जीएसटी कटौती 2025 मजबूत विकास के लिए जन-केंद्रित सुधार

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     मोदी सरकार ने जीएसटी व्यवस्था को सरल और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। जीएसटी परिषद् और वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित ऐतिहासिक जीएसटी सुधार, जो 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होंगे, ने कर ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। विभिन्न टैक्स स्लैबों को अब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दरों (शून्य एवं उच्चतर अवगुण उत्पादों पर लगने वाली दरों के साथ) के तहत लाया गया है, यह सुधार सैकड़ों रोजमर्रा की वस्तुओं और प्रमुख उत्पादों पर इनपुट कर का बोझ कम करेगा, जबकि विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर उच्च दरें लागू होंगी। इन उपायों का स्पष्ट उद्देश्य आम लोगों पर बोझ कम करना, उपभोग को प्रोत्साहित करना, घरेलू विनिर्माण और निर्यात को नुकसान पहुंचाने वाले शुल्क ढांचों को ठीक करना और अनुपालन को सरल बनाना है।

इस प्रक्रिया में एक बड़ा कदम स्लैबों का एकीकरण रहा, जिसके तहत अब ज्यादातर वस्तुओं एवं सेवाओं को 12 प्रतिशत या 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की दर के तहत लाया गया है। जरूरी खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले एफएमसीजी उत्पादों को काफी कम दरों पर रखा गया और कुछ वस्तुओं पर तो शून्य कर भी लागू किया गया है, जिसमें साधारण ब्रेड और कुछ पैकेज्ड डेयरी उत्पाद शामिल हैं।

एक और महत्वपूर्ण कदम विभिन्न कंज्यूमर ड्यूरेबल और मोबिलिटी श्रेणियों के लिए कर दरों में कमी करना था। जिन वस्तुओं पर पहले 28 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जैसे चुनिंदा एयर कंडीशनर, 32 इंच तक के टेलीविजन, डिशवॉशर, छोटी कारें और 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलें, उन्हें घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। कृषि मशीनीकरण और ग्रामीण उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी पर भी कम दरें लागू की गईं।

इस सुधार ने लंबे समय से लंबित इनवर्टेड ड्यूटी ढांचे के मुद्दे को भी संबोधित किया। मानव निर्मित रेशे और धागों को कम दरों पर लाया गया, जिससे कपड़ा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा और

जीएसटी परिषद् और वित्त मंत्रालय द्वारा घोषित ऐतिहासिक जीएसटी सुधार, जो 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होंगे, ने कर ढांचे में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। विभिन्न टैक्स स्लैबों को अब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दरों (शून्य एवं उच्चतर अवगुण उत्पादों पर लगने वाली दरों के साथ) के तहत लाया गया है

निर्यात की संभावनाओं को बल मिलेगा। हस्तशिल्प और सांस्कृतिक वस्तुओं को भी कम दरों के माध्यम से राहत मिली है, जिससे कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों को संरक्षण एवं समर्थन मिलेगा।

यह सभी उपाय लागू होने पर उपभोक्ता कीमतों को स्रोत पर ही कम करेंगे तथा उन विकृतियों को दूर करेंगे, जो पहले घरेलू मूल्य संवर्धन और विनिर्माण को हतोत्साहित करती थीं।

एक नीतिगत उपलब्धि

जीएसटी सुधार आम लोगों और छोटे उपभोक्ताओं के पक्ष में एक बड़े झुकाव को दर्शाता है। आवश्यक वस्तुओं पर दरें कम करके सरकार ने एक स्पष्ट कल्याणकारी कदम उठाया है जो निम्न और मध्यम आय वाले परिवारों पर कर का बोझ कम करेगा। इस निर्णय के बाद वस्तुओं की खुदरा कीमतों में सीधे तौर पर कमी आयेगी, जिससे नागरिकों को भारी राहत मिलेगी।

