवाद अब समाप्त होने की कगार पर है, जिसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट है: राष्ट्र और राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि हैं।

भारतीय दर्शन, संस्कृति और मूल्यों के प्रति गहरा सम्मान

श्री मोदी ने न केवल विकास पर ध्यान केंद्रित किया है, बल्कि राष्ट्र की विरासत को संरक्षित और बढ़ावा भी दिया है। उनके मन में भारतीय दर्शन, संस्कृति, मूल्यों और परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान है। यह काशी कॉरिडोर के निर्माण, महाकाल मंदिर परिसर के विकास, देश भर में विभिन्न धार्मिक स्थलों के उन्नयन, डॉ. बी.आर. अंबेडकर से जुड़े ‘पंच तीर्थ’ के जीर्णोद्धार और जनजातीय नायक भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने जैसी पहलों में परिलक्षित होता है। ये सभी पहलें सांस्कृतिक पुनरुद्धार की एक निरंतर शृंखला का निर्माण करती हैं। अयोध्या में प्रभु श्री राम का एक भव्य मंदिर निर्मित किया गया, अनुच्छेद 370 को समाप्त किया गया और कई राज्यों में ‘समान नागरिक संहिता’ का कार्यान्वयन शुरू हो चुका है। जो कार्य कभी असंभव प्रतीत होते थे, श्री मोदी के नेतृत्व में वे अब संभव हो गए हैं।

हर दिशा में विकास

पिछले 11 वर्षों में हर दिन दो नए कॉलेज खुले, हर सप्ताह एक नई यूनिवर्सिटी, हर साल आठ नए हवाई अड्डे और हर साल तीन नए मेट्रो मार्गों का उद्घाटन हुआ। औसतन, हर दिन 30 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग पूरे किए गए और हर दिन 22 से अधिक स्टार्टअप शुरू किए गए। आजादी के सत्तर साल बाद केवल पांच एम्स थे, लेकिन प्रधानमंत्री के 10 साल के नेतृत्व में 15 नए एम्स स्थापित किए गए हैं। पूरे देश में हर दिशा में विकास श्री मोदी के असाधारण नेतृत्व की वजह से ही संभव हो पाया है।

एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन के रूप में ‘स्वच्छता’

प्रधानमंत्री केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक समाज सुधारक भी हैं। उन्होंने स्वच्छता को एक ऐसे राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप दिया, जो देश के हर नागरिक तक पहुंचा। वृक्षारोपण के उनके आह्वान के बाद लाखों पेड़ लगाए गए। यहां तक कि कोविड-19 के दौरान भी लोगों ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अपीलों पर पूरे उत्साह और एकता के साथ प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री अपनी हर अपील को सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचाने में सफल रहे हैं।

लोगों को एकजुट करने वाले सच्चे नेता

2002, 2007, 2012, 2014, 2019 & 2024 में मिला लगातार जनादेश

श्री मोदी लोगों को एकजुट करने वाले सच्चे नेता हैं; उनमें समाज को एक साथ लाने की एक असाधारण और अभूतपूर्व क्षमता है। उन्होंने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से समाज के हर वर्ग को आपस में जोड़ा है। ‘मन की बात’ केवल सरकारी पहलों की प्रशंसा करने तक ही सीमित नहीं है; यह उन गुमनाम नायकों को भी सामने लाती है, जो पूरे देश और समाज में असाधारण काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इन गुमनाम नायकों को मुख्यधारा में लाकर राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को दुनिया के सामने रखा है और उन्हें सम्मानित किया है। पद्म पुरस्कार इस बदलाव का एक बेहतरीन उदाहरण हैं। पहले इन पुरस्कारों पर भाई-भतीजावाद का असर रहता था, लेकिन अब पूरे देश से उभरने वाली प्रतिभाओं को उनके असाधारण योगदान के लिए पहचान मिल रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस से लेकर अमर क्रांतिकारी श्यामजी कृष्ण वर्मा तक राष्ट्र के नायकों को उनका उचित सम्मान दिया गया है। गुलामी और औपनिवेशिक अधीनता के प्रतीकों को व्यवस्थित तरीके से हटा दिया गया है। दशकों तक देश ने औपनिवेशिक शासन के इन अवशेषों को ढोया और जनता के लिए यह समझना मुश्किल था कि आखिर पिछली सरकारों ने ऐसा क्यों किया।

‘आत्मनिर्भर भारत’

