केंद्रीय बजट 2026-27 इक्कीसवीं सदी के दूसरे चरण के प्रारंभ में एक निर्णायक कदम है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदृष्टि और नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है, जो भारत को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर निरंतर अग्रसर कर रहा है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत यह ‘युवा शक्ति’ संचालित बजट प्रधानमंत्री के ‘राष्ट्र-प्रथम’ मार्गदर्शक मंत्र में दृढ़ता से निहित है, जिसमें सतत राजकोषीय संयम और साहसिक आर्थिक परिवर्तन का प्रभावी समन्वय दिखाई देता है। कुल 53,47,315 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान करते हुए- जो 7.7 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है – यह बजट ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए विकास को नई गति प्रदान करता है।
यह ‘युवा शक्ति’ संचालित बजट प्रधानमंत्री के ‘राष्ट्र-प्रथम’ मार्गदर्शक मंत्र में दृढ़ता से निहित है, जिसमें सतत राजकोषीय संयम और साहसिक आर्थिक परिवर्तन का प्रभावी समन्वय दिखाई देता है
बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, नवाचार और मानव पूंजी में रणनीतिक निवेश का प्रावधान भारत के युवाओं को सशक्त बनाने, घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने और पूरे देश में सतत रोजगार सृजित करने के प्रति केन्द्र सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है। यह उल्लेखनीय है कि व्यापक आर्थिक प्रबंधन के प्रति सरकार के अनुशासित दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप राजकोषीय घाटा घटकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.3 प्रतिशत पर आ गया है। यह राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की एक विश्वसनीय दिशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत की विकास यात्रा लचीली, संतुलित और भविष्य के लिए तैयार बनी रहे। एक स्थिर वातावरण प्रदान करते हुए और अवसरों के विस्तार के साथ केंद्रीय बजट 2026–27 ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ की भावना को साकार करता है तथा तेजी से बदलते और अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य में भारत के एक स्थिर, सशक्त और विश्वसनीय आर्थिक विकास इंजन के रूप में उभरने को सुनिश्चित करता है।
यह ध्यान देने योग्य है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सशक्त नेतृत्व में भारत ने वित्तीय वर्ष 2026 में 7.4 प्रतिशत जीडीपी विकास दर और 7.3 प्रतिशत जीवीए विकास दर दर्ज करते हुए विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति सुदृढ़ की है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 मोदी सरकार की सुधार-आधारित विकास रणनीति को रेखांकित करता है, जो व्यापक आर्थिक स्थिरता, लचीली घरेलू मांग और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) संचालित विस्तार पर विशेष जोर देता है। यह रणनीति निजी निवेश को आकर्षित करते हुए उत्पादकता-आधारित रोजगार सृजन, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के विस्तार और राजकोषीय विवेक को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है, जिससे भारत वैश्विक आर्थिक मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित हो रहा है। चूंकि विकास निर्णायक रूप से घरेलू मांग से प्रेरित है- जिसमें मजबूत निजी खपत और निवेश की महत्वपूर्ण भूमिका है – इस परिदृश्य में सेवा क्षेत्र अग्रणी बना हुआ है, उद्योग में तेजी देखी जा रही है और संबद्ध क्षेत्रों के माध्यम से कृषि की बढ़ती गतिशीलता इसकी पुष्टि करती है। सरकार की पूंजीगत व्यय-आधारित विकास रणनीति, कर उछाल, सब्सिडी का युक्तीकरण और वित्तीय क्षेत्र की सफाई ने बैंकों को सुदृढ़ किया है, एमएसएमई ऋण के विस्तार को गति दी है और निजी क्षेत्र के विश्वास को पुनः स्थापित किया है। विनिर्माण, डिजिटल और सेवा क्षेत्रों में महाशक्ति के रूप में भारत का उभरना, जलवायु प्रतिबद्धताओं पर हुई प्रगति और रिकॉर्ड निर्यात, निर्भरता से रणनीतिक लचीलेपन और वैश्विक अपरिहार्यता की ओर मोदी सरकार के दृष्टिकोण में आए परिवर्तन को दर्शाते हैं, जो सशक्त राज्य क्षमता और सुधार-आधारित शासन में निहित है। सोलहवां वित्त आयोग सहकारी संघवाद के प्रति मोदी सरकार के दृष्टिकोण को प्रतिस्पर्धी सौदेबाजी के बजाय साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी के रूप में प्रस्तुत करता है। विभाज्य पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 41 प्रतिशत बनाए रखते हुए यह मजबूत राज्यों के प्रति संघ की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, भले ही केंद्र सरकार रक्षा, बुनियादी ढांचे और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्वों का वहन कर रही है।
यह बजट तीन ‘कर्तव्यों’ के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता के साथ प्रस्तुत किया गया है। यह इस तथ्य को रेखांकित करता है कि मोदी सरकार के कार्यकलापों में कर्तव्य का मूल भाव जनसेवा में निहित है। पिछले ग्यारह वर्षों में देश ने अभूतपूर्व उपलब्धियां और उल्लेखनीय सफलताएं दर्ज की हैं, जिन्होंने हर क्षेत्र और जीवन के प्रत्येक पहलू में सकारात्मक परिवर्तन लाया है। यह इसलिए संभव हो सका क्योंकि देश के प्रधानमंत्री ने स्वयं को लोगों का ‘प्रधान सेवक’ मानते हुए राष्ट्र को उच्च लक्ष्यों की ओर प्रेरित किया। उन्होंने कोविड-19 महामारी सहित अनेक प्रतिकूल परिस्थितियों में देश का कुशल नेतृत्व किया और हर चुनौती को अवसर में परिवर्तित किया। जहां वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को लगातार नौवां केंद्रीय बजट प्रस्तुत करने के लिए बधाई दी जानी चाहिए, वहीं यह भी स्पष्ट है कि केंद्रीय बजट 2026–27 ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक सशक्त और निर्णायक भूमिका निभाएगा।