अब सुव्यवस्थित स्लैब संरचना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। वर्गीकरण विवादों और अनुपालन संबंधी जटिलताओं को कम करके यह सुधार व्यवसायों की लागत कम करेंगे और साथ ही चालान-स्तर की सटीकता और ई-फाइलिंग दक्षता में सुधार होगा। उद्योग मंडलों ने पहले ही संकेत दे दिया है कि यह सरलीकरण अनुपालन संबंधी बाधाओं को कम करेगा और दीर्घकालिक राजस्व स्थिरता को बढ़ावा देगा।

इस सुधार में एक मजबूत रणनीतिक औद्योगिक नीतिगत आयाम भी निहित है। कपड़ा, हस्तशिल्प, उर्वरक और कृषि मशीनरी में इनवर्टेड ड्यूटी ढांचे को ठीक करने से यह सुनिश्चित होता है कि कर नीति निर्यात प्रतिस्पर्धा, ग्रामीण आजीविका और कृषि उत्पादकता जैसे राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ बेहतर ढंग से संरेखित हो। ये लक्षित सुधार अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों को मजबूत करते हैं और कारीगरों जैसे कमज़ोर वर्गों की रक्षा करते हैं।

इस सुधार का राजनीतिक परिदृश्य पर स्पष्ट प्रभाव पड़ेगा। इसकी पुनर्वितरणात्मक प्रकृति किसी वस्तु की बिक्री के समय आसानी से देखी जा सकती है, जिससे यह एक प्रमुख नीतिगत उपलब्धि बन जाती है, जो जनता के साथ जुड़ती है। रोजमर्रा की लागत कम करके और सभी क्षेत्रों में मांग को बढ़ावा देकर यह सुधार न केवल नागरिकों के कल्याण को समर्थन करता है, बल्कि व्यापक आर्थिक विकास को गति देने में सरकार की विश्वसनीयता को भी मजबूत करता है।

लघु से मध्यम अवधि के आर्थिक प्रभाव, साक्ष्य और अनुमान

जीएसटी दरों में कटौती से आने वाली तिमाहियों में खपत को बढ़ावा मिलने और जीडीपी वृद्धि में तेज़ी आने की व्यापक उम्मीद है। कई विश्लेषकों और उद्योग अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया है कि यह सुधार मांग को बढ़ावा देगा। विभिन्न अर्थशास्त्रियों के शुरुआती अनुमानों के अनुसार वित्त वर्ष की दूसरी छमाही और वित्त वर्ष 27 में इसके सकारात्मक प्रभाव देखे जा सकते हैं। कम जीएसटी दरों से परिचालन दक्षता में सुधार होगा और औपचारिक बाजार का विस्तार होगा, जिससे विकास को गति मिलेगी।

हालांकि, वास्तविक उपभोग वृद्धि कर कटौती का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने पर निर्भर करती है। कई वाहन निर्माता और उपभोक्ता वस्तु कंपनियां पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि वे इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएंगी। मीडिया रिपोर्ट्स इस बात की पुष्टि करती हैं कि कुछ कंपनियों ने वाहनों और दोपहिया वाहनों की कीमतों में संशोधन किया है, जो इस बात का संकेत है कि इस सुधार का उपभोक्ताओं को ठोस मूल्य राहत मिल रही है।

क्षेत्रीय मांग के संकेत भी उभर रहे हैं। उदाहरण के लिए, टायर निर्माता और ट्रैक्टर कलपुर्जे आपूर्तिकर्ता, ज़्यादा उत्पादन की उम्मीद कर रहे हैं। प्रमुख टायर कंपनी सिएट ने ट्रैक्टर और शुरुआती स्तर के मोटरसाइकिल टायरों की मांग में वृद्धि का अनुमान लगाया है, जो कर कटौती के बाद ग्रामीण और आम बाजार में बढ़ती मांग का एक प्रारंभिक संकेत है।

