बीते 10-11 वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में अपनी नींव मजबूत की है: द्रौपदी मुर्मु

| Published on:

राष्ट्रपति का संसद के समक्ष अभिभाषण

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 28 जनवरी, 2026 को संसद के बजट सत्र की शुरुआत में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। श्रीमती मुर्मु ने अपने अभिभाषण में हाल के वर्षों में भारत की शानदार प्रगति का उल्लेख किया और साथ ही आने वाले समय के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि बीते 10-11 वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में अपनी नींव मजबूत की है। ये वर्ष 2047 तक विकसित भारत की तेज यात्रा का बहुत बड़ा आधार हैं। यहां प्रस्तुत है उनके भाषण का सारांश:

भारत की गौरवशाली संवैधानिक विरासत अद्वितीय रही है। अमृत काल का यह स्वर्णिम युग अपने साथ अनेक प्रेरणाएं लेकर आया है। वर्ष 2026 के साथ हमारा देश इस सदी के दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। पहले 25 वर्षों की यात्रा सफलताओं, ऐतिहासिक उपलब्धियों और असाधारण अनुभवों से परिपूर्ण रही है। आज देश वंदे मातरम् के 150 वर्ष मना रहा है और श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहादत दिवस को श्रद्धापूर्वक स्मरण कर रहा है। साथ ही, भगवान बिरसा मुंडा और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती से भी राष्ट्र प्रेरणा ले रहा है। ये सभी पड़ाव हमें हमारी समृद्ध विरासत और पूर्वजों के बलिदानों की याद दिलाते हैं। यही प्रेरणाएं हमें 2047 तक विकसित भारत के संकल्प की ओर और अधिक गति प्रदान करती हैं।

गरीब का समग्र उत्थान

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ने गरीबों को गरीबी के दुष्चक्र से बाहर निकालने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के परिणामस्वरूप 25 करोड़ नागरिक गरीबी से मुक्त हो चुके हैं। पिछले एक दशक में सरकार द्वारा गरीबों के लिए 4 करोड़ पक्के मकानों का निर्माण किया गया है, जिनमें से 32 लाख मकान केवल पिछले एक वर्ष में प्रदान किए गए हैं। जल जीवन मिशन के अंतर्गत केवल पांच वर्षों में 12.5 करोड़ नए परिवारों तक नल से जल पहुंचा है, जबकि पिछले वर्ष लगभग 1 करोड़ परिवारों को यह सुविधा मिली है। उज्ज्वला योजना के माध्यम से 10 करोड़ से अधिक परिवारों को एल.पी.जी कनेक्शन दिए गए हैं। पहले जहां सामाजिक सुरक्षा केवल 25 करोड़ नागरिकों तक सीमित थी, आज लगभग 95 करोड़ भारतीय सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में हैं।

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से केवल एक वर्ष में 6.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंची है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने स्वीकार किया था कि गरीबों के लिए भेजे गए एक रुपये में से केवल 15 पैसे ही उन तक पहुंचते थे। इस सरकार ने उस टूटी हुई व्यवस्था को बदला है और आज हर रुपया सही लाभार्थी तक पहुंच रहा है।

स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत

दशकों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं कुछ गिने-चुने लोगों तक ही सीमित रहीं, जबकि गरीब अपने हाल पर छोड़ दिए गए। मोदी सरकार ने नागरिकों के स्वास्थ्य को शासन के केंद्र में रखकर इस स्थिति को बदला। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत देशभर में 11 करोड़ से अधिक निःशुल्क अस्पताल उपचार प्रदान किए गए हैं, जिनमें पिछले वर्ष ही 2.5 करोड़ गरीब लाभार्थी शामिल हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष ध्यान देते हुए लगभग 1 करोड़ वय वंदना कार्ड जारी किए गए हैं तथा 8 लाख बुज़ुर्गों को निःशुल्क उपचार मिला है। पीएम जीवन ज्योति बीमा योजना और पीएम सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत 26,000 करोड़ रुपये से अधिक की दावा राशि का भुगतान कर आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है। देशभर में 1.8 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं घर-घर तक पहुंची हैं। जापानी इंसेफेलाइटिस पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को ट्रैकोमा-मुक्त घोषित किया है। यह स्वस्थ भारत की यात्रा है, जहां स्वास्थ्य सेवा दान नहीं, बल्कि अधिकार है।

