राष्ट्र-निर्माण की सतत साधना

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      प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 22 मार्च, 2026 को निर्वाचित शासन प्रमुख के पद पर 8,931 दिन पूरे कर एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर प्राप्त कर लिया है। सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग के रिकॉर्ड को पार करने वाला यह क्षण उनके करिश्माई एवं दूरदर्शी नेतृत्व में लोगों के विश्वास को और अधिक सुदृढ़ करने वाला है। जहां गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनका 4,607 दिनों का कार्यकाल ‘विकास और प्रगति’ का एक जीवंत मॉडल रहा है, वहीं प्रधानमंत्री के रूप में उनका वर्तमान कार्यकाल ऐसी ऐतिहासिक उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा है, जिनकी कल्पना भी एक दशक पहले तक नहीं की जा सकती थी। यह शानदार यात्रा 24 वर्षों से भी अधिक समय से निरंतर जारी है और यह उनके सेवाभाव का प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिसमें लोगों का विश्वास अर्जित करने वाला दृढ़ संकल्प, दायित्वभाव, निरंतरता, पारदर्शिता एवं जन-समर्पण की स्पष्ट झलक मिलती है। यह उपलब्धि केवल लंबे समय तक पद पर बने रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र में निर्णायक, पारदर्शी और विकासोन्मुख शासन के प्रति लोगों के अटूट विश्वास का जीवंत प्रमाण है। सर्वविदित है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कई परिवर्तनकारी कदम उठाए हैं— जिनमें बुनियादी ढांचे का विस्तार, डिजिटल क्रांति, जन-कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन तथा वैश्विक कूटनीति में भारत की सशक्त उपस्थिति शामिल हैं। ये सभी कदम भाजपा के मूल मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ पर आधारित हैं, क्योंकि उनका शासन मॉडल निरंतर समावेशी विकास और राष्ट्रीय प्रगति को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहा है। आज के दौर में, जब लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के कारण अक्सर ‘एंटी इन्कम्बेंसी’ रुझान देखने को मिलते हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री श्री मोदी को निरंतर जनता का आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि उनकी उत्कृष्ट सेवा, दूरदृष्टि और ‘विकसित भारत’ के निर्माण के प्रति अटूट समर्पण ने लोगों के मन में एक सकारात्मक ‘प्रो-इन्कम्बेंसी’ भावना का निर्माण किया है।

8,931 दिनों की यह उपलब्धि राष्ट्र-निर्माण की उस सतत साधना का प्रमाण है, जिसने भारत में परिवर्तन की गति को तीव्र किया है। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है, बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और वैश्विक पटल पर भारत की प्रतिष्ठा और बढ़ी है

इन उपलब्धियों को जो बात सचमुच असाधारण बनाती है, वह केवल यह लंबा कालखंड ही नहीं, बल्कि वह निरंतरता और जीवंतता है, जिसने देश के पूरे राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। ऐसे दौर में, जब विश्वभर में नेता अक्सर कुछ ही महीनों में अपने जनसमर्थन में गिरावट का सामना कर रहे हैं, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी अपने पूरे कार्यकाल के दौरान असाधारण जनसमर्थन एवं जनाशीर्वाद प्राप्त रखने में सफल रहे हैं और वह भी एक ऐसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में, जिसने संसदीय प्रणाली को अपनाया है। मॉर्निंग कंसल्ट ग्लोबल लीडर अप्रूवल ट्रैकर (मार्च, 2026) के अनुसार उनकी अप्रूवल रेटिंग 68 प्रतिशत पर बनी हुई है और वे लगातार दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शामिल हैं। ऐसे राजनीतिक वातावरण में, जो अस्थिरता और ‘एंटी इन्कम्बेंसी’ से प्रभावित रहा है, लगातार तीसरी बार शासन में आना और अपनी लोकप्रियता का निरंतर बढ़ते रहना एक असाधारण उपलब्धि है। यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता का संकेत नहीं देती, बल्कि एक ऐसे शासन मॉडल की सफलता को भी रेखांकित करती है, जिसकी नींव ‘परिणाम-उन्मुख कार्यशैली’, ‘निर्णायक क्षमता’ और ‘जनता से सीधे जुड़ाव’ पर आधारित है। कल्याणकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने से लेकर बुनियादी ढांचे में व्यापक परिवर्तन लाने वाली परियोजनाओं और डिजिटल पहलों तक— उनके नेतृत्व में एनडीए सरकार ने निरंतर परफॉमेंस और प्रतिबद्धता के बल पर अपनी विश्वसनीयता स्थापित की है। जहां कई वैश्विक नेता आर्थिक और भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच अपना जनसमर्थन बनाए रखने के लिए संघर्ष करते दिखाई देते हैं, वहीं प्रधानमंत्री श्री मोदी पर भारत की जनता का निरंतर विश्वास एक गहरे परिवर्तन का संकेत है। यह परिवर्तन केवल राजनीतिक जनसमर्थन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक स्थिर और आत्मविश्वास से भरे जनादेश को दर्शाता है, जो उनकी प्रेरणादायी सोच और नेतृत्व में बढ़ते जन-विश्वास से गहराई से जुड़ा हुआ है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को प्राप्त व्यापक लोकप्रियता और जनसमर्थन उस अभूतपूर्व परिवर्तन का प्रतीक है, जिसकी शुरुआत गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से हुई थी और जो ‘प्रधान सेवक’ के रूप में उनके वर्तमान कार्यकाल में भी निरंतर जारी है। यह परिवर्तन लोगों के हितों की रक्षा करते हुए शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा जनता की सेवा के प्रति उनके अटूट समर्पण का परिणाम है। उनके करिश्माई नेतृत्व में चलने वाली सरकार, जो ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण पर आधारित है, अपनी इस उल्लेखनीय यात्रा से निरंतर शक्ति प्राप्त करती है— जो स्थिरता, निर्णायक नेतृत्व और दूरदर्शी सोच का प्रतीक है। 8,931 दिनों की यह उपलब्धि राष्ट्र-निर्माण की उस सतत साधना का प्रमाण है, जिसने भारत में परिवर्तन की गति को तीव्र किया है। इसके परिणामस्वरूप आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है, बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और वैश्विक पटल पर भारत की प्रतिष्ठा और बढ़ी है।

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