कारीगरों का सम्मान : पीएम विश्वकर्मा योजना

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पीएम विश्वकर्मा योजना केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित है, जिसका वित्तीय परिव्यय
पांच साल (वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2027-28) की अवधि के लिए 13,000 करोड़ रुपये है

77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत भर के कारीगरों और शिल्पकारों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल का अनावरण किया— पीएम विश्वकर्मा योजना। 17 सितंबर, 2023 को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (द्वारका) में लॉन्च की गई यह योजना पारंपरिक शिल्प कौशल का समर्थन करने की केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह योजना अनौपचारिक या असंगठित क्षेत्र में लगे कार्यबल के एक महत्वपूर्ण हिस्से को लक्षित करती है, जहां लोहार, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, बढ़ई जैसे कारीगर अपने हाथों और औजारों से काम करते हैं। इन कारीगरों को विश्वकर्मा कहा जाता है। कारीगरों के ये कौशल अक्सर पीढ़ियों से आगे बढ़ते हैं, गुरु-शिष्य परंपरा का पालन करते हुए मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देते हैं, जो सदियों पुरानी परंपराओं की निरंतरता को बढ़ावा देता है। कारीगरों के उत्पादों की गुणवत्ता और बाजार पहुंच को बढ़ाकर पीएम विश्वकर्मा योजना इन कुशल व्यक्तियों को घरेलू और वैश्विक मूल्य शृंखलाओं दोनों में एकीकृत करना चाहती है।

केंद्रीय सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रालय द्वारा चार नवंबर को जारी एक बयान के अनुसार अपनी शुरुआत के बाद से इस योजना के प्रति कारीगरों ने उल्लेखनीय रुचि दिखायी है, जिसके तहत 25.8 मिलियन आवेदन जमा किए गए हैं। इनमें से 2.37 मिलियन आवेदकों ने तीन-चरण की सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करने के बाद सफलतापूर्वक पंजीकरण कराया है।

इसके अलावा, लगभग 1 मिलियन पंजीकृत कारीगरों को ई-वाउचर के माध्यम से 15,000 रुपये तक के टूलकिट प्रोत्साहन से लाभ हुआ है, जिससे वे अपने शिल्प कौशल में वृद्धि करने वाले आधुनिक उपकरण प्राप्त करने में सक्षम हुए हैं।

पीएम विश्वकर्मा योजना की मुख्य बातें

 पीएम विश्वकर्मा योजना केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित है, जिसका वित्तीय परिव्यय पांच साल (वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2027-28) की अवधि के लिए 13,000 करोड़ रुपये है।
 विश्वकर्माओं को बायोमेट्रिक आधारित पीएम विश्वकर्मा पोर्टल का उपयोग करते हुए सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से निःशुल्क पंजीकृत किया जाता है।
 कारीगरों और शिल्पकारों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और एक आईडी कार्ड के माध्यम से मान्यता प्रदान की जाती है।
 उन्हें 5% की रियायती ब्याज दर के साथ 1 लाख रुपये (पहली किस्त) और 2 लाख रुपये (दूसरी किस्त) तक का गिरवी-मुक्त ऋण समर्थन प्राप्त होता है। भारत सरकार 8% की सीमा तक ब्याज अनुदान देती है और यह धनराशि बैंकों को अग्रिम रूप से प्रदान की जाती है।