साथ ही, राजकोषीय कमी को भी स्वीकार किया जाना चाहिए। स्वतंत्र शोध और कर सलाहकार विश्लेषणों का अनुमान है कि संभावित राजस्व हानि सालाना 70,000 करोड़ रुपये से 1.8 लाख करोड़ रुपये के बीच होगी। इसका अंतिम प्रभाव उपभोग, अनुपालन लाभों के माध्यम से औपचारिक आधार के विस्तार और राज्य क्षतिपूर्ति तंत्र की प्रभावशीलता जैसे कारकों पर निर्भर करेगा। केंद्र-राज्य राजकोषीय संतुलन बनाए रखने और मध्यम अवधि के बजट तैयार करने के लिए राजस्व का यह आयाम महत्वपूर्ण है।

क्षेत्रीय कल्याण और लाभ विश्लेषण

जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने से फास्ट-मूविंग उपभोक्ता वस्तुओं, घरेलू वस्तुओं और खाद्य पदार्थों में महत्वपूर्ण कल्याणकारी बदलाव होंगे। साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, पैकेज्ड स्नैक्स, स्टेपल और चुनिंदा डेयरी उत्पादों पर कम कर उपभोक्ताओं के दैनिक खर्च को कम करेगी। इसका एक प्रगतिशील प्रभाव पड़ता है क्योंकि निम्न-आय वाले परिवार अपनी आय का एक बड़ा हिस्सा इन वस्तुओं पर खर्च करते हैं,

कृषि, ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी के लिए कम जीएसटी सीधे तौर पर किसानों की लागत कम करता है और मशीनीकरण को बढ़ावा देता है। इसका कल्याणकारी प्रभाव कृषि उत्पादकता में वृद्धि, शारीरिक श्रम में कमी और उपकरणों के व्यापक उपयोग से बेहतर ग्रामीण आय के रूप में स्पष्ट है

जिसका अर्थ है कि उनकी वास्तविक क्रय शक्ति बढ़ेगी। अल्पावधि में इस नीति से बिक्री में वृद्धि और अनौपचारिक खुदरा विक्रेताओं के लिए मार्जिन में कमी आने की उम्मीद है, जबकि मध्यम अवधि में यदि मूल्य में कमी जारी रहती है, तो यह पोषण और स्वच्छता के बेहतर परिणामों में योगदान दे सकती है।

ऑटोमोबाइल और दोपहिया वाहन क्षेत्र में कुछ वस्तुओं पर कर दर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत की गयी है, साथ ही 350 सीसी तक की मोटरसाइकिलों पर छूट दी गयी है, जो उत्पादन लागत को कम करता है। इससे पहली बार खरीदारी करने वालों, ग्रामीण यात्रियों और छोटे पैमाने के परिवहन संचालकों के लिए सामर्थ्य में सुधार होगा, जिससे श्रम बाजार में गतिशीलता को बढ़ावा मिलेगा। उद्योग जगत की प्रतिक्रियाएं पहले से ही निकट भविष्य में कीमतों में सुधार और मात्रा में वृद्धि का संकेत दे रही हैं, हालांकि यह जोखिम बना हुआ है कि अगर मांग बहुत तेज़ी से बढ़ती है, तो आपूर्ति शृंखला की बाधाएं पूरे लाभ को कम कर सकती हैं।

कृषि, ट्रैक्टर और कृषि मशीनरी के लिए कम जीएसटी सीधे तौर पर किसानों की लागत कम करता है और मशीनीकरण को बढ़ावा देता है। इसका कल्याणकारी प्रभाव कृषि उत्पादकता में वृद्धि, शारीरिक श्रम में कमी और उपकरणों के व्यापक उपयोग से बेहतर ग्रामीण आय के रूप में स्पष्ट है। यह बदलाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गुणक प्रभाव उत्पन्न करता है। सिएट सहित निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं ने पहले ही ट्रैक्टर टायरों की मांग में वृद्धि का अनुमान लगा लिया है, जो ग्रामीण मांग में मजबूती का संकेत है।