बेहतर भविष्य के लिए मध्यम वर्ग का सशक्तीकरण

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के निर्णायक नेतृत्व में सरकार ने मध्यम वर्ग को राष्ट्र निर्माण के केंद्र में रखा है। सही नीतियों के कारण आज आम नागरिक अधिक आय अर्जित कर रहे हैं, अधिक बचत कर पा रहे हैं और आत्मविश्वास के साथ खर्च भी कर रहे हैं। सरकार द्वारा 12 लाख रुपये तक की आय को कर-मुक्त करने का ऐतिहासिक निर्णय मध्यम वर्ग के लिए अभूतपूर्व राहत लेकर आया है और इस निर्णय ने अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान की है। नई पीढ़ी की जीएसटी सुधारों से देश के नागरिकों को लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है, जिसका प्रभाव 2025 में दो-पहिया वाहनों के पंजीकरण के 2 करोड़ के पार पहुंचने से स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। दशकों तक मध्यम वर्ग ने बिना समुचित पहचान के करों का बोझ उठाया। वर्तमान सरकार ने करदाताओं की कठिन परिश्रम से अर्जित आय का सम्मान करते हुए इस स्थिति में परिवर्तन लाया है तथा मध्यम वर्ग को ‘विकसित भारत’ की रीढ़ के रूप में सम्मानित किया है।

अन्नदाता का समग्र कल्याण

मोदी सरकार के लिए समृद्ध किसान ही ‘विकसित भारत’ की पहली शर्त है। इसी भावना के साथ पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत किसानों के खातों में 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है। देश में 330 मिलियन टन से अधिक खाद्यान्न उत्पादन हुआ है। 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल उत्पादक बन चुका है और 200 लाख टन मछली उत्पादन के साथ विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है, जो वर्ष 2014 की तुलना में 105% की वृद्धि को दर्शाता है। दूध उत्पादन में भी भारत विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है। सरकार कृषि उत्पादों का आयात कम करने के लिए काम कर रही है। खाद्य तेल, तिलहन और दलहन में आयात निर्भरता कम करने के लिए राष्ट्रीय मिशन के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। कृषि अवसंरचना को आधुनिक बनाने हेतु कृषि अवसंरचना कोष के माध्यम से 1.25 लाख करोड़ रुपये का निजी निवेश आकर्षित किया गया है।

सामाजिक न्याय और समावेशी कल्याण के माध्यम से अमृत काल का साकार रूप

सरकार शुरू से ही ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र पर चलते हुए प्रत्येक भारतीय के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास कर रही है। जिसमें सरकार द्वारा दलितों, पिछड़ों, वंचितों और जनजातीय समुदायों के कल्याण के लिए संवेदनशीलता के साथ कार्य किया गया है। सरकार ने प्रमुख बीमारियों के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष किया है। जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए 6.5 करोड़ से अधिक नागरिकों की स्क्रीनिंग की गई है। इसके अतिरिक्त 400 से अधिक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की स्थापना की गई है, जिससे आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण हो पा रहा है। पिछले 11 वर्षों में अनुसूचित जनजाति के छात्रों को 42,000 करोड़ रुपये से अधिक की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियां प्रदान की गई हैं, जिसके माध्यम से अब तक लगभग 5 करोड़ विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं।