श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र में पूर्ण आत्मविश्वास और आत्म-सम्मान को पुनः स्थापित किया है। ‘आत्मनिर्भर भारत’ केवल एक नारा नहीं है; यह हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का एक लक्ष्य है। खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित की गई है। पहले, देश पीए-480 गेहूं पर निर्भर था, लेकिन अब भारत दुनिया को खाद्य सामग्री निर्यात करने में सक्षम है। प्रधानमंत्री ने संकटों को अवसरों में बदलने की क्षमता भी प्रदर्शित की है, जैसाकि कोविड-19 के दौरान ‘एग्री इंफ्रा फंड’ के निर्माण और वैक्सीन उत्पादन के माध्यम से देखा गया। यह उसी असाधारण और दूरदर्शी नेतृत्व का परिचायक है, जो श्री मोदी की पहचान है।

एक ऐसी यात्रा जो पूरे देश को प्रेरित करती है

श्री नरेन्द्र मोदी जैसा नेतृत्व मिलना देश के लिए बड़े गर्व की बात है। आज भारत न केवल रक्षा उपकरण का उत्पादन रहा है, बल्कि उनका निर्यात भी शुरू कर चुका है; जबकि पहले हमारा ध्यान केवल सौदों पर ही केंद्रित रहता था। यह भी बताया गया कि अतीत में सरकारें अक्सर दोबारा सत्ता में नहीं लौट पाती थीं, लेकिन अब सरकारें लगातार जीत हासिल करते हुए दोबारा चुनी जा रही हैं। वर्ष 2013-14 तक, भारतीय जनता पार्टी की सरकारें केवल पांच राज्यों में थीं, जबकि आज उसने मणिपुर, त्रिपुरा, असम और ओडिशा सहित 14 राज्यों में सीधे तौर पर अपनी सरकार बनाई है और 19 राज्यों में एनडीए सत्ता में है। इसका श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की जनता के बीच व्यापक स्वीकार्यता को दिया गया। इसे ‘पॉलिटिक्स ऑफ परफॉरमेंस’ का परिणाम बताया गया, जिसमें जाति-आधारित या विभाजनकारी राजनीति के बजाय विकास को प्राथमिकता दी गई है। इस बदलाव का श्रेय श्री मोदी के नेतृत्व को दिया गया।

8,931 दिनों की अथक सेवा

8,931 दिनों की अथक सेवा के बाद श्री नरेन्द्र मोदी की यात्रा सेवा, संकल्प और समर्पण का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरी है। यह केवल एक नेता की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे राष्ट्र की कहानी है जो स्वयं को रूपांतरित कर रहा है। एक ऐसी यात्रा है जहां सुशासन का मिलन उद्देश्य से होता है और नेतृत्व ही सेवा बन जाता है। आज का भारत पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास से भरा, अधिक सक्षम और अधिक आकांक्षी है।

जैसे-जैसे भारत एक ‘विकसित राष्ट्र’ बनने की राह पर आगे बढ़ रहा है, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि और नेतृत्व इस यात्रा को निरंतर दिशा प्रदान कर रहे हैं। एक ‘विकसित भारत’ का स्वप्न— जो समृद्ध, सशक्त, आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर सम्मानित हो— अब धीरे-धीरे वास्तविकता का रूप ले रहा है।

मोदीजी का 8931 दिनों का सार्वजनिक जीवन निरंतर तप, त्याग और राष्ट्रसेवा का सशक्त उदाहरण है : नितिन नवीन

     भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने अपने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “एक सतत यात्रा, लोक कल्याण के 8931 दिन! भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी का 8931 दिनों का सार्वजनिक जीवन केवल एक राजनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि निरंतर तप, त्याग और राष्ट्रसेवा का सशक्त उदाहरण है, जहां प्रत्येक दिन राष्ट्र के नाम समर्पित रहा है।

गुजरात के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने विकास एवं सुशासन का एक सशक्त मॉडल स्थापित किया। देश के ऐसे प्रधानमंत्री, जिनके पास मुख्यमंत्री के रूप में सबसे लंबा अनुभव रहा, उन्होंने शासन को केवल प्रशासन तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बनाया।

