हम संकल्प लें क्वॉलिटी में ना कोई कमी होगी, ना क्वॉलिटी से कोई समझौता होगा
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 25 जनवरी को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 130वीं कड़ी की शुरुआत में कहा कि मतदाता ही लोकतंत्र की आत्मा होता है। आमतौर पर जब कोई 18 साल का हो जाता है, मतदाता बन जाता है तो उसे जीवन का एक सामान्य पड़ाव समझा जाता है, लेकिन दरअसल ये अवसर किसी भी भारतीय के जीवन का बहुत बड़ा मील का पत्थर होता है। इसलिए बहुत जरूरी है कि हम देश में वोटर बनने का, मतदाता बनने का, उत्सव मनाएं। जैसे हम जन्मदिन पर शुभकामनाएं देते हैं और उसे सेलिब्रेट करते हैं, ठीक वैसे ही जब भी कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो पूरा मोहल्ला, गांव या फिर शहर एकजुट होकर उसका अभिनंदन करे और मिठाइयां बांटी जाएं। इससे लोगों में वोटिंग के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। इसके साथ ही यह भावना और सशक्त होगी कि एक वोटर होना कितना मायने रखता है।
भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम
श्री मोदी ने कहा कि दस साल पहले जनवरी, 2016 में हमने एक महत्वाकांक्षी यात्रा की शुरुआत की थी। तब हमें इस बात का एहसास था कि भले ही ये एक छोटा क्यों ना हो ये, लेकिन ये युवा-पीढ़ी के लिए, देश के भविष्य के लिये काफी अहम है। तब कुछ लोग ये समझ ही नहीं पाए थे कि ये आखिर है क्या? मैं जिस यात्रा की बात कर रहा हूं, वह है स्टार्ट-अप इंडिया की यात्रा।
उन्होंने कहा कि भारत में आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन चुका है। ये स्टार्ट-अप्स लीक से हट के हैं। आज वे ऐसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, जिनके बारे में 10 साल पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। एआई, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, सेमीकंडक्टर, मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक्नोलॉजी आप नाम लीजिए और कोई न कोई भारतीय स्टार्ट-अप उस क्षेत्र में काम करते हुए दिख जाएगा।
‘जीरो डिफेक्ट – जीरो इफेक्ट’
श्री मोदी ने कहा कि आज ‘मन की बात’ के माध्यम से मैं देशवासियों, विशेषकर इंडस्ट्री और स्टार्ट-अप से जुड़े युवाओं से एक आग्रह जरूर करना चाहता हूं। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत पर दुनिया की नजरें हैं। ऐसे समय में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी भी है। वो जिम्मेदारी है– क्वॉलिटी पर जोर देने की। होती है, चलती है, चल जाएगा, यह युग चला गया। आइए, इस वर्ष हम पूरी ताकत से क्वॉलिटी को प्राथमिकता दें। हम सबका एक ही मंत्र हो क्वॉलिटी, क्वॉलिटी और सिर्फ क्वॉलिटी। कल से आज बेहतर क्वॉलिटी।
उन्होंने कहा कि हम जो भी उत्पादन कर रहे हैं, उसकी क्वॉलिटी को बेहतर बनाने का संकल्प लें। चाहे हमारे कपड़ा हो, टेक्नोलॉजी हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक्स, यहां तक कि पैकेजिंग भी; भारतीय उत्पाद का मतलब ही बन जाए – टॉप क्वॉलिटी। आइए, उत्कृष्टता को हम अपना बेंचमार्क बनाएं। हम संकल्प लें क्वॉलिटी में ना कोई कमी होगी, ना क्वॉलिटी से कोई समझौता होगा और मैंने तो लाल किले से कहा था ‘जीरो डिफेक्ट – जीरो इफेक्ट’। ऐसा करके ही हम ‘विकसित भारत’ की यात्रा को तेजी से आगे ले जा पाएंगे।
भजन और कीर्तन सदियों से हमारी संस्कृति की आत्मा
श्री मोदी ने कहा कि हमारे देश में भजन और कीर्तन सदियों से हमारी संस्कृति की आत्मा रहे हैं। हमने मंदिरों में भजन सुने हैं, कथा सुनते वक्त सुने हैं और हर दौर ने भक्ति को अपने समय के हिसाब से जिया है। आज की पीढ़ी भी कुछ नए कमाल कर रही है। आज के युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और अपनी जीवन-शैली में ढाल दिया है। इसी सोच से एक नया सांस्कृतिक चलन उभरकर सामने आया है। आपने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो जरूर देखे होंगे। देश के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में युवा इकट्ठा हो रहे हैं। मंच सजा होता है, रोशनी होती है, संगीत होता है, पूरा ताम-झाम होता है और माहौल किसी कॉन्सर्ट से जरा भी कम नहीं होता है। ऐसा ही लग रहा है कि जैसे कोई बहुत बड़ा कॉन्सर्ट हो रहा है, लेकिन वहां जो गाया जा रहा होता है वो पूरी तन्मयता के साथ, पूरी लगन के साथ, पूरी लय के साथ भजन की गूंज।
उन्होंने कहा कि इस चलन को आज ‘भजन क्लबिंग’ कहा जा रहा है और यह खासतौर पर Gen Z के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह देखकर अच्छा लगता है कि इन आयोजनों में भजन की गरिमा और शुचिता का पूरा ध्यान रखा जाता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता। ना शब्दों की मर्यादा टूटती है और ना ही भाव की। मंच आधुनिक हो सकता है, संगीत की प्रस्तुति अलग हो सकती है, लेकिन मूल भावना वही रहती है। अध्यात्म का एक निरंतर प्रवाह वहां अनुभव होता है।