विनिर्माण विस्तार और सतत आर्थिक विकास

जब वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभाला, तब देश की अर्थव्यवस्था ‘फ्रैजाइल फाइव’ में शामिल थी, आर्थिक वृद्धि ठप थी, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां बढ़ चुकी थीं, कॉरपोरेट क्षेत्र गंभीर संकट में था। पिछले ग्यारह वर्षों में निर्णायक सुधारों के माध्यम से भारत की आर्थिक नींव को पुनः मजबूत किया गया है। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सशक्त नेतृत्व में ‘मेक इन इंडिया’ पहल ने घरेलू विनिर्माण को मजबूती दी है। आयात पर निर्भरता कम हुई है। कुशल युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं। आज भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल विनिर्माण केंद्र बन चुका है। यूरोपीय संघ के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते से यह गति और तेज होगी, इससे नए बाजार खुलेंगे, उद्योग मजबूत होंगे। देश के युवाओं के लिए व्यापक रोजगार के अवसर सृजित होंगे। बार-बार आए वैश्विक संकटों के बावजूद भारत आज विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है।

अवसंरचना आधारित दीर्घकालिक विकास

भारत आधुनिक अवसंरचना में अभूतपूर्व निवेश कर रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की गई थी। पिछले एक वर्ष में देश में लगभग 18,000 किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है। इसके परिणामस्वरूप भारत की लगभग पूरी ग्रामीण आबादी सड़क संपर्क से जुड़ चुकी है। वर्तमान सरकार के नेतृत्व में भारतीय रेल राष्ट्रीय एकता और आधुनिक अवसंरचना का नया अध्याय लिख रही है। जम्मू-कश्मीर में स्थित विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज चिनाब ब्रिज से लेकर तमिलनाडु के नए पंबन ब्रिज तक भारत ने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में वैश्विक मानक स्थापित किए हैं।

उत्तर-पूर्व को भारत के विकास का इंजन बनाना

स्वतंत्रता के बाद देश के कई क्षेत्र और जनसमूह विकास से वंचित रह गए। यूपीए शासनकाल में तत्कालीन सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति के कारण उत्तर-पूर्व को अस्थिरता की ओर धकेला गया। ‘पूर्वोदय’ के विजन के साथ वर्तमान सरकार उत्तर-पूर्व में समावेशी विकास सुनिश्चित कर रही है, उसे भारत के विकास का इंजन बना रही है और क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता स्थापित कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में उत्तर-पूर्व पर अभूतपूर्व ध्यान दिया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत उत्तर-पूर्व में 50,000 ग्रामीण सड़कों का निर्माण किया गया है, जिससे बाजारों और विद्यालयों तक सुगम पहुंच सुनिश्चित हुई है। सरकार ने उत्तर-पूर्व में रेलवे के लिए 80,000 करोड़ रुपये का निवेश किया है।

विश्वगुरु भारतः वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व

आज विश्व तेजी से बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच एक कठिन दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में भी भारत विकास के मार्ग पर निरंतर आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि सरकार की संतुलित विदेश नीति और दूरदर्शी सोच का परिणाम है। आज की जटिल वैश्विक परिस्थितियों में भारत एक सेतु की भूमिका निभा रहा है। भारत ने वैश्विक दक्षिण की आवाज़ को मजबूती से विश्व मंच पर उठाया है। अफ्रीका और लैटिन अमेरिका में नए साझेदार बने हैं, वहीं बिम्सटेक, जी-20, ब्रिक्स, एससीओ और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका और उपस्थिति सशक्त हुई है। यूरोपीय संघ के साथ हुआ ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता भारत की वैश्विक आर्थिक सहभागिता में एक नया अध्याय जोड़ता है। इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत के पास है। भारत वैश्विक समुदाय को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से ‘ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट’ की मेजबानी करने जा रहा है। आज भारत केवल वैश्विक मंचों में भाग नहीं लेता। भारत उनका नेतृत्व करता है।

