संसद का शीतकालीन सत्र, जो 19 दिसंबर, 2025 को संपन्न हुआ, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की ‘विकसित भारत 2047’ की दृष्टि एवं उसके प्रति अटूट संकल्प का एक जीवंत उदाहरण है। विपक्षी दलों के बार-बार हंगामे के बावजूद लोकसभा की उत्पादकता 110 प्रतिशत तथा राज्यसभा की उत्पादकता 121 प्रतिशत रही। इस सत्र में निर्णायक विधायी कार्य, परिवर्तनकारी एवं भविष्योन्मुखी सुधारों के लिए सुस्पष्ट कदम उठाए गए। सबसे परिवर्तनकारी निर्णय, ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक 2025 विकसित भारत – जी राम जी का पारित होना रहा। दो दशक पुराने मनरेगा के स्थान पर आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण के लिए यह विधेयक नए कानूनी प्रावधानों एवं आधुनिक आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप ग्रामीण रोजगार, 125 दिनों के रोजगार की गारंटी के साथ परिसंपत्ति निर्माण तथा कौशल विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा। शांति विधेयक 2025 एक ऐसा महत्वपूर्ण विधेयक है जिसे पारित कर संसद ने असैनिक परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में निजी भागीदारी को सुनिश्चित किया है। यह ऊर्जा सुरक्षा एवं स्वच्छ ऊर्जा तथा भारत के औद्योगिक विकास एवं
पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी 101वीं जयंती पर याद करते हुए इस दिन को पूरे देश ने ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया। वे भारत के सर्वाधिक प्रिय नेता थे, जो अपनी दूरदृष्टि, वाक्पटुता तथा राजनीतिक विभाजन के मध्य सामंजस्य स्थापित करने के लिए जाने जाते थे
विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक है और उस दिशा में यह एक बड़ा कदम है। आर्थिक क्षेत्र में सबका बीमा, सबकी सुरक्षा (बीमा कानून में संशोधन) विधेयक 2025 से बड़ा बदलाव होगा। बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश सीमा को 100 प्रतिशत कर इस क्षेत्र की व्यापक पहुंच, सुलभ प्रिमियम दर, इस क्षेत्र में बड़ी वैश्विक पूंजी की संभावना एवं हर नागरिक की बीमा सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। साथ ही, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर विधेयक 2025 के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा के लिए वर्तमान वित्तीय व्यवस्था से समझौता किए बिना आवश्यक संसाधन जुटाए जा सकेंगे।
यह सत्र केवल विधायी कार्यों तक सीमित नहीं रहा, इस दौरान वंदेमातरम् एवं चुनाव सुधारों पर हुई व्यापक चर्चा से देश में सकारात्मक एवं रचनात्मक वातावरण का निर्माण हुआ। जहां सरकार ने एसआईआर (SIR) के विषय पर विपक्ष की शंकाओं को अपने सटीक एवं तथ्यपरक उत्तर से निर्मूल साबित कर दिया, वहीं ‘वंदे मातरम्’ पर हुई चर्चा में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ ऐतिहासिक निरंतरता, सभ्यतागत विमर्श एवं राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता रेखांकित हुई। शीतकालीन सत्र 2025 केवल पारित हुए विधेयकों के लिए ही नहीं बल्कि एक व्यापक ऊर्जा सुरक्षा एवं आर्थिक रूप से समृद्ध भारत की संरचना सुनिश्चित करने के लिए भी याद किया जाएगा।
पूर्व प्रधानमंत्री ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को उनकी 101वीं जयंती पर याद करते हुए इस दिन को पूरे देश ने ‘सुशासन दिवस’ के रूप में मनाया। वे भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं में से एक थे, जो अपनी दूरदृष्टि, वाक्पटुता तथा राजनीतिक विभाजन के मध्य सामंजस्य स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं। प्रधानमंत्री (1996, 1998-2004) के रूप में उन्होंने भारत की राजनयिक एवं सामरिक दृष्टिकोण को पुनर्परिभाषित किया, 1998 के पोखरण-II परीक्षण से भारत की सुरक्षा, संप्रभुता को सुदृढ़ किया तथा साथ ही निरंतर संवाद से उन्होंने शक्ति एवं शांति के सह-अस्तित्व पर बल दिया। उनकी सरकार ने अवसंरचना तथा संपर्क को राष्ट्र-निर्माण का माध्यम माना तथा स्वर्णिम चतुर्भुज एवं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से लोगों और सेवा एवं वस्तुओं के आवागमन से व्यापक आर्थिक तंत्र का विकास किया। अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में उनका कार्यकाल निरंतर सुधार एवं तकनीक पर बल, टेलिकम्युनिकेशन का व्यापक विस्तार तथा सामाजिक क्षेत्रों में अभिनव पहल के लिए जाना जाता है। नीतियों के अलावा, अटलजी का योगदान जनसंवाद के स्तर को ऊंचा उठाने में, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण विषयों पर उनकी अद्भुत पकड़, संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनका आदर तथा देश के लिए जन-जन की एकता का उनका समावेशी मंत्र अविस्मरणीय है। उनका नेतृत्व लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक मर्यादाओं एवं जनसेवा की अनमोल विरासत की थाती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें सुशासन को जमीन पर उतारने का श्रेय दिया है। कमल संदेश परिवार उनकी 101वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।
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