पीएम गति शक्ति के तीन वर्ष
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र के नाम अपने संबोधन के दौरान ‘पीएम गति शक्ति’ पहल की घोषणा की थी। मल्टी मॉडल कनेक्टिविटी के लिए 13 अक्टूबर, 2021 को प्रारंभ किया गया राष्ट्रीय मास्टर प्लान इस वर्ष अपनी तीसरी वर्षगांठ मनाने के लिए तैयार है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए रेलवे तथा रोडवेज सहित विभिन्न मंत्रालयों को एक साथ लाने के लक्ष्य के साथ तैयार किया गया है। इस बहुआयामी पहल का उद्देश्य परिवहन के विभिन्न साधनों में लोगों, वस्तुओं एवं सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध व कुशल मार्ग संपर्क सुविधा प्रदान करना है, जिससे अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बढ़ जाए और यात्रा का समय कम हो सके। पीएम गति शक्ति में विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, शुष्क/भूमि बंदरगाह तथा उड़ान जैसी बुनियादी ढांचा योजनाएं शामिल की गयी हैं
गति शक्ति: केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों की भागीदारी
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) में 44 केंद्रीय मंत्रालयों व 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को शामिल किया गया है और कुल 1,614 डेटा लेयर्स भी एकीकृत की गई हैं। डेटा सटीकता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रमुख बुनियादी ढांचा मंत्रालयों ने त्रि-स्तरीय प्रणाली के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को अंतिम रूप दिया है। 8 बुनियादी ढांचा मंत्रालयों एवं 15 सामाजिक क्षेत्र मंत्रालयों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं को अधिसूचित किया गया है और अन्य मंत्रालयों तथा तैयार डेटा प्रबंधन के लिए ‘पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान पर एक संग्रह’ हितधारक की जिम्मेदारियों की रूपरेखा तैयार करता है।
‘पीएम गति शक्ति खंड I और खंड II का एक संग्रह’ विकसित तथा प्रारंभ किया गया है, जो पीएम गति शक्ति की सफलता की कहानियों पर प्रकाश डालता है। पीएम गतिशक्ति सिद्धांतों का पालन करते हुए विभिन्न मंत्रालयों की 15.39 लाख करोड़ रुपये की 208 बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का आकलन करने का एक मील का पत्थर हासिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, रेल मंत्रालय के तीन आर्थिक गलियारों के तहत 434 परियोजनाओं का मूल्यांकन किया गया है और इन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ साझा किया गया है। वे ऊर्जा, खनिज और सीमेंट गलियारे, उच्च यातायात घनत्व वाले गलियारे तथा रेल सागर हैं।
जिला स्तरीय एकीकरण
पीएम गतिशक्ति को जिला स्तर तक विस्तारित करने के लिए एक जिला मास्टर प्लान (डीएमपी) पोर्टल विकसित किया जा रहा है। यह पोर्टल जिला अधिकारियों को सहयोगात्मक योजना बनाने, बुनियादी ढांचे की कमी की पहचान और योजना कार्यान्वयन में सहायता करेगा। 28 आकांक्षी जिलों के लिए इस पोर्टल का बीटा संस्करण पहले ही बनाया जा चुका है और 18 सितंबर, 2024 को इन जिलों को उपयोगकर्ता खाते प्रदान किए गए थे। अक्टूबर, 2024 में ओरिएंटेशन प्रोग्राम के साथ पोर्टल का ट्रायल रन जारी है। देश के सभी जिलों के लिए डीएमपी पोर्टल चरणबद्ध तरीके से विकसित कर 31 मार्च, 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा।
पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान (एनएमपी) के तहत प्रमुख उपलब्धियां
पीएम गतिशक्ति एनएमपी के परिणामस्वरूप विभिन्न क्षेत्रों में कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं, जिससे परियोजना की मुख्य योजना, गति और निष्पादन में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
•सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उपयोग करके 8,891 किलोमीटर से अधिक सड़कों की योजना बनाई, जबकि रेल मंत्रालय (एमओआर) ने 27,000 किलोमीटर से अधिक रेलवे लाइनों की योजना बनाने के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उपयोग किया। रेल मंत्रालय ने अंतिम स्थान सर्वेक्षण (एफएलएस) को पूरा करने में भी तेजी लाई, वित्त वर्ष 2021 में 57 की तुलना में वित्त वर्ष 22 में 449 एफएलएस पूरे किए हैं।
•पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (एमओपीएनजी) ने डिटेल रूट सर्वे (डीआरएस) की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया, जिससे इलेक्ट्रॉनिक डीआरएस (ईडीआरएस) का उपयोग करके रिपोर्ट बनाने के लिए आवश्यक समय 6-9 महीने से घटाकर केवल एक दिन कर दिया गया।
• राष्ट्रीय मास्टर प्लान सिद्धांतों का उपयोग करते हुए लेह (लद्दाख) से कैथल (हरियाणा) तक 13 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजना ने अंतर-राज्य ट्रांसमिशन के लिए ‘ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर’ का इष्टतम संरेखण हासिल किया।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उपयोग करके 8,891 किलोमीटर से अधिक सड़कों की योजना बनाई, जबकि रेल मंत्रालय (एमओआर) ने 27,000 किलोमीटर से अधिक रेलवे लाइनों की योजना बनाने के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उपयोग किया