हमारी सभ्यतागत विरासत का सम्मान: औपनिवेशिक मानसिकता से भारतीय गौरव की ओर

सांस्कृतिक दृष्टि से भारत विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक है, किंतु औपनिवेशिक काल के दौरान भारतीयों में हीनता की भावना भरने के प्रयास किए गए। विदेशी आक्रमणों तथा स्वतंत्रता के बाद उपेक्षा के कारण अनेक प्राचीन पांडुलिपियों को भारी क्षति हुई। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के माध्यम से अब प्राचीन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का कार्य आरंभ किया गया है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष 150 वर्षों के बाद भारत वापस लाए गए हैं और उन्हें दर्शन हेतु जनता को समर्पित किया गया है। इस वर्ष सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण की 75वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। एक हजार वर्षों तक बार-बार हुए आक्रमणों के पश्चात भी सोमनाथ भारत की अटूट आस्था, संस्कृति और निरंतरता का प्रतीक बना रहा है, जिसका प्रतिबिंब सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में देशभर की अभूतपूर्व भागीदारी में दिखाई देता है। हाल ही में राजेंद्र चोल द्वारा स्थापित गंगैकोंडचोलपुरम की स्थापना के एक हजार वर्ष भी पूर्ण हुए हैं। यूनेस्को ने गरबा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया है। जब हम अपनी परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करते हैं, तब विश्व भी उनका सम्मान करता है।

राष्ट्रपति अभिभाषण में भारत की
विकास यात्रा का सजीव चित्रण था : नरेन्द्र मोदी



प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति अभिभाषण पर ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “राष्ट्रपति जी के प्रेरणादायी संबोधन के साथ आज संसद के बजट सत्र की शुरुआत हुई। यह संबोधन आने वाले समय में देश की विकास यात्रा को दिशा देने वाली नीतियों और सामूहिक संकल्प को स्पष्ट रूप से सामने रखता है। इसलिए हमारी संसदीय परंपराओं में इसका विशेष महत्त्व है।

संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति जी ने बहुत विस्तार से अपनी बातें रखीं। इसमें जहां हाल के वर्षों में भारत की विकास यात्रा का सजीव चित्रण था, वहीं भविष्य के लिए एक स्पष्ट और सुदृढ़ मार्गदर्शन भी दिखा। विकसित भारत के निर्माण पर विशेष बल एक सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध राष्ट्र के साझा संकल्प को सामने लाता है। अभिभाषण में किसानों, युवाओं, गरीबों और वंचित वर्गों के सशक्तीकरण के लिए निरंतर किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया गया। इसके साथ ही उन्होंने रिफॉर्म एक्सप्रेस को और गति देने, इनोवेशन को बढ़ावा देने और सुशासन को और सुदृढ़ करने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को भी दोहराया।”

यह अभिभाषण भारत के भविष्य के स्पष्ट विज़न को रेखांकित करता है: नितिन नवीन



भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन नवीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉम ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में लिखा, “माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संसद के दोनों सदनों में सामूहिक अभिभाषण राष्ट्र की संवैधानिक परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और भारत के भविष्य के स्पष्ट विज़न को रेखांकित करता है। यह अभिभाषण ‘विकसित भारत’ की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतिबिंब है।”

उन्होंने आगे लिखा, “आज बजट सत्र की शुरुआत के समय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के दौरान विपक्ष का व्यवहार बेहद गलत और निराशाजनक रहा। ऐसे मौके पर शांति, सम्मान और गंभीरता जरूरी होती है, लेकिन कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने संसद की मर्यादा का ध्यान नहीं रखा।

समझ से परे है कि राष्ट्र से जुड़े भावनात्मक शब्दों, बंगाल की गौरवशाली परंपरा और वंदे मातरम् जैसे विचारों से इन दलों को आपत्ति क्यों है। हैरानी की बात यह रही कि तृणमूल कांग्रेस भी इस पूरे हंगामे का हिस्सा बनी रही।

संसद देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था है। वहां किया गया ऐसा व्यवहार न केवल गलत है, बल्कि जनता की भावनाओं को भी आहत करता है। इस तरह की हरकतों के लिए विपक्ष को देश और संसद से माफी मांगनी चाहिए।”