यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर की सूची में ‘दीपावली’ शामिल

| Published on:

भारत में व्यापक रूप से मनाई जाने वाली जीवंत परंपराओं में से एक ‘दीपावली’ को 10 दिसंबर को नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित यूनेस्को अंतर-सरकारी समिति के 20वें सत्र के दौरान मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में अंकित किया गया।

इस शिलालेख को केंद्रीय संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, संस्कृति मंत्रालय के सचिव, संस्कृति मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और 194 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों, अंतरराष्‍ट्रीय विशेषज्ञों और यूनेस्को के वैश्विक नेटवर्क के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में अपनाया गया।

यूनेस्को के शिलालेख में दीपावली को एक जीवंत विरासत के रूप में मान्यता दी गई है, जो सामाजिक संबंधों को मजबूत करती है। यह त्‍योहार पारंपरिक शिल्प कौशल का समर्थन करता है, उदारता और कल्याण के मूल्यों को सुदृढ़ करता है तथा आजीविका संवर्धन, लैंगिक समानता, सांस्कृतिक शिक्षा और सामुदायिक कल्याण सहित कई सतत विकास लक्ष्यों में सार्थक योगदान देता है।

श्री शेखावत ने अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए कहा कि यह शिलालेख भारत और विश्वभर के उन समुदायों के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है जो दीपावली की शाश्वत भावना को जीवित रखते हैं। उन्‍होंने कहा कि यह त्योहार ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के सार्वभौमिक संदेश का प्रतीक है, जो अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की भावना को दर्शाता है और आशा, नवजीवन तथा सद्भाव का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रधानमंत्री ने दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल किए जाने का स्वागत किया
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दीपावली को 10 दिसंबर को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल किये जाने पर प्रसन्नता और गर्व व्यक्त किया। यूनेस्को के हैंडल ‘एक्स’ पर एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने कहा, “भारत और दुनिया भर के लोग रोमांचित हैं। हमारे लिए दीपावली हमारी संस्कृति और लोकाचार से बहुत गहराई से जुड़ी हुई है। यह हमारी सभ्यता की आत्मा है। यह प्रकाश और धार्मिकता का प्रतीक है। दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल करने से इस पर्व की वैश्विक लोकप्रियता और भी बढ़ेगी। प्रभु श्री राम के आदर्श हमारा शाश्वत रूप से मार्गदर्शन करते रहें।”