मानव निर्मित रेशों और हस्तशिल्प के साथ-साथ कपड़ा क्षेत्र को भी इनवर्टेड ड्यूटी ढांचे में सुधार का लाभ मिला है, जिससे पहले इनपुट लागत बढ़ जाती थी। इनपुट पर करों में कमी और हस्तशिल्प के लिए दरें कम करके यह सुधार घरेलू मूल्य शृंखलाओं को मज़बूत करता है, निर्यात प्रतिस्पर्धा में सुधार करता है और कारीगरों की आजीविका को सहारा देता है। इससे एमएसएमई के लिए बेहतर मार्जिन और श्रम-प्रधान क्षेत्रों में संभावित रोज़गार वृद्धि हो सकती है।

स्वास्थ्य और आवश्यक सेवाओं पर भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं, कुछ चिकित्सा उत्पादों, स्वास्थ्य संबंधी वस्तुओं और पैकेज्ड स्टेपल पर दरें कम की जा रही है। ये बदलाव सामर्थ्य में सुधार लाते हैं और गरीब परिवारों के लिए छोटी लेकिन सार्थक वास्तविक आय वृद्धि प्रदान करते हैं, जो व्यापक कल्याण और समावेशन उद्देश्यों के अनुरूप है।

दीर्घकालिक संरचनात्मक लाभ

सरलीकृत दरें अनुपालन को बढ़ा सकती हैं, जिससे समय के साथ कर योग्य आधार का विस्तार हो सकता है। अधिक औपचारिकता तत्काल राजस्व हानि की कुछ हद तक भरपाई कर सकती है।

इनवर्टेड ड्यूटी को हटाने और इनपुट करों को कम करने से विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिलेगा, विशेष रूप से वस्त्र और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में, जिससे मध्यम अवधि में निर्यात की संभावनाओं में सुधार होगा। मुख्य खाद्य पदार्थों और घरेलू सामानों की लगातार कम कीमतें गरीब परिवारों को लाभ पहुंचाती हैं, जिससे वास्तविक आय में सुधार होता है और उपभोग में संतुलन बना रहता है, जो बदले में मानव विकास संकेतकों को बढ़ावा देता है। टिकाऊ और अर्ध-टिकाऊ वस्तुओं की बढ़ती खपत कंपनियों को निवेश करने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे रोजगार और उत्पादकता में वृद्धि होगी। विश्लेषकों की टिप्पणी वित्त वर्ष 27 में विकास में तेजी की संभावना पर प्रकाश डालती है।

2025 का जीएसटी सुधार एक ऐतिहासिक कदम है जो परिवारों के लिए दृश्यमान कल्याणकारी लाभों को दीर्घकालिक औद्योगिक और प्रतिस्पर्धात्मकता लाभों के साथ जोड़ती है। तत्काल राजस्व प्रभाव और निरंतर वृद्धि के बीच का संतुलन कार्यान्वयन की गुणवत्ता और औपचारिकता के लाभ की प्राप्ति की सीमा से हल हो जाएगा। उद्योग जगत की शुरुआती प्रतिक्रियाएं और आधिकारिक दस्तावेज़ सकारात्मक परिणामों और वैध राजकोषीय प्रश्नों, दोनों का संकेत देते हैं जिनका नीति निर्माताओं को विवेकपूर्ण ढंग से प्रबंधन करना चाहिए।

यह साहसिक कदम कल्याण और विकास, सरलता और दक्षता तथा उपभोग और प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाने के मोदी सरकार के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। उद्योग जगत में संरचनात्मक विकृतियों को दूर करते हुए आवश्यक वस्तुओं पर करों में कटौती करके यह सुधार लाखों परिवारों को राहत प्रदान करता है और भारतीय उद्यमों को वैश्विक बाज़ारों में एक मज़बूत बढ़त प्रदान करता है। यह एक निर्णायक संकेत है कि प्रधानमंत्री मोदीजी के नेतृत्व में राजकोषीय नीति केवल राजस्व संग्रह तक ही सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों को सशक्त बनाने, उद्योग को प्रोत्साहित करने और भारत के दीर्घकालिक विकास पथ को मज़बूत करने के लिए भी है।

(लेखक राज्यसभा सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री हैं)