प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के संकल्प के साथ देश ने आधारभूत संरचना विस्तार, डिजिटल क्रांति, प्रभावी जनकल्याणकारी योजनाओं और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में तेज़ प्रगति की है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना से वित्तीय समावेशन, उज्ज्वला योजना से सम्मानजनक जीवन, आयुष्मान भारत से स्वास्थ्य सुरक्षा और प्रधानमंत्री आवास योजना से करोड़ों परिवारों को पक्के घर मिले, अंत्योदय के संकल्प को साकार करते हुए अंतिम पंक्ति तक लाभ पहुंचा।

लगातार तीन लोकसभा चुनाव 2014, 2019 एवं 2024 में प्राप्त ऐतिहासिक जनादेश उनके प्रति देशवासियों के अटूट विश्वास का प्रमाण है। साथ ही, सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन चामलिंग के लंबे कार्यकाल को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने सार्वजनिक जीवन में समर्पण, स्थायित्व एवं निरंतरता का नया कीर्तिमान स्थापित किया।

उनके नेतृत्व में भारत का वैश्विक मान बढ़ा है और ‘विकसित भारत’ एक जनभागीदारी आधारित राष्ट्रीय अभियान के रूप में स्थापित हुआ है। ‘राष्ट्रप्रथम’ की भावना से प्रेरित यह कार्यकाल अनेक उच्च मापदंड स्थापित करता है, जो हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।”

राष्ट्र और उसके लोगों के प्रति विशुद्ध समर्पण ही प्रधानमंत्री मोदी जी की पहचान है: राजनाथ सिंह

     रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अब भारत में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले सरकार के प्रमुख बन गए हैं। राष्ट्र और उसके लोगों के प्रति पूर्ण समर्पण ही प्रधानमंत्री मोदी जी की पहचान है। गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर उनके अडिग संकल्प से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में उनके समर्पित नेतृत्व तक उनका जीवन सेवा की एक निरंतर यात्रा रहा है।

आज, उन्होंने सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। सरकार के प्रमुख के तौर पर सार्वजनिक पद पर 8,931 दिन पूरे करना, यह क्षण ‘राष्ट्र-प्रथम’ शासन, कार्यों में ईमानदारी और हर नागरिक की नि:स्वार्थ सेवा के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाता है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर मोदी जी को हार्दिक बधाई।”

मोदी युग ने भारत को बदल दिया: अमित शाह

     केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने ‘एक्स’ पर लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी जी की दशकों की सेवा ने अपने आप में एक नया युग रच दिया है। चाहे वह गरीबों को उनके अधिकार दिलाना हो, विकास के नए कीर्तिमान स्थापित करना हो, या वैश्विक मंचों पर देश का गौरव बढ़ाना हो— मोदी युग ने भारत को पूरी तरह से बदल दिया है। इस ‘नए भारत’ को गढ़ने के लिए जीवन भर के अथक प्रयासों की आवश्यकता थी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने वे प्रयास किए।

24 वर्षों से भी अधिक समय तक बिना एक भी छुट्टी लिए देश और देशवासियों की सेवा करना, उनके अटूट समर्पण का ही एक प्रमाण है। यही कारण है कि उन्हें जनता से अभूतपूर्व स्नेह प्राप्त हुआ— तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में और तीन बार भारत के प्रधानमंत्री के रूप में। उनके प्रति लोगों का विश्वास, स्नेह और समर्थन—हर बीतते दिन के साथ और भी बढ़ता गया है।”

राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण : जगत प्रकाश नड्डा

     केंद्रीय मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने ‘एक्स’ पर लिखा, “‘राष्ट्र के लिए गौरव का क्षण’ आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के 8,930 दिनों के रिकॉर्ड को पार कर सबसे लंबे समय तक जनसेवा करने वाले प्रधानसेवक बन गये हैं।

गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जनसेवा से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का उनका संकल्प, नेतृत्व क्षमता और कौशल हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

जनसेवा के प्रत्येक क्षण मां भारती के प्रति उनकी गहरी निष्ठा और सेवा-समर्पण के अटूट संकल्प को दर्शाते हैं। उनके नेतृत्व में हमारा देश ‘विकसित भारत’ के रूप में तेजी से अग्रसर है। गरीब, युवा, नारी और किसान सशक्तीकरण वाली जन-केंद्रित नीतियों से आज भारत वैश्विक पटल पर अधिक आत्मविश्वासी और प्रभावशाली होकर उभरा है।

प्रधानमंत्री मोदीजी का नेतृत्व और संकल्प, राष्ट्रप्रथम की भावना एवं धरातल पर वास्तविक परिवर्तन लाने का प्रतीक है।”