• गोवा ने अमोना नदी के किनारे बाढ़ प्रवण क्षेत्रों के लिए आपदा प्रबंधन योजना विकसित करने के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान मंच का उपयोग किया है।
• उत्तर प्रदेश सरकार ने पहुंच पोर्टल के माध्यम से वंचित क्षेत्रों में नए स्कूलों के लिए स्थानों की पहचान करने के लिए राज्य मास्टर प्लान (एसएमपी) पोर्टल का उपयोग किया।
• गुजरात ने राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उपयोग करके अपने 300 किलोमीटर के तटीय गलियारे की योजना बनाई, जिससे मंजूरी के लिए आवश्यक एनओसी अनुमतियों की संख्या 28 से कम होकर 13 हो
गई, जिससे पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ चार जिलों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ गई।
• स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने जिला-विशिष्ट कौशल प्रशिक्षण के लिए पीएम श्री स्कूलों को स्थानीय उद्योगों से जोड़ने के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान पोर्टल का उपयोग किया।
• स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उपयोग करके नई स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इंटरनेट छाया क्षेत्रों की पहचान की और साइटों की मैपिंग की।
• कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने आर्थिक समूहों के पास नए प्रशिक्षण संस्थानों के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने के लिए राष्ट्रीय मास्टर प्लान का उपयोग किया।
• ग्रामीण विकास मंत्रालय ने बेहतर संपत्ति योजना और कार्यान्वयन के लिए पीएमजीएसवाई तथा पीएमएवाई-जी जैसी योजनाओं को एकीकृत किया है।
• जनजातीय कार्य मंत्रालय ने पीएम जनमन पोर्टल का उपयोग करके विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) के लिए बुनियादी ढांचे की कमी की पहचान की है।
ये सभी उपलब्धियां विभिन्न मंत्रालयों और क्षेत्रों में योजना, दक्षता तथा सहयोग में सुधार लाने में राष्ट्रीय मास्टर प्लान की व्यापक उपयोगिता को उजागर करती हैं।
राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (एनएलपी) 2022 प्रगति और प्रमुख पहल
एकीकृत, कुशल और लागत प्रभावी लॉजिस्टिक्स नेटवर्क बनाकर भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 17 सितंबर, 2022 को राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (एनएलपी) शुरू की गई। इस नीति का उद्देश्य लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और भारत की लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन सूचकांक (एलपीआई) रैंकिंग में सुधार कर उसे 2030 तक शीर्ष 25 देशों में लाना तथा डेटा संचालित निर्णय लेने को बढ़ावा देना है। इसका कार्यान्वयन व्यापक लॉजिस्टिक्स कार्य योजना (सीएलएपी) द्वारा संचालित है, जो डिजिटल लॉजिस्टिक्स सिस्टम, परिसंपत्ति मानकीकरण, मानव संसाधन विकास, राज्यों की सहभागिता और ईएक्सआईएम लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करता है। नीति में क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) के सहयोग से प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण प्रयासों पर जोर दिया गया है। प्रशिक्षण मॉड्यूल को वेबिनार, कार्यशालाओं और डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से केंद्रीय व प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के साथ एकीकृत किया गया है।
राज्य लॉजिस्टिक्स योजनाएं (एसएलपी): 26 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने सार्वजनिक नीति में लॉजिस्टिक्स पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपनी राज्य लॉजिस्टिक्स नीतियों को अधिसूचित करके राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति (एनएलपी) के साथ तालमेल स्थापित किया है।
लीड्स सर्वेक्षणः विभिन्न राज्यों में लॉजिस्टिक्स सुगमता (लीड्स) रिपोर्ट का पांचवां संस्करण दिसंबर, 2023 में पेश किया गया था, जिसका छठा संस्करण जनवरी, 2024 में जारी किया गया। लीड्स राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में बुनियादी ढांचे व सेवाओं के आधार पर लॉजिस्टिक्स सुगमता का आकलन करता है।
एकीकृत लॉजिस्टिक्स एकीकृत प्लेटफॉर्म (यूएलआईपी): यूएलआईपी 10 मंत्रालयों में 33 लॉजिस्टिक्स-संबंधित प्रणालियों को एकीकृत करता है, जिससे नवाचार को बढ़ावा मिलता है। वर्तमान में 930 से अधिक निजी कंपनियां पंजीकृत हैं, जिनमें से 95 आवेदन सक्रिय हैं और 185 कंपनियों ने एनडीए पर हस्ताक्षर किए हैं। एकीकृत लॉजिस्टिक्स एकीकृत प्लेटफॉर्म संपूर्ण कार्गो ट्रैकिंग के लिए जीएसटी डेटा को भी एकीकृत करता है।
लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (एलडीबी): भारत के कंटेनराइज्ड एक्जिम कार्गो की 100% ट्रैकिंग और ट्रेसिंग के लिए लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (एलडीबी) विकसित किया गया है। लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक भारत में एक्जिम कंटेनर मूवमेंट की वास्तविक समय ट्रैकिंग प्रदान करने के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), बिग डेटा और क्लाउड-आधारित समाधानों के माध्यम से आरएफआईडी प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है। यह एकल विंडो, क्लाउड-आधारित लॉजिस्टिक्स विज़ुअलाइजेशन समाधान है, जो बंदरगाहों से लेकर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो/कंटेनर फ्रेट स्टेशनों तक तथा बंदरगाह से जुड़े पार्किंग प्लाजा, टोल प्लाजा और रेलवे तक केवल कंटेनर नंबरों का उपयोग करके कंटेनर की आवाजाही पर चौकसी रखता है।
एलपीआई रैंक में सुधार
छह एलपीआई मापदंडों में रसद चुनौतियों का समाधान करने के लिए कई मंत्रालयों (एमओआरटीएच, एमओआर, एमओपीएसडब्ल्यू, एमओसीए) को शामिल करते हुए एक समर्पित एलपीआई कार्य योजना बनाई गई है। विश्व बैंक के साथ निरंतर सहयोग के परिणामस्वरूप लॉजिस्टिक्स दक्षता, सुधार तथा एलपीआई पद्धति पर चर्चा हुई है और साथ ही फरवरी, 2024 में एक राष्ट्रीय कार्यशाला भी आयोजित की गई है।
नीति में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और कोरिया की एलपीआई सुधार रणनीतियों के साथ सहयोग करते हुए सर्वोत्तम वैश्विक कार्य प्रणालियों को शामिल किया गया है। भारत के लिए नवीन दृष्टिकोण और रसद सुधारों पर चर्चा करने के लिए मार्च, 2024 में अमेरिका में विश्व बैंक के साथ एक गोलमेज बैठक आयोजित की गई।
इन प्रयासों के माध्यम से एनएलपी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाते हुए भारत को अधिक कुशल लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम की ओर ले जा रहा है।
गति शक्ति संचार पोर्टल
देश भर में विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड सेवाओं तक सार्वभौमिक एवं समान पहुंच उपलब्ध कराना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सबसे महत्वपूर्ण दृष्टिकोण में से एक है। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप ही 14 मई, 2022 को केंद्रीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) अनुमोदन के लिए गति शक्ति संचार पोर्टल प्रारंभ किया गया था।
गति शक्ति संचार पोर्टल दूरसंचार अवसंरचना को तेजी से क्रियान्वित करने के लिए किया गया एक बड़ा सुधार है। यह एक केंद्रीकृत राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) पोर्टल है, जो दूरसंचार सेवा प्रदाताओं/बुनियादी ढांचा प्रदाताओं/इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (टीएसपी/आईपी/आईएसपी) जैसे आवेदकों को आरओडब्ल्यू अनुमोदन के लिए आवेदन करने में सक्षम बनाता है। इस पर 11 अक्टूबर, 2024 तक 2.11 लाख आवेदन स्वीकृत किये जा चुके हैं।
इस पोर्टल को सभी 36 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों व संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों अर्थात रेल मंत्रालय (एमओआर), सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) तथा रक्षा मंत्रालय (एमओडी) के साथ एकीकृत किया गया है।
भारत में 5जी सेवाएं 1 अक्टूबर, 2022 को शुरू की गयी थीं। 13 करोड़ से अधिक उपभोक्ताओं ने 5जी सेवाओं का उपयोग करना शुरू कर दिया है, जिससे यह दुनिया में कहीं भी 5जी का सबसे तेज रोल आउट बन गया है। देश में दूरसंचार कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं क्रियान्वित कर रही हैं।
• लगभग 55 हजार गांवों को 4जी कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए 41,331 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ कुल 41,160 मोबाइल टावरों को मंजूरी दी गई है।
• भारत नेट कार्यक्रम का दायरा बढ़ाकर सभी बसे हुए गांवों को 1.88 लाख करोड़ रुपये की लागत से जोड़ा गया है।
निष्कर्ष
पीएम गति शक्ति परियोजना भारत में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है, जिसका उद्देश्य एक निर्बाध व कुशल मल्टीमॉडल परिवहन नेटवर्क स्थापित करना है। विभिन्न मंत्रालयों के प्रयासों को एकीकृत करके तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाकर इस पहल का लक्ष्य पूरे देश में कनेक्टिविटी को बढ़ाना और लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना है। गति शक्ति संचार पोर्टल इस परियोजना से संबंधित अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करके दूरसंचार अवसंरचना को तेजी से लागू करने और देश भर में 5जी सेवाओं की तेजी से तैनाती की सुविधा प्रदान करके इस दृष्टिकोण का व्यापक सहयोग करता है। इन संयुक्त प्रयासों से भारत आत्मनिर्भरता के अपने महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की स्थिति